फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Uttar Pradesh Congress Move will be biggest hurdle in path of PM Modi Mayawati will also be worried

Uttar Pradesh: कांग्रेस का यह दांव प्रधानमंत्री मोदी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा, मायावती भी हो जाएंगी चित

Thu, 14 Sep 2023 03:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 14 Sep 2023 03:01 PM IST
विज्ञापन
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर और अपने कठोर हिंदुत्व प्लान के जरिए दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में बड़ी सफलता पाई थी। ऐसे में यदि कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड खेलती है तो इससे भाजपा को भी बड़ा नुकसान हो सकता है। 
loader
Uttar Pradesh Congress Move will be biggest hurdle in path of PM Modi Mayawati will also be worried
Congress - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भाजपा उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों को जीतने के लिए 'मिशन 80' योजना पर काम कर रही है। उसकी योजना है कि यदि वह अपने सबसे मजबूत गढ़ यूपी को बचाने में सफल हो जाती है तो 2024 में केंद्र की सत्ता में आने की उसकी राह आसान हो जाएगी। लेकिन कांग्रेस ने देश के इस सबसे बड़े राज्य में अपने आप को मजबूत बनाने के लिए जो योजना बनाई है, यदि वह सफल हुई तो भाजपा की इस योजना को करारी चोट लग सकती है। इससे केवल भाजपा को ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि मायावती को भी अब तक का सबसे बड़ा झटका लग सकता है। 



क्या है योजना
दरअसल, चर्चा है कि कांग्रेस यूपी में अपनी वापसी के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। इसके लिए राहुल गांधी के साथ-साथ प्रियंका गांधी को भी प्रदेश की किसी सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है। अब इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने अपने दलित नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी मैदान में उतारने का प्लान बना लिया है। उन्हें बाराबंकी या इटावा से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा चल रही है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश या दलित मतदाता बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूती दे सकती है। यदि ऐसा हुआ तो अब तक मायावती के साथ मजबूती के साथ खड़े रहे दलित मतदाताओं की एक बड़ी संख्या कांग्रेस के पक्ष में मुड़ सकती है। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर और अपने कठोर हिंदुत्व प्लान के जरिए दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में बड़ी सफलता पाई थी। 2014 से लेकर 2022 तक भाजपा की यही योजना उसे यूपी में बड़ी ताकत बनाने में सबसे कारगर साबित हुई है। ऐसे में यदि कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड खेलती है तो इससे भाजपा को भी बड़ा नुकसान हो सकता है। 

दलित कांग्रेस से क्यों जुड़ेंगे
दरअसल, कांग्रेस का यह आइडिया आधारहीन नहीं है। कर्नाटक चुनाव में यह देखा गया है कि दलित मतदाताओं ने जनता दल सेक्युलर जैसी स्थानीय पार्टियों को वोट देने की बजाय निर्णायक भूमिका निभाने वाली कांग्रेस को वोट देना बेहतर समझा। यही कारण है कि एक तरफ जेडीएस के वोट घट गए तो कांग्रेस को वोट शेयरों में बड़ा उछाल आ गया। 

कांग्रेस नेता मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भी दलित मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मायावती की प्रभावहीन होती भूमिका से निराश है। वह अपने लिए विकल्प खोज रहा है। इसी विकल्प की तलाश में अति दलित जातियां तो भाजपा के साथ चली गई हैं, लेकिन जाटव के साथ-साथ कुछ जातियां अभी भी अपने लिए विकल्प तलाश रही हैं। कांग्रेस इन्हीं जातियों को अपने साथ जोड़ने की योजना बना रही है। 

अभी तक यह चर्चा थी कि कांग्रेस मायावती को इंडिया गठबंधन के खेमे में लाने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन न करने के बसपा के इतिहास और मायावती के बयान को देखते हुए माना जा रहा है कि उनका इंडिया गठबंधन में चुनाव पूर्व न आना तय हो गया है। यही कारण है कि अब कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के सहारे दलित कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है।   
  
मायावती क्यों हो जाएंगी चित 
राजनीतिक विश्लेषक राजकुमार भारद्वाज ने अमर उजाला से कहा कि बसपा का मतदाता देश के सबसे प्रतिबद्ध मतदाताओं के रूप में देखा जाता रहा है। किसी भी पार्टी के किसी भी झांसे में न आते हुए अब  तक वह मायावती को अपना एकमुश्त समर्थन देता रहा है। यही कारण है कि यूपी में शून्य सीटें आने के बाद भी बसपा का वोट प्रतिशत 20 प्रतिशत के लगभग बना रहा। लेकिन 2022 का विधानसभा चुनाव इस मामले में आश्चर्यजनक परिणाम देने वाला साबित हुआ। पहली बार मायावती के वोट बैंक में लगभग 9.35 प्रतिशत की कमी आई, जबकि समाजवादी पार्टी के वोट प्रतिशत में 10.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। समाजवादी पार्टी को चुनाव में  हार के बाद भी 32 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले। इतना वोट उसे मुलायम सिंह के समय में भी कभी नहीं मिले थे। 

यह विश्वेषण बताता है कि बसपा के मतदाताओं ने मजबूत विकल्प की स्थिति में देखते हुए समाजवादी पार्टी को वोट कर दिया था। स्वयं कांग्रेस के भी मतदाताओं ने अखिलेश यादव को मजबूत विकल्प पाते हुए उन्हें वोट दिया जिसके कारण उसका मत प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से सबसे कमजोर हो गया। 
कांग्रेस अब दलित मतदाताओं को लुभाकर देश के सबसे बड़े राज्य में न केवल अपनी वापसी का रास्ता तैयार करना चाहती है, बल्कि मजबूत विकल्प देकर अपना अस्तित्व भी बचाना चाहती है। उसे भी पता है कि यदि उसने मजबूत विकल्प नहीं दिया तो रहे सहे मतदाता भी विकल्प पाने की कोशिश कर सकते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed