फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Varun Gandhi with farmers: letter to CM Yogi, demand for sugarcane price to Rs 400 per quintal

वरुण गांधी की मांग : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुनें किसानों की बात, गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल करें

Sun, 12 Sep 2021 03:31 PM IST
amit sharma अमित शर्मा
Updated Sun, 12 Sep 2021 03:31 PM IST
सार

वरुण गांधी ने मनरेगा मजदूरों को कृषि कार्यों में भी लगाने और किसान सम्मान निधि 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये करने की मांग की है। 

विज्ञापन
Varun Gandhi with farmers: letter to CM Yogi, demand for sugarcane price to Rs 400 per quintal
भाजपा सांसद वरुण गांधी - फोटो : amar ujala

विस्तार

भाजपा सांसद वरूण गांधी ने एक बार फिर मजबूती के साथ किसानों की मांग उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखते हुए गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल करने, गेहूं-धान के ज्यादा खरीद केंद्र स्थापित करने और किसानों के लिए बिजली के रेट कम करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से किसानों को दी जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सहायता योजना की राशि 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये करने की महत्वपूर्ण मांग भी की है। वरूण गांधी ने कहा है कि अगर सरकार इन कदमों को उठाती है तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

विज्ञापन


पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने कहा है कि पिछला कुछ समय किसानों के लिए बहुत कठिन बीता है। कृषि के मोर्चे पर परेशानियों के साथ-साथ कोरोना के कारण भी उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में अगर सरकार देश के किसानों के लिए बेहतर आर्थिक नीति घोषित करती है तो इससे उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा है कि वे लंबे समय से किसान और कृषि के विषयों पर गंभीरता से लिखते रहे हैं, और इसके आधार पर कह सकते हैं कि किसानों की इन मांगों को पूरा करना सरकार की आर्थिक क्षमता में है।
विज्ञापन


इसके पहले भी वरूण गांधी ने खुलकर किसानों के अधिकार की आवाज उठाते हुए कहा था कि सरकार को किसानों से बातचीत शुरू करनी चाहिए। किसानों ने वरूण गांधी के इस पत्र का स्वागत किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोरोना से किसानों को भी हुआ नुकसान
कृषि विशेषज्ञों का तर्क रहा है कि जिस प्रकार सरकार औद्योगिक घरानों को हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज देती रही है, उसे उसी तर्ज पर किसानों की भी मदद करनी चाहिए। क्योंकि कोरोना काल में जिस तरह औद्योगिक घरानों को नुकसान हुआ है, उसी प्रकार किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। करोड़ों किसानों की फसलें इस दौरान नहीं बिक पाई हैं और करोड़ों किसानों के फल-सब्जी उत्पाद खरीदने वाला कोई नहीं था। या तो उन्होंने इसे बेहद कम कीमत पर बेचा या उन्हें इसे सड़कों पर फेंक देना पड़ा। 

मनरेगा श्रमिकों को कृषि कार्यों में लगाएं

वरुण गांधी ने पत्र में यूपी सरकार और केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा भी की है, लेकिन उन्होंने कहा है कि बदले हुए समय में इन्हें और अधिक किया जाना चाहिए। वरूण गांधी ने कहा है कि अगर मनरेगा मजदूरों को कृषि कार्यों में भी लगाए जाने की अनुमति दे दी जाती है तो इससे किसानों की कृषि लागत कम करने में मदद मिलेगी। यह किसानों की प्रमुख मांग है जिसे सरकार ने अब तक स्वीकार नहीं किया है।

चार साल में मात्र 10 रुपये बढ़ाया गन्ने का मूल्य
भाजपा सांसद ने कहा है कि उनके लोकसभा क्षेत्र के किसानों ने उनसे आग्रह किया है कि वे उनकी बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने में उनकी मदद करें और वे वही कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि यूपी सरकार ने पिछले चार साल में गन्ने के मूल्य में केवल 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जबकि इसी दौरान महंगाई में भारी वृद्धि हुई है। बिजली-पानी-डीजल-बीज-खाद जैसी सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इसलिए किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।

गन्ना बकाया भुगतान भी पूरा नहीं किया
उन्होंने लिखा है कि गन्ना बकाया भुगतान अभी भी पूरा नहीं किया गया है, किसानों के पास अपनी पूरी फसल बेचने की सुविधा भी नहीं है जिससे उन्हें मजबूरन अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने पड़ रही है। अगर किसानों की पूरी फसलों की खरीद सुनिश्चित कर दी जाए तो इससे उन्हें अपनी फसल को कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

बिजली बिल के दाम कम किए जाएं

नई बिजली नीति को लेकर भी आंदोलन कर रहे किसानों के मन में भारी चिंता है। वरूण गांधी ने किसानों की इन चिंताओं को भी साझा किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को बिजली बिल के दाम कम करने चाहिए जिससे कृषि उपज का मूल्य कम किया जा सके। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों को प्रति वर्ष 6000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। लेकिन बढ़ी हुई महंगाई के कारण यह बहुत कम है जिसे बढ़ाकर कम 12,000 रुपये वार्षिक किया जाना चाहिए।


 

किसानों ने किया स्वागत

किसान संयुक्त मोर्चा के नेता अविक साहा ने कहा है कि किसानों के अधिकारों की मांग को आगे बढ़ाने में जो भी आगे आता है, उन सबका स्वागत है। यह कार्य किसी व्यक्ति के हित में नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के करोड़ों किसानों के हित की बात है। किसान नेता ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि कोरोना काल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में किसानों ने सबसे आगे बढ़कर भूमिका निभाई। जब सारे उद्योग धंधे चौपट हो गए, तब केवल किसान ही अपने मोर्चे पर डटे रहे और करोड़ों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का काम किया। उन्होंने कहा कि सरकारों के साथ-साथ पूरे देश को किसानों की समस्या को समझना चाहिए और उनका साथ देना चाहिए।

अविक साहा ने कहा कि इस मांग को किसी पार्टी या सरकार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारें आती-जाती रहती हैं, देश और इसका समाज हमेशा बरकरार रहता है। किसानों का मुद्दा पूरे देश का मुद्दा है और वरूण गांधी की तरह हर देशवासी को सामने आकर सरकार से यह बात करनी चाहिए जिससे सरकार किसानों के हित में शीघ्र ही यह कदम उठाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed