फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Uttar Pradesh and Bihar villages are severely affected by coronavirus because lack of Doctors on Primary health centre

खुलासा: बिहार और उत्तर प्रदेश में इस वजह से फैल रहा है कोरोना, देश के 81 फीसदी गांवों में डॉक्टर ही नहीं

Tue, 18 May 2021 06:13 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 18 May 2021 06:13 PM IST
सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 81 फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इनमें सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की किल्लत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में है...

विज्ञापन
Uttar Pradesh and Bihar villages are severely affected by coronavirus because lack of Doctors on Primary health centre
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शहरों के बाद अब गांवों में कोहराम मचा रही है। कोरोना की जांच समय पर न होने और समय पर उपचार शुरू नहीं होने के चलते गांवों में लगातार मौतें बढ़ रही हैं। यही कारण है कि केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार सभी ग्रामीण इलाकों में बढ़ते संक्रमण से चिंतित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार गांवों को बचाने के लिए अपील भी कर रहे हैं। लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कुछ और हकीकत बयां कर रहे हैं। आज देश के 81 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी है। जबकि 37 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं हैं।

विज्ञापन

ग्रामीण क्षेत्रों में सर्जन, स्त्री और बाल रोग विशेषज्ञ की कमी  

30 मार्च को लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार, देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में 21,340 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन 3,881 विशेषज्ञ डॉक्टर ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के इलाज के लिए मौजूद हैं। आंकड़ों की मानें तो आज गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 81 फीसदी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इनमें सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की किल्लत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में है।

मंत्रालय के मार्च 2020 के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के 94 फीसदी गांवों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। गुजरात में 91.9 फीसदी, मध्यप्रदेश में 91.6 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 91 फीसदी, झारखंड में 90.4 फीसदी और बिहार में 82 फीसदी डॉक्टरों की कमी है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों जहां 21 हजार 340 विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन महज 3881 विशेषज्ञ डॉक्टर ही मौजूद हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में खस्ता हाल स्वास्थ्य सेवाएं

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार ने मार्च 2021 को लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। देश के 23 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्र की कमी है। इसके अलावा देश के 28 फीसदी गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और 37 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कमी है।

आज देश में सबसे ज्यादा खराब स्वास्थ्य सेवाएं बिहार और उत्तर प्रदेश में है। बिहार के 53 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। 46 फीसदी गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और 83 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। राज्य में 887 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की आवश्यकता है, जबकि 150 स्वास्थ्य केंद्र तैयार किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में 40 फीसदी गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जबकि राज्य के 53 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी देखी गई है। झारखंड के 43 फीसदी ग्रामीण इलाकों में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। 72 फीसदी गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और 36 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है।

पश्चिम बंगाल के 22 फीसदी ग्रामीण इलाकों में उप स्वास्थ्य केंद्र की कमी है। 58 फीसदी गांव में अभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जबकि 36 फीसदी गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र की कमी है। महाराष्ट्र के 24 फीसदी गांवों में अभी भी उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। 20 फीसदी ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और 37 फीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कमी है। मध्यप्रदेश के 27 प्रतिशत गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र, 46 फीसदी गांवों में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और 45 फीसदी गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है।

विज्ञापन

उत्तर भारत में बिगड़ रहे हैं हालात

दूसरी लहर में अब दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के हालात कुछ सुधरते नजर आ रहे हैं जबकि उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हालात खराब होते जा रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में गांवों में कोरोना संक्रमण का असर तेजी से दिखाई दे रहा है। बीते कुछ दिनों में इन राज्यों के गांवों में कोरोना से मौत के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी भी देखी जा रही है।

सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला का बताया कि सरकार को गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाना होगा। इसके अलावा लोगों की कोरोना टेस्टिंग भी बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अमले को लोगों को जागरुक करना चाहिए ताकि वे कोरोना संक्रमण के प्रति गंभीर हो सके।

लोकनीति-सीएसडीएस के शोधकर्ता मंजेश राणा ने अमर उजाला से कहा कि शहर के साथ गांवों में भी आज वैक्सीनेशन के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। सरकार को हर ग्राम पंचायत स्तर एक टीकाकरण केंद्र खोलना चाहिए। ताकि लोग यहां आकर अपने परिवार का वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकें। गांवों में जितने ज्यादा लोगों का टीकाकरण होगा उतना ही संक्रमण पर काबू पाया जा सकेगा।

गांवों के लिए सरकार ने जारी की गाइडलाइन

दूसरी लहर में ग्रामीण इलाकों में भी संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से रविवार को ग्रामीण, आदिवासी इलाकों के साथ ही शहरों से सटे क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। सरकार ने शहरी क्षेत्रों से सटे इलाकों और ग्रामीण इलाकों में जहां होम आइसोलेशन संभव नहीं है, वहां दूसरी बीमारियों से ग्रसित बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए न्यूनतम 30 बिस्तर वाले कोविड देखभाल केंद्र बनाने की सलाह दी है।

केंद्र सरकार ने अपनी गाइडलाइन जारी करते हुए कहा कि संदिग्ध और संक्रमित व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए। बीमारी के लक्षण वाले मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी फोन पर परामर्श दे सकते हैं और अन्य बीमारी से पीड़ित या कम ऑक्सीजन स्तर वाले मरीजों को उच्च केंद्रों में भर्ती कराया जाना चाहिए।

'घर पर क्वारंटीन रहने वाले मरीजों को किट उपलब्ध कराई जाए, जिसमें पैरासिटामॉल, आइवरमैक्टिन, खांसी का सीरप, मल्टीविटामिन जैसी आवश्यक दवाओं के साथ ही एक विस्तृत पैम्फ्लेट हो जिसमें घर पर क्वारंटीन के दौरान बरती जाने वाली एहतियात की जानकारी और लक्षण गंभीर होने पर संपर्क करने की जानकारी शामिल हो।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed