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UP: कैसे एक शख्स 8 साल चलाता रहा फर्जी दूतावास, क्या होते हैं स्वयंभू राष्ट्र, जिनका राजदूत बताकर करता था ठगी?

Thu, 24 Jul 2025 05:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 24 Jul 2025 05:15 PM IST
सार

आखिर एक व्यक्ति के फर्जी राजदूत बनने, नकली दूतावास चलाने और खुद को गढ़े हुए देशों का प्रतिनिधि बताने का यह पूरा मामला क्या है? जिस शख्स को गिरफ्तार किया गया है, उसका इतिहास क्या रहा है? उसके फर्जीवाड़े को लेकर क्या-क्या सबूत मिले हैं? यह स्वयंभू देश असल में क्या होते हैं, जिनका नाम लेकर आरोपी लंबे समय से धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था? आइये जानते हैं...

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Uttar Pradesh Ghaziabad Fake Embassy Busted Westarctica Ladonia Harshvardhan Jain Diplomat Ambassador Police
गाजियाबाद फर्जी दूतावास मामले में गिरफ्तार हर्षवर्धन जैन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के कवि नगर इलाके से हर्षवर्धन जैन नाम के एक शख्स को मंगलवार को जब गिरफ्तार किया गया। जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई, वह न सिर्फ खुद को फर्जी राजदूत के तौर पर पेश कर रहा था, बल्कि उसने खुद को ऐसे देशों का प्रतिनिधि बताया था, जिनका दुनिया में अस्तित्व ही नहीं था। यह पूरा फर्जीवाड़ा जिस व्यक्ति ने किया, वह ऐसा बीते सात साल से कर रहा था और पुलिस पहले भी उसे एक अलग मामले में गिरफ्तार कर चुकी थी।
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आखिर एक व्यक्ति के फर्जी राजदूत बनने, नकली दूतावास चलाने और खुद को गढ़े हुए देशों का प्रतिनिधि बताने का यह पूरा मामला क्या है? जिस शख्स को गिरफ्तार किया गया है, उसका इतिहास क्या रहा है? उसके फर्जीवाड़े को लेकर क्या-क्या सबूत मिले हैं? यह स्वयंभू देश असल में क्या होते हैं, जिनका नाम लेकर आरोपी लंबे समय से धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था? आइये जानते हैं...
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कौन है हर्षवर्धन जैन?
हर्षवर्धन जैन को लेकर पुलिस ने जो खुलासे किए हैं, उसके मुताबिक वह एक साथ कई जिंदगियां जी रहा था। वह मूलतः गाजियाबाद का ही रहने वाला था और यहीं के कॉलेज से एमबीए कर चुका था। इसके अलावा उसके लंदन के एक कॉलेज से एमबीए किए जाने की बातें भी सामने आती हैं। बताया जाता है कि जैन के पिता गाजियाबाद में ही व्यापारी थे और उसके परिवार के पास राजस्थान में संगमरमर की खानों का मालिकाना हक था। 

हर्षवर्धन का परिवार राजनीतिक रूप से भी रसूखदार रहा है। एसटीएफ के एएसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि हर्षवर्धन के ससुर आनंद जैन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा विंग से जुड़े रहे हैं। आनंद जैन के यहां चंद्रास्वामी का आना जाना था। तभी हर्षवर्धन का परिचय चंद्रास्वामी से हुआ। 
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पिता के निधन के बाद हर्षवर्धन जब वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहा था, तब चंद्रास्वामी ने उसे लंदन भेजने और कुछ व्यापार शुरू करवाने में मदद की। आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए जैन ने अवैध व्यापार और हवाला कारोबार को बढ़ावा दिया। इस बीच चंद्रास्वामी के निधन के बाद उसे कारोबार में कुछ नुकसान हुआ और वह गाजियाबाद लौट आया। यहां उसने कवि नगर में पहले अपने पिता के घर में फर्जी दूतावास खड़ा किया। बाद में कुछ ही दूरी पर एक बड़े बंगले को किराए पर लिया और उसे दूतावास की तरह पेश करने लगा। कुछ और लोगों के सामने वह इसे वेस्टआर्कटिका के महावाणिज्य दूतावास के तौर पर पेश करता रहा। 
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Uttar Pradesh Ghaziabad Fake Embassy Busted Westarctica Ladonia Harshvardhan Jain Diplomat Ambassador Police
अवैध दूतावास मामला - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के मुताबिक, हर्षवर्धन जैन अधिकतर लोगों को अपनी पहचान 'वेस्टआर्कटिका के राजदूत' के तौर पर बताता था। वहीं कुछ और लोगों को वह सेबोर्गा, लोडोनिया और पॉलविया जैसे स्वयंभू देशों (माइक्रोनेशन्स) का राजनयिक बताया था। वेस्टआर्कटिका को लेकर जैन की तरफ से दावा किया जाता था कि इस स्वयंभू देश को अमेरिका के एक नौसैनिक अफसर ने खोजा था। यूं तो इसे औपचारिक तौर पर किसी भी देश से मान्यता मिलने की बात सामने नहीं आती, लेकिन आरोपी इसका नाम इस्तेमाल करने के साथ-साथ इस देश की ओर से दिए हुए फर्जी शीर्षक और गौरवशाली पदों का जिक्र करता था। इस फर्जीवाड़े के जरिए वह उच्च-पदस्थ समूहों में जगह बनाने की काफी कोशिश में भी था। 

