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भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ का एलान: क्यों बिगड़ी बनी बात, ट्रंप को क्या बुरा लगा; दोनों देशों में कैसा माहौल?

Thu, 07 Aug 2025 09:21 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 07 Aug 2025 09:21 AM IST
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सार
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कब से जारी थी? अमेरिका और अलग-अलग देशों के बीच हुए व्यापार समझौतों का भारत से वार्ता पर कैसे असर पड़ा? भारतीय प्रतिनिधियों की तरफ से अमेरिका को टैरिफ के लिए क्या प्रस्ताव दिया गया था? इसके अलावा ट्रंप आखिरी समय में इस समझौते से क्यों बिफर गए और अब आगे की राह क्या है? आइये जानते हैं...
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US President Donald Trump Tariff on India from Today know reasons from Trade to Russian Oil Purchase explained
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर लगाया गया 25 फीसदी आयात शुल्क 7 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार) से प्रभावी होगा। इस टैरिफ के लागू होने से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस के साथ व्यापार का जिक्र करते हुए भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ भी लगाने का एलान कर दिया। बढ़ा हुआ टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। यानी इस महीने के अंत तक भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच जाएगा।


इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर अमेरिका और भारत  बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता कहां से पटरी पर उतरी? अलग-अलग देशों के साथ हुए अमेरिकी व्यापार समझौते का इस पर क्या असर पड़ा? भारतीय प्रतिनिधियों की तरफ से अमेरिका को टैरिफ के लिए क्या प्रस्ताव दिया गया था? ट्रंप आखिरी समय में इस समझौते से क्यों बिफर गए और अब आगे की राह क्या है? आइये जानते हैं...

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कब से बातचीत जारी?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के करीब एक महीने बाद फरवरी में शुरू हो गई थी। यानी भारत उन पहले कुछ देशों में था, जिसने अमेरिका के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौते को प्राथमिकता दी। दोनों देशों ने व्यापार वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडलों का भी एलान कर दिया था। हालांकि, बीते पांच महीनों में पांच बैठकों के बावजूद भारत-अमेरिका समझौता नहीं कर पाए। 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस साल अप्रैल में भारत आए थे। उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने भारत के साथ बातचीत के मसौदे को अंतिम रूप भी दिया। माना जा रहा था कि इस बैठक के बाद भारत को कई क्षेत्रों में छूट मिल गई। तब सामने आया था कि भारत ने अमेरिका को उसके औद्योगिक उत्पादों के निर्यात पर कोई भी टैरिफ न लगाने का प्रस्ताव दिया था। औद्योगिक उत्पाद अमेरिका की तरफ से भारत को किए जाने वाले कुल निर्यात का 40 फीसदी हैं। भारत ने एल्कोहल के साथ अमेरिकी कारों पर भी टैरिफ दर घटाने पर सहमति जताई थी। साथ ही अमेरिका के 45 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने के लिए उसकी ऊर्जा और हथियार खरीद को 25 अरब डॉलर तक बढ़ाने का भरोसा दिया था। 

बताया जाता है कि पांचवें चरण की बैठक आते-आते दोनों देश अपने मतभेदों को खत्म कर चुके थे। ट्रंप भी इसे लेकर जल्द 'बड़ा समझौता' करने का एलान कर चुके थे। हालांकि, इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन भारत की ओर से टैरिफ में कमी से खुश नहीं था। दूसरी तरफ भारतीय अधिकारी इस उम्मीद में थे कि सिर्फ टैरिफ में छूट देकर वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को बचा सकते हैं। 

अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापार समझौते का कैसे हुआ असर?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में शामिल रहे भारत और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों के हवाले पर दावा किया है कि अमेरिका जैसे-जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों, जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान आदि से मनमुताबिक व्यापार समझौते की तरफ पहुंचने लगा, वैसे ही उसे भारत के साथ होने वाली बातचीत में अपने लिए ज्यादा मौके नजर आने लगे। आखिरकार यूरोपीय संघ से हुए व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत की बातचीत में ट्रंप प्रशासन को और ज्यादा शर्तें लगाने का मौका दे दिया। उधर भारतीय अधिकारी कुछ सेक्टर्स को भारत के लिए अहम बताते हुए अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुके।


# भारत पर रूस से तेल खरीद के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा। तब भारत पर कुल टैरिफ दर 50% पहुंच जाएगी।
 

व्यापार समझौते के लिए अमेरिका को भारत ने क्या-क्या प्रस्ताव दिए?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांचवें चरण की बातचीत के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका से 10 फीसदी आधारभूत टैरिफ को हटाने की मांग रख दी। इतना ही नहीं, ट्रंप की तरफ से स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो सेक्टर पर टैरिफ को भी वापस लेने पर बात की। हालांकि, जब जापान और यूरोपीय संघ ने बिना अमेरिका से इन सेक्टरों पर बात किए ही ज्यादा टैरिफ लगाने पर सहमति जता दी तो इसे ट्रंप की जीत के तौर पर देखा जाने लगा। इसके बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल को यह संकेत मिल गए कि अमेरिका इन टैरिफ को कम नहीं करेगा। इस दौरान भारत की तरफ से बाकी देशों की तरह ही 15 फीसदी टैरिफ दर पर ही समझौते की कोशिश भी की गई। 

समझौते के अंतिम चरण पर पहुंचने के बावजूद क्यों बिफरे ट्रंप?
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर देशों से मन मुताबिक डील मिलने के बाद ट्रंप हावी हो गए। वे ज्यादा बाजार तक पहुंच, ज्यादा निवेश और दूसरे देशों से कम से कम टैरिफ वाले समझौते करने पर जोर देने लगे, ताकि अमेरिका में इसे अपनी विजय के तौर पर पेश कर सकें। हालांकि, भारत की तरफ से इतनी छूट दिए जाने की तैयारी नहीं रही। 

दूसरी तरफ इस साल मई में जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष छिड़ा तो ट्रंप प्रशासन ने इसे रुकवाने के लिए दोनों देशों से चर्चा की। हालांकि, ट्रंप ने एक कदम आगे निकलते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का श्रेय लेना ही शुरू कर दिया। उन्होंने अलग-अलग मंचों पर संघर्ष को रुकवाने की बात कही। हालांकि, भारत ने हर मौके पर उनके इस दावे को खारिज किया। ट्रंप के लगातार किए जा रहे दावों ने दोनों देशों के समझौते को और लटकाया और आखिरकार भारत-अमेरिका व्यापार के मुद्दे पर इस मोड़ पर खड़े हैं।

भारत-अमेरिका के लिए अब आगे क्या संभावना?
दोनों ही देश व्यापार समझौते को लेकर अगस्त मध्य में बातचीत करेंगे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस दौरान कुछ शर्तों के साथ भारत आएगा। बताया गया है कि भारत कृषि और डेयरी सेक्टर में कुछ छूट का एलान कर सकता है। वहीं, रूस से तेल खरीद को लेकर भारत अमेरिका से भी बराबर दरों पर ऊर्जा खरीद बढ़ाने पर बात कर सकता है।  

अमेरिका के पूर्व व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिंसकॉट के मुताबिक, एक समय पर दोनों देश व्यापार समझौते के काफी करीब थे। हालांकि, अब भी देर नहीं हुई है। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष जल्द ही आपस में बात कर मुद्दा सुलझा सकते हैं।    
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