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Hindi News ›   India News ›   Updates: Supreme Court sets-aside Kerala High Court decision to invalidate the 2021 election of CPI MLA A Raja

SC: माकपा नेता ए. राजा को वापस मिली विधायकी, 2021 के चुनाव को अमान्य करने का हाईकोर्ट का फैसला खारिज

Tue, 06 May 2025 11:32 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 06 May 2025 11:32 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के देवीकुलम निर्वाचन क्षेत्र से सीपीआई (एम) विधायक ए. राजा के 2021 के चुनाव को अमान्य करने के केरल उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया। पीठ ने उन्हें केरल विधानसभा के सदस्य के तौर पर होने वाले सभी परिणामी लाभ भी प्रदान किए, जो सीपीआई (एम) नेता ने उच्च न्यायालय की ओर से उनके चुनाव को रद्द करने की वजह से खो दिए थे।

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Updates: Supreme Court sets-aside Kerala High Court decision to invalidate the 2021 election of CPI MLA A Raja
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें इडुक्की जिले की देवीकुलम विधानसभा सीट से माकपा नेता का चुनाव रद्द कर दिया गया था। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने हाईकोर्ट के 23 मार्च, 2023 के आदेश के खिलाफ राजा की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया। पीठ ने कहा, 'हाईकोर्ट के फैसले को खारिज किया जाता है। चुनाव याचिका भी खारिज की जाती है। अपीलकर्ता पूरी अवधि के लिए विधानसभा के सदस्य के रूप में सभी परिणामी लाभों का हकदार है।' शीर्ष अदालत ने पिछले साल 26 सितंबर को राजा की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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क्या है मामला, हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
कांग्रेस नेता डी कुमार 2021 के विधानसभा चुनावों में दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि राजा अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लिए आरक्षित देवीकुलम सीट से चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। राजा से 2021 के चुनावों में 7,848 मतों के अंतर से पराजित हुए कुमार ने यह भी दावा किया था कि माकपा नेता की पत्नी भी ईसाई हैं। उनका विवाह ईसाई धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। कांग्रेस नेता की दलीलों से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि राजा की ओर से अपनी शादी और समारोह के बारे में दिए गए टालमटोल वाले जवाबों से यह स्पष्ट है कि उनकी ओर से सच्चाई को छिपाने का प्रयास किया गया था। अदालत ने कहा था कि उनके और उनकी पत्नी द्वारा पहने गए कपड़े ईसाई विवाह के संकेत हैं। अदालत ने यह भी कहा था कि उनके सामने रखे गए सभी दस्तावेज यह बताते हैं कि प्रतिवादी राजा वास्तव में उस समय ईसाई धर्म को मानते थे, जब उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया था। इस तरह धर्म परिवर्तन के बाद वह हिंदू धर्म का सदस्य होने का दावा नहीं कर सकते। इस आधार पर भी रिटर्निंग अधिकारी को उसका नामांकन खारिज कर देना चाहिए था।
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सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजा और कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरी और नरेन्द्र हुड्डा की दलीलें सुनीं। शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के 20 मार्च, 2023 के आदेश के खिलाफ राजा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आज अपना फैसला सुनाया।
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सुप्रीम कोर्ट में ए. राजा की दलीलें
राजा ने तर्क दिया था कि वह केरल राज्य के संबंध में हिंदू पारायण समुदाय से हैं और तहसीलदार, देवीकुलम द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र से यह बात साबित होती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि रिटर्निंग अधिकारी ने उनके द्वारा दाखिल नामांकन पत्र पर कुमार की आपत्ति को सही तरीके से खारिज कर दिया था।

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