कैसे फर्जी दूतावास के जरिए बुना झूठ का जाल?
हर्षवर्धन जैन ने वेस्टआर्कटिका और अलग-अलग स्वयंभू देशों के जरिए खुद को राजनयिक बताने के लिए गहरा जाल बुना था। वह इंस्टाग्राम पर इससे जुड़ा एक पेज बना चुका था। 22 जुलाई को पुलिस की छापेमारी से ठीक पहले इस पेज पर कवि नगर वाले बंगले की एक तस्वीर पोस्ट की गई थी, जिसमें हर्षवर्धन जैन को 'बैरन एचवी जैन' कह कर संबोधित किया गया था। 'बैरन' आमतौर पर समाज में उच्च पद रखने वालों को दिया जाने वाला शीर्षक है। इस पोस्ट में यह भी कहा गया था कि जैन 2017 से ही दूतावास का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और चैरिटी कार्यक्रमों की मेजबानी भी करते हैं। 

जैन ने वेस्टआर्कटिका का एक झंडा भी अपने इस फर्जी दूतावास के सामने लगा रखा था। इसके अलावा उसने कई लग्जरी कारें जिनमें फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स, फर्जी बिजनेस कार्ड्स, प्रेस से जुड़े पास और पोस्टर बनवाए थे और इनका समय-समय पर प्रदर्शन करता रहता था, ताकि उसके फर्जीवाड़े को लेकर किसी को शक न हो। बीते करीब सात वर्षों से वह लगातार इस झूठ के जाल के जरिए फर्जीवाड़ा जारी रखने में कामयाब रहा। इतना ही नहीं, जैन ने अपने आप को विश्वसनीय दिखाने के लिए देश के कुछ अहम नेताओं, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ अपनी एडिटेड तस्वीरें भी लगाईं थीं। 

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फर्जी दूतावास - फोटो : संवाद
खुद को जिन फर्जी देशों का राजदूत-राजनयिक बताता था जैन, उनकी सच्चाई क्या?
हर्षवर्धन जैन खुद को स्वयंभू देशों का राजदूत या राजनयिक बताता था। यह ऐसे छोटे से क्षेत्र या राज्य होते हैं, जो कि खुद को देश के तौर पर मान्यता दिलवाना चाहते हैं। आमतौर पर यह पहले से ही किसी स्वतंत्र देश या स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा होते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पहले से संयुक्त राष्ट्र में मान्य एक देश के अंदर बने इन क्षेत्रों को अलग से मान्यता नहीं दी जाती।  

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कई बार इन स्वयंभू देशों को मान्यता न मिलने के बावजूद इनके संस्थापक अपनी खुद की मुद्रा, पोस्टल स्टांप, राष्ट्रगान, झंडा और पासपोर्ट तक जारी कर देते हैं। हालांकि, इन्हें मान्यता न मिलने की स्थिति में यह दूसरे देशों में फर्जी करार दिए जाते रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी स्वयंभू देशों को मान्यता नहीं दी जाती। ऑस्ट्रेलिया के करीब कई स्वयंभू देश स्थित हैं। कुछ और स्वयंभू देश पहले ब्रिटेन साम्राज्य का हिस्सा थे, जिन्हें आधिकारिक तौर पर भले ही देश की मान्यता न दी गई हो, लेकिन कुछ देश उनसे व्यापार और रिश्ते रखते हैं। इनमें 1967 में प्रिंसिपैलिटी ऑफ सीलैंड और प्रिंसिपैलिटी ऑफ हट रिवर शामिल हैं। 

