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USA: अमेरिका के फेडरेल रिजर्व बैंक की दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती, भारतीय बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

Thu, 11 Dec 2025 05:40 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 11 Dec 2025 05:40 PM IST
सार

उम्मीदों के अनुसार अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरें 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच आ गई हैं।  आइए जानते है इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निवेश पर क्या  पड़ सकता है।

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US Federal Reserve Bank cuts rates by 25 basis points, what will be the impact on the Indian market?
जेरोम पॉवेल, यूएस फेडरल रिजर्व प्रमुख - फोटो : एएनआई

विस्तार

उम्मीदों के अनुसार अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरें 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच आ गई हैं। यह अमेरिकी बैंक की तीसरी लगातार की गई कटौती है। इससे अमेरिका में सस्ती दरों पर व्यापार और नए निवेश के लिए धन उपलब्ध होने और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है। इससे अमेरिकी बाजार को गति मिलने की संभावना है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निवेश पर भी पड़ सकता है। 

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आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि एफडीए दरों में कटौती के कारण अमेरिकी बाजारों में व्यापार और निवेश की संभावना बढ़ेगी। इससे अमेरिकी बाजार में तेजी आने की संभावना है। अमेरिकन फेडरल बैंक लगातार इसी तरह की कटौती कर रहा है। अब आगे और कटौती होने की संभावना कम है, लेकिन इससे महंगाई को नियंत्रण में करने और ठहरी व्यापारिक गतिविधियों को तेज करने में मदद मिलेगी। इससे अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों में निवेश करने वाले निवेशकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है। ऐसे में वे भारतीय शेयर बाजार सहित टूट रहे एशियाई बाजारों से दूरी बना सकते हैं। 
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अब तक कितना निकाल चुके विदेशी निवेशक
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अकेले दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में ही भारतीय शेयर बाजार से करीब 11,820 करोड़ रुपये की निकासी की है। इसके पहले नवंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों ने लगभग 3765 करोड़ की निकासी की थी। इसका सबसे बड़ा कारण रूपये की कीमतों में गिरावट को माना जा रहा है। रुपये के कमजोर होने से निवेशक भारतीय बाजारों से दूरी बना रहे हैं।

क्यों भाग रहे विदेशी निवेशक
भारतीय रुपया लगातार नीचे की ओर जा रहा है। डॉलर की तुलना में यह मनोवैज्ञानिक सीमा 90 रुपये को भी कई बार पार कर चुका है। आज भी डॉलर की कीमत 89.86 रुपये के आसपास बनी हुई है। रुपये की कीमतों में और गिरावट आने की संभावना भी जताई जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों में अपने रिटर्न को लेकर घबराहट देखी जा रही है। भारतीय बाजार में रूपये की कीमत गिरने से निकासी के दौरान उन्हें डॉलर के रूप में कम रकम प्राप्त हो रही है, उनका लाभ गिर रहा है। इस नुकसान से घबराए निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर अमेरिका, चीन सहित दूसरे बाजारों में लगा रहे हैं।

बाजार संभलने का अनुमान
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय रुपये की गिरावट अब थम सकती है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी बनी हुई है। रूस का भारत से तेल व्यापार को लेकर समझौता हो चुका है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें भी स्थिर रह सकती हैं। भारत और रूस के बीच रुपया और रूबल में ट्रेड करने पर भी सहमति बनी है। इन सभी घटनाओं का मिलाजुला असर यह हो सकता है कि डॉलर की कीमतें स्थिर रहें। यदि ऐसा होता है तो रुपये की गिरावट में विराम लग सकता है। इससे भारतीय बाजार की स्थिति भी संभल सकती है और विदेशी निवेशक पलायन पर रोक लगा सकते हैं।

बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट में अब रुपये की गिरावट के थमने और इसकी कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में रुपया मजबूत होकर 86 रुपये प्रति डॉलर तक हो सकता है। इसका कारण भी भारतीय बाजार में तेजी को बताया गया है। 


आंतरिक निवेशकों ने बाजार को संभाला  
विदेशी निवेशकों की घबराहट के कारण बाजार में गिरावट का दौर बना हुआ है। लेकिन इसके बाद भी भारतीय शेयर बाजार में एक सीमा से अधिक गिरावट नहीं आई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि स्थानीय निवेशकों का बाजार पर भरोसा बना हुआ है और वे म्यूचुअल फंडों के जरिए बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं। 

फिर नई ऊंचाई को छू सकता है बाजार
सेबी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय निवेशकों ने अकेले अक्टूबर महीने में 20,718 करोड़ रूपये का निवेश किया था। विदेशी निवेशकों के द्वारा दिसंबर में निकाले गए रूपये की तुलना में यह करीब 1.75 गुना ज्यादा है। लेकिन भारतीय निवेशकों का यह उत्साह नवंबर के महीने में और अधिक बढ़ गया और उन्होंने अक्टूबर की तुलना में लगभग दो गुना अधिक 43,465 करोड़ रुपये का निवेश किया है। भारतीय निवेशकों के बाजार पर इस विश्वास ने विदेशी निवेशकों के असर को बहुत हद तक बेअसर कर दिया है। लेकिन यदि अमेरिकी बाजार की स्थितियों के बदलने पर भारतीय बाजार की ओर रुख करते हैं तो इससे बीएसई नई ऊंचाई को छू सकता है।

 

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