Rahul Gandhi: टमाटर की जगह कच्चे आम को डाल कर बना रहे सब्जी, राहुल गांधी से मिलकर लोगों सुनाई कहानी
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अब क्या करें...टमाटर इतना महंगा है, तो कच्चे आम को ही पीस कर सब्जी में डाल देते हैं...खट्टापन आ जाता है। सब्जी तो खानी ही है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि पहले जो सिलेंडर पांच सौ रुपये का मिलता था, उसके लिए 1100 रुपये चुकाने पड़ते हैं। बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। खर्चा पानी का आलम यह है कि बीते डेढ़ साल से पैसा बचा रहा हूं, ताकि अपने घर जा सकूं। लेकिन अपने गांव अपने घर में इतने सालों से इसी बढ़ती हुई महंगाई के चलते नहीं जा पा रहा हूं। राहुल गांधी ने हाल में ही आजादपुर मंडी में जब लोगों से मुलाकात की, तो कुछ इस तरह का दर्द ही उभर कर सामने आया। राहुल गांधी की आजादपुर मंडी में लोगों से हुई मुलाकात के वीडियो को कांग्रेस ने साझा किया है।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मुलाकात के दौरान जब लोगों से बातचीत की, तो यही निकल कर आया कि लोगों को महंगाई बुरी तरीके से तोड़ रही है। राहुल गांधी ने मंडी में आए किसानों व्यापारियों और लोगों से चाय पीते हुए बातचीत शुरू की, तो लोगों की ओर से महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने बताया कि सिलेंडर की कीमतों से लेकर लगाई गई जीएसटी तक से उनका जीना मुहाल हो रहा है। मंडी में मौजूद व्यापारी केवलानंद लोहनी ने राहुल गांधी से बताया कि वह सुबह दो बजे से काम पर पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि यूपीए की सरकार में बचत हो जाती थी, लेकिन इस सरकार में उनका बड़ा नुकसान हो रहा है। लोहानी कहते हैं कि ऐसे हालातों में न सिर्फ वह बल्कि उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान हैं। बच्चे चाहते हैं कि वह ये काम न करें, लेकिन उनके पास रोज़गार के अवसर भी नहीं हैं।
राहुल गांधी से इस दौरान मुलाकात में लोगों ने बताया कि किसानों से उपभोक्ताओं तक फसल पहुंचाने के लिए इतनी कड़ियां इस्तेमाल होती हैं कि जिस रेट पर किसान मंडी में अपनी सब्जी बेचता है उससे कई गुना ज्यादा लोगों तक पहुंचते-पहुंचते सब्जी महंगी हो जाती है। इससे न तो किसानों को फायदा है न ही सब्जी खरीदार को फायदा होता है। यहां मौजूद एक सब्जी व्यापारी ने बताया कि जो टमाटर पब्लिक को 160 रुपये में मिलता है, वही टमाटर होलसेल के बड़े काउंटर पर इससे कम कीमत पर मिल जाता है। उक्त व्यापारी की मांग थी अगर किसान से सीधे उपभोक्ताओं के पास ही सब्जी पहुंचे, तो किसान को भी फायदा होगा और उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा। लेकिन ऐसा ना होने से हर तबका परेशान है जबकि बीच के लोगों को इसमें बड़ा फायदा हो रहा है।
देश की सबसे बड़ी मंडियों में से एक दिल्ली की आजादपुर मंडी में राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान मंडी के मजदूर जटाशंकर कहते हैं कि वह इस काम के कारण एक साल से ज़्यादा से घर नहीं जा पाए हैं। अपने परिवार से नहीं मिल पाए हैं। घर पर बीवी और बच्चे कैसे हैं, बस टेलीफोन पर ही हाल-चाल मिल पाता है। कहते हैं इस महंगाई के दौर में सब कुछ कैसे किया जाए, समझ में नहीं आता है। उनका कहना है कि अगर काम छूट जाएगा तो पैसे कट जाएंगे। और फिर ऐसी दशा में न उनका गुजारा होगा और न यहां से घर भेजने के पैसे बचेंगे।
अपनी इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने मौजूद लोगों से जीएसटी से लेकर महंगाई के बढ़े हुए दौर के हर मुद्दे पर बातचीत की। मौजूद लोगों ने उनको किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली सब्जी और जरूरत की चीजों के बीच की पूरी कड़ियों के बारे में विस्तार से भी बताया। इन दौरान लोगों ने कहा कि जीएसटी के चलते उनकी पूरी तरीके से कमर टूट गई है। राहुल गांधी ने अपनी मुलाकात के दौरान मंडी में 1998 से काम करने वाले एक व्यक्ति से मुलाकात की। राहुल गांधी ने अपनी मुलाकात के दौरान उसके बेटे से भी मुलाकात कर उसके बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।
पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ऐसे ही रोज कमाने खाने वालों से इनफॉर्मल तरीके से मुलाकात कर उनके दुख दर्द को समझा था। राजनीतिक जानकार हरजोत सिंह कहते हैं कि निश्चित तौर पर लोगों से इस तरह मिलने का सियासी फायदा होता है। उनके मुताबिक कर्नाटक में जो नतीजे कांग्रेस के लिए आए हैं, उसमें आप राहुल गांधी की इस तरह लोगों से मिलने जुलने की प्रक्रिया के योगदान को कम नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी लगातार उस तबके से मुलाकात कर रहे हैं जो रोज की जिंदगी में कमाने खाने वालों में शामिल हैं।