इनके अलावा स्कॉटलैंड के पास रिपब्लिक ऑफ लैंब द्वीप को भी एक स्वायत्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। यह द्वीप अपनी नागरिकता भी देता है। इसी तरह का एक और स्वयंभू देश रिपब्लिक ऑफ मिनरवा है, जो कि फिजी और टोंगा जैसे प्रशांत महासागर में स्थित देशों के पास एक द्वीप पर बसा है। हालांकि, इसे भी देश के तौर पर मान्यता नहीं मिली है। 



वेस्टआर्कटिका: जैन खुद को वेस्टआर्कटिका का राजदूत बताता था। हालांकि, यह कोई असल देश नहीं है। इसे 2001 में एक अमेरिकी ट्रैविस मैक्हेनरी ने अंटार्कटिक के गैर-बसावट वाले क्षेत्र में बनाने का दावा किया था। इसकी एक अपनी वेबसाइट है, जिसमें कई तरह के दावे किए गए हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र, भारत सरकार या किसी अन्य औपचारिक व्यवस्था से इसे मान्यता नहीं मिली है। 

सेबोरगा: दूसरी तरफ सेबोरगा इटली के इंपीरिया प्रांत में एक गांव है, जिसका कुल क्षेत्रफल महज 14 वर्ग किमी है। फ्रांस की सीमा के नजदीक आने वाले इस स्वयंभू देश ने खुद को प्रिंसिपैलिटी ऑफ सेबोरगा का नाम दिया है। हालांकि, इसे भी मान्यता नहीं दी गई है। 

लडोनिया: 1986 में स्वीडन के दक्षिण में आने वाले कुलाबर्ग में एक कलाकार लार्स विल्क्स ने स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन के बाद रॉयल रिपब्लिक ऑफ लडोनिया बनाने का एलान किया था। मौजूदा समय में इसमें क्वीन कैरोलीन शासन चलाती हैं और यह अभिव्यक्ति, कला और रचनात्मकता की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की बात करता है। इसे भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्वीडन का हिस्सा माना गया है। 

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गाजियाबाद में फर्जी दूतावास - फोटो : संवाद
पॉल्विया: दूसरी तरफ पुलिस को पॉल्विया के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। इसे अब तक दुनिया के नक्शे पर लोकेट नहीं किया जा सका है। हालांकि, हर्षवर्धन का दावा है कि वह भी स्थानीय लोगों द्वारा घोषित देश है। 

पुलिस को हर्षवर्धन जैन के यहां छापेमारी में क्या मिला?
  1. कविनगर जैसी पॉश कालोनी में किराये की कोठी सुनील अनूप सिंह की है। एक हजार मीटर वाली कोठी में आलीशान एक दर्जन से अधिक कमरे हैं। इनमें से दो कमरों में हर्षवर्धन ने फर्जी दूतावास खोल रखा था। अन्य कमरों में उसकी पत्नी आठ वर्षीय बेटे के साथ रहती थी। फर्जी दूतावास में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और प्रसिद्ध लोगों के साथ की एडिटेड फोटो लगाई गई हैं।
  2. एसटीएफ को बंगले से चार लग्जरी गाड़ियां और 12 विदेशी घड़ियां बरामद की हैं। कारों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ- बरामद मर्सिडीज कार 19 साल पुरानी है, जबकि दो ह्युंदै सोनाटा कारें 16 और 17 साल पहले की हैं। इनकी फिटनेस की अवधि भी खत्म हो चुकी है। चौथी कार ह्युंदै गेट्ज करीब पांच साल पुरानी है।
  3. इसके अलावा कारों के लिए 18 स्पेयर नंबर प्लेटें भी बरामद की गई हैं, जिनमें डीसी या सीडी के चिह्न लगे हैं। यह आधिकारिक तौर पर सिर्फ राजनयिकों के लिए रिजर्व होती हैं। हालांकि, जैन ने हूबहू वैसी नंबर प्लेटें भी बनवा लीं।
  4. आरोपी के पास से 12 फर्जी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट भी बरामद किए गए हैं। इनमें वेस्टआर्कटिका से लेकर अन्य काल्पनिक देशों के पासपोर्ट भी शामिल हैं। इसके अलावा उसके पास से अमेरिकी डॉलर, डिरहम और अन्य विदेशी मुद्राएं पाई गईं।
  5. उसके घर से 44.70 लाख कैश भी मिला। इसके अलावा दो प्रेस कार्ड, दो पैन कार्ड, कई फर्जी दस्तावेज, जिनमें एक वित्त मंत्रालय से जुड़ी चिट्ठी, न्योते और नेमप्लेट भी शामिल हैं। इसके अलाव उसके पास 34 फर्जी मोहरे भी मिलीं।

