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Hindi News ›   India News ›   UPS or OPS 31 thousand out of 30 lakh workers joined UPS in 4 months, only 60 days left for option

OPS: यूपीएस या ओपीएस, 4 माह में 30 लाख में से 31 हजार कर्मी UPS में शामिल, विकल्प के लिए बचे महज 60 दिन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 29 Jul 2025 08:39 PM IST
सार

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, कर्मियों को किसी भी सूरत में यूपीएस मंजूर नहीं है। उन्हें केवल 'पुरानी पेंशन' ही मंजूर है। अभी जिन कर्मियों ने यूपीएस अपनाया है, उनमें अधिकांश एक्ससर्विस मैन हैं। उनके दिमाग में था कि यूपीएस में हर माह दस हजार रुपये बतौर पेंशन मिलेंगे। 

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UPS or OPS 31 thousand out of 30 lakh workers joined UPS in 4 months, only 60 days left for option
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई पेंशन योजना 'यूपीएस' को लेकर कर्मचारी, उत्साहित नहीं हैं। एनपीएस में शामिल कर्मियों को पहली अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 तक यूपीएस में शामिल होने का विकल्प देना था। केंद्र के तीस लाख कर्मियों में से अभी तक 31555 कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है। सरकार ने यूपीएस के प्रति कर्मियों की उदासीनता को देखते हुए इसका विकल्प चुनने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। अब कर्मियों के पास लगभग साठ दिन बचे हैं। 

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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, कर्मियों को किसी भी सूरत में यूपीएस मंजूर नहीं है। उन्हें केवल 'पुरानी पेंशन' ही मंजूर है। अभी जिन कर्मियों ने यूपीएस अपनाया है, उनमें अधिकांश एक्ससर्विस मैन हैं। उनके दिमाग में था कि यूपीएस में हर माह दस हजार रुपये बतौर पेंशन मिलेंगे। 
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बाद में उन्हें पता चला कि इसके लिए तो 25 साल की सेवा होनी चाहिए। यूपीएस का विकल्प देने के बाद अब उन्हें भी पछतावा हो रहा है। श्रीकुमार ने बताया, कर्मचारी संगठन, सरकार से दोबारा यह अपील कर रहे हैं कि यूपीएस की बजाए उनकी पुरानी पेंशन बहाल की जाए। श्रीकुमार के मुताबिक, यूपीएस में दस हजार रुपये वाली जिस पेंशन की बात हो रही है, उसके लिए 25 साल की सेवा होना जरुरी है। अब जिन लोगों ने यूपीएस को चुना है, वे दोबारा से एनपीएस के विकल्प पर जाना चाहते हैं। 
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हालांकि अब उनके पास बदलाव का मौका नहीं है। सरकार को यूपीएस लाने के अपने निर्णय पर दोबारा से विचार करना पड़ेगा। यूपीएस लागू करने को लेकर सरकारी कर्मचारी नाराज हैं। उनकी मांग है कि रिटायरमेंट के दिन से उन्हें पुरानी पेंशन मिले। उनका पैसा जीपीएफ में रहे। श्रीकुमार ने एनपीएस और यूपीएस की आलोचना करते हुए कहा कि ये दोनों योजना, विनाशकारी हैं। 

एनपीएस के दायरे में आने वाले 99 फीसदी से अधिक कर्मचारियों ने यूपीएस को अस्वीकार कर दिया है। इसके चलते सरकार को यूपीएस का विकल्प चुनने की समय सीमा बढ़ानी पड़ी है। कर्मचारी, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। पेंशनभोगी भी यूपीएस के प्रतिकूल प्रभावों से अछूते नहीं हैं। भविष्य में पेंशन संशोधन अब पूरी तरह से सरकार के विवेक पर निर्भर है। 

नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, अभी तक जितने भी लोगों ने यूपीएस का विकल्प चुना है, उनमें ज्यादातर वही हैं, जो या तो रिटायर हो चुके हैं या होने वाले हैं। यानी इनकी नौकरी महज 20 वर्ष से भी कम की होगी। बतौर पटेल, हमने 24 फरवरी को पेंशन सचिव साहब से ये बात कही थी कि वॉलंटरी रिटायरमेंट के दिन से पेंशन की शुरुआत की बिना और 50 प्रतिशत पेंशन के लिए 25 की जगह 20 वर्ष की सेवा को गणना का आधार माने बिना यूपीएस बेकार है। यही नहीं लम्पसम अमाउंट की जगह कर्मचारियों का अंशदान बिना कटौती के वापस करना पड़ेगा, तभी कर्मचारी इसको स्वीकार करेंगे। 

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन यह सवाल पूछा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए क्या आठवें वेतन आयोग के गठन को अधिसूचित किया गया है। राज्यसभा में भुबनेश्वर काल्निता ने पूछा था, क्या सरकार को आठवें वेतन आयोग के मद्देनजर विचारार्थ विषय तैयार करने के लिए संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र की राष्ट्रीय परिषद् (एनसी-जेसीएम) से कोई सुझाव प्राप्त हुआ है, यदि हां, तो परिषद् के मुख्य सुझाव क्या हैं। जवाब में बताया गया कि कर्मियों के हितों के लिए विशेष सुझावों की प्रति सरकार को दे दी गई है। उसमें कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य लाभों/सुविधाओं, पेंशन/ग्रेच्युटी व अन्य सेवोपरांत लाभों आदि की मौजूदा संरचना की जांच करना, शामिल है। 

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तत्काल स्वीकृत की जाने वाली अंतरिम राहत निर्धारित करना। वेतन और पेंशन में तत्काल विलय किए जाने वाले महंगाई भत्ते/महंगाई राहत का प्रतिशत निर्धारित करना। पुरानी पेंशन, मृत्यु सह सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन, 12 वर्षों के उपरांत पेंशन के परिवर्तित हिस्से की बहाली, प्रत्येक 5 वर्षों के पश्चात पेंशन में वृद्धि के लिए संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का कार्यान्वयन करना। दिनांक 1/1/2004 या उसके उपरांत भर्ती किए गए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सीसीएस (पेंशन नियम) 1972 (अब 2021) के अंतर्गत परिभाषित और गैर-अंशदायी पेंशन योजना की समीक्षा करना और उसे बहाल करना। 

इसके अलावा दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ विभिन्न स्वतंत्र कर्मचारी महासंघों द्वारा पिछले दिनों एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की गई थी। इसमें केंद्र के अलावा राज्यों के कर्मचारी संगठनों ने भी हिस्सा लिया था। केंद्रीय कर्मचारी संगठन, 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के महासचिव एसबी यादव ने बताया, सरकार को पुरानी पेंशन बहाली सहित दूसरी मांगें माननी पड़ेंगी। हड़ताल के बाद अब कर्मचारी, आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। 


सरकार ने कर्मियों के हितों की तरफ ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में केंद्रीय कर्मचारी संगठन, कोई भी कठोर निर्णय ले सकते हैं। सरकार को अंशदायी एनपीएस और यूपीएस, ये दोनों योजनाएं वापस लेनी पड़ेंगी। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना होगा। यादव ने कहा, सरकार ने यूपीएस को जबरदस्ती कर्मचारियों पर थोपा है। कर्मचारियों की एक ही मांग रही है और वह है 'ओपीएस'। पुरानी पेंशन बहाली के अलावा कर्मियों को कोई दूसरी योजना नहीं चाहिए। यही वजह है कि इतने दिन बाद भी कर्मियों ने यूपीएस की तरफ जाने का विकल्प नहीं अपनाया।

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