उत्तर प्रदेश चुनाव: स्वामी और चौहान की बगावत से पार्टी में घट रहा है उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का कद!
11 जनवरी को जब स्वामी के इस्तीफा देने की खबर आई, तो केशव मौर्या केंद्रीय नेताओं के साथ बैठक में थे। उन्होंने तत्काल ट्वीट करके स्वामी प्रसाद से जल्दबाजी में फैसला न लेने का अनुरोध किया था। हालांकि स्वामी ने भी समाजवादी पार्टी के सहयोगियों की सलाह पर अगला कदम उठाने में जरा भी देर नहीं लगाई...
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दो दिन में दो कैबिनेट मंत्री, स्वामी प्रसाद मौर्या और दारा सिंह चौहान ने मंत्रिमंडल और पार्टी से त्यागपत्र दे कर पार्टी के केंद्रीय नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। स्वामी प्रसाद मौर्या का भाजपा से जाना उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। 2017 में विधानसभा चुनाव से एन पहले तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के मार्गदर्शन में केशव ही स्वामी प्रसाद मौर्या को भाजपा में लाए थे। बताते हैं कि 11 जनवरी को जब स्वामी के इस्तीफा देने की खबर आई, तो केशव मौर्या केंद्रीय नेताओं के साथ बैठक में थे। उन्होंने तत्काल ट्वीट करके स्वामी प्रसाद से जल्दबाजी में फैसला न लेने का अनुरोध किया था। हालांकि स्वामी ने भी समाजवादी पार्टी के सहयोगियों की सलाह पर अगला कदम उठाने में जरा भी देर नहीं लगाई।
क्या है मौर्या का गणित?
स्वामी प्रसाद मौर्या मूल रूप से प्रतापगढ़ के हैं। पडरौना से चुनाव लड़ते हैं। रायबरेली, उंचाहार से लेकर बदायूं समेत तमाम जिलों के मौर्या समाज में ठीक-ठाक पकड़ रखते हैं। केशव प्रसाद मौर्या प्रयागराज क्षेत्र से आते हैं। केशव प्रसाद मौर्या की तरह ही महान दल के केशव देव मौर्या भी हैं। केशव देव ने महान दल की स्थापना की है, राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। केशव देव शाक्य, मौर्या और कुशवाहा में पकड़ का दावा करते हैं। इस तरह से उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीन बड़े मौर्या सक्रिय हैं। इनमें से दो मौर्या समाजवादी पार्टी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसे केशव प्रसाद मौर्या के भाजपा में कमजोर होने से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के बलिया के एक नेता का कहना है कि केशव प्रसाद की भाजपा में बड़ी ताकत पिछड़ी और दलित जातियों का आना था। अब इन जातियों के नेता वापस जा रहे हैं तो केशव को झटका लगना स्वाभाविक है। स्वामी प्रसाद केशव को अपना छोटा भाई भी बताते हैं। वह उन्हें खुद एक बेचारा नेता बताते हैं।
दारा सिंह चौहान को भी मनाने की आखिरी कोशिश
केशव प्रसाद मौर्या ने एक ट्वीट और किया है। उनका यह ट्वीट दारा सिंह चौहान को समझाने वाला है। इसमें उन्होंने दारा सिंह चौहान को डूबती नाव पर न सवार होने का अनुरोध किया है। दारा सिंह चौहान को बड़ा भाई संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्या ने उनसे अपने निर्णय पर पुन: विचार करने की अपील की है। खास बात यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्या की तरह ही दारा सिंह चौहान ने भी अपने इस्तीफे में भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ों और दलित वर्गों के ही अपमान, अनदेखी, उपेक्षा का आरोप लगाया है। माना यह जा रहा है कि दारा सिंह चौहान, मौर्या के जाने के बाद भाजपा को कोईरी, कुर्मी, पटेल, चौहान, शाक्य, कुशवाहा (काछी), वर्मा, प्रजापति, राजभर को अपने साथ सहेजे रहने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
स्वामी प्रसाद ने कहा इंतजार कीजिए, मुंह तोड़ जवाब दूंगा
स्वामी प्रसाद मौर्या अपना इस्तीफा देने के बाद अब आक्रामक मूड में हैं। वह 20 साल से अधिक समय तक बसपा में थे। 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। 14 जनवरी 2022 को समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने और भाजपा को बड़ी चुनौती देने का संकेत दे रहे हैं। बातचीत में स्वामी प्रसाद मौर्या कहते हैं कि अभी तमाम विधायक और कुछ मंत्री भाजपा छोडऩे की कतार में हैं। वह भाजपा नेताओं को घमंडी बताते हैं और कहते हैं कि उनकी पिछली पार्टी ने पिछले पांच साल तक लगातार पिछड़ों, दलितों, नौजवानों का अपमान किया है। उन्होंने इससे क्षुब्ध होकर इस्तीफा दिया है। मौर्या कहते हैं कि वह विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को मजा चखा देंगे।