एसीपी कविनगर भास्कर वर्मा के अनुसार, बरामद चार में से तीन गाड़ियां एक्सपायर्ड हैं। इनमें असली नंबर प्लेट न होने के कारण ये गाड़ियां पुलिस चेकिंग में नहीं पकड़ी गईं। गाड़ियों पर विदेशी झंडे और विदेशी काउंसिल की नंबर प्लेट लगी थीं, जिससे पुलिस भी भ्रमित हो गई। हर्षवर्धन खुद को ऊंचे ओहदे पर बताकर पुलिस और आम लोगों को बरगलाता था। पूछताछ में हर्षवर्धन ने दावा किया कि मर्सिडीज कार ससुर ने तोहफे में दी थी। एक ह्युंदै सोनाटा कार उसकी पत्नी डिंपल के नाम पर है, जबकि दूसरी उसके पत्नी के भाई के नाम पर पंजीकृत है। ह्युंदै गेट्ज कार वह खुद इस्तेमाल करता है। 

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गाजियाबाद में फर्जी दूतावास - फोटो : संवाद
कथित गड़बड़ लेनदेन और फर्जी कारोबार को लेकर छापेमारी-पूछताछ जारी
पुलिस ने हर्षवर्धन जैन के खिलाफ धोखाधड़ी, ठगी, आपराधिक साजिश रचने और गलत पहचान दिखाने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस का मानना है कि इस काम में अन्य लोगों ने भी उसकी मदद की है। खासकर फर्जी दस्तावेज, नंबर प्लेट और पैसों के लेनदेन को संभालने में कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है। 

एसटीएफ की टीम ने आशंका जताई है कि लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल लोगों को झांसे में लेने और हवाला के काम में प्रयोग होता था। इसकी जांच एसटीएफ करेगी। बताया जा रहा है कि लंदन और दुबई में हर्षवर्धन ने करीब 18 कंपनियां स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बनाईं। इन सभी कंपनियों के जरिए हर्षवर्धन हवाला के धंधे में लिप्त था। एसटीएफ ने हर्षवर्धन से उसके और रिश्तेदारों के बैंक की बाबत भी जानकारी जुटाई है।

दूसरी तरफ हर्षवर्धन ने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए। उसने बताया कि उसकी दोस्ती वेस्टआर्कटिका और सेबोरगा की कई नामचीन हस्तियों से है। उसने कहा कि यह गलती थी कि उसने इन देशों के झंडे बंगले के बाहर लगाए। 

पूछताछ में हर्षवर्धन ने बताया कि उसकी पत्नी डिंपल जैन चांदनी चौक पर कारोबार करती हैं। बरामद 44.70 लाख रुपये उनकी कमाई के हैं। साथ ही घर के बंटवारे में उनके भाई से उनकी डील हुई थी। बरामद धनराशि में से 30 लाख रुपये भी इसी डील के हैं। विदेशों में आना-जाना लगा रहता था तो वहां खर्च के लिए मुद्रा परिवर्तन करानी पड़ती थी। बरामद विदेशी मुद्रा भी उन्हीं का हिस्सा है। एसीपी कविनगर के मुताबिक, एसटीएफ उसकी पत्नी के कारोबार की भी जांच करेगी। हर्षवर्धन से बरामद करीब एक दर्जन बैंक अकांउट्स का ब्यौरा भी एसटीएफ साथ ले गई है।
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