UP Politics: क्या यूपी में फूलन देवी के नाम से होगा BJP को बड़ा चुनावी फायदा! संजय निषाद ने चला यह सियासी दांव
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उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों से पहले सियासत की चौहद्दी खींची जाने लगी है। जातिगत समीकरणों को साधते हुए सभी राजनीतिक दल नए, पुराने, जीवित और दिवंगत नेताओं के नाम का सहारा लेकर वैतरणी पार करने की जुगत में लग गए हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट में निषाद पार्टी के मुखिया और मंत्री संजय निषाद ने फूलन देवी को लेकर एक बड़ी सियासी चाल चल दी है। संजय निषाद ने मांग कर डाली कि फूलन देवी की हत्या की सीबीआई जांच होनी चाहिए और उनकी प्रॉपर्टी पर जमे कब्जेदारों से उनकी प्रॉपर्टी खाली कराई जानी चाहिए। फिलहाल संजय निषाद के इस बयान के बाद अब उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाएं इसी बात की हो रही हैं कि क्या योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति होगी या फिर यह महज एक सियासी दांव तक सीमित रह जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए उनके ही सहयोगी दल के नेता और कैबिनेट मंत्री की ओर से उठाई गई मांग से आज की सियासत में कई निशाने सध गए हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में उनके सहयोगी दल निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद कैबिनेट में मंत्री हैं। संजय निषाद ने फूलन देवी की पुण्यतिथि पर एक ऐसी मांग कर डाली, जो सियासी तौर पर उनके लिए तो बड़ी राजनीतिक फायदे का सौदा लग रही है। दरअसल संजय निषाद ने फूलन देवी की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर फूलन देवी की हत्या की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि फूलन देवी की हत्या के 22 साल बाद इस मांग से संजय निषाद का तो सियासी जातीय समीकरण सध सकता है, लेकिन भाजपा के लिए यह मांग असहज स्थिति में डाल सकती है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एन. सुदर्शन कहते हैं कि दरअसल संजय निषाद की इस मांग को इस नजरिए से देखना चाहिए। पहली बात तो यह है कि संजय निषाद ने किसी तरीके से उत्तर प्रदेश के अति पिछड़े समुदाय को अपने साथ फूलन देवी के माध्यम से जोड़ना चाहते हैं। जबकि दूसरे पहलू में उन्होंने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के साथ फूलन देवी के माध्यम से जुड़े वोट बैंक को निशाना बनाया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से संजय निषाद ने इस मामले में सीबीआई की मांग की है, उसकी जांच का फिलहाल 22 साल बाद अब कोई औचित्य नहीं बनता। राजनैतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार जीडी शुक्ला कहते हैं कि इस मामले में भारतीय जनता पार्टी सियासी तौर पर बिल्कुल फंसती हुई नजर नहीं आ रही है। उसके पीछे तर्क देते हुए वह कहते हैं कि दरअसल फूलन देवी ने बेहमई हत्याकांड में 22 ठाकुरों को मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद 2001 में फूलन देवी की हत्या कर दी गई। शुक्ला कहते हैं कि संजय निषाद की मांग, तो फूलन देवी की हत्या की सीबीआई जांच की है। ऐसे में भाजपा के लिए यह स्थिति बिल्कुल असहज होने की नहीं है। हालांकि वह कहते हैं कि 22 साल बाद सीबीआई जांच की मांग में कोई विशेष दम नजर नहीं आता है। उनके मुताबिक संजय निषाद की यह मांग पूरी तरह सियासी है।
दरअसल फूलन देवी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने बड़ा दांव लगाया था। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अतहर हसन बताते हैं कि जब मुलायम सिंह ने फूलन को समाजवादी पार्टी से मिर्जापुर से लोकसभा का टिकट दिया, तो चर्चा यही हुई थी कि कहीं फूलन देवी को टिकट देने के दौरान ठाकुर समुदाय उनसे नाराज ना हो जाए। लेकिन मुलायम सिंह ने इन सभी सियासी समीकरणों को दरकिनार करते हुए न सिर्फ फूलन देवी को टिकट दिया, बल्कि लोकसभा भी पहुंचवाया। हसन कहते हैं कि यह वह दौर था जब मुलायम सिंह यादव लोकसभा में अपने साथ 30 से ज्यादा सांसद लेकर पहुंचे थे। इस दौरान समाजवादी पार्टी को फूलन देवी के मल्लाह समुदाय से जुड़े होने का बड़ा सियासी फायदा भी हुआ। यह सियासी फायदा समाजवादी पार्टी अभी तक अति पिछड़ों के माध्यम से लेती आई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से संजय निषाद ने फूलन देवी के माध्यम से सीबीआई जांच की मांग की है, उससे सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के एक बड़े वोट बैंक पर सीधा निशाना साधा है।
निषाद पार्टी और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद कहते हैं कि फूलन देवी ने अन्याय के खिलाफ मोर्चा खोला था और हक की लड़ाई लड़ी थी। वह कहते हैं कि फूलन देवी की जो भी प्रॉपर्टी है, उस पर माफियाओं का कब्जा है और उन माफियाओं को समाजवादी पार्टी का संरक्षण है। उनकी मांग है कि फूलन देवी की हत्या की जांच सीबीआई करे। उत्तर प्रदेश के सियासी जानकार कहते हैं कि जिस तरीके से संजय निषाद ने फूलन देवी के नाम पर उत्तर प्रदेश में सेल्फ डिफेंस सेंटर खोलने की मांग की है, उसे लेकर निषाद पार्टी के नेता मुख्यमंत्री पर दबाव बनाएंगे। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि अगर यह मांग मान ली जाती है, तो संजय निषाद को ही इसमें फायदा होगा। भाजपा के बड़े घटक दल हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी फूलन देवी की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। यादव ने उनको सामाजिक न्याय की योद्धा बताया।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अतहर हसन कहते हैं कि संजय निषाद की ओर से फूलन देवी को लेकर उठाई गई मांग में भाजपा बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं देने वाली। इसके पीछे का तर्क देते हुए कहते हैं कि संजय निषाद भाजपा के सहयोगी हैं और मल्लाहों की राजनीति करते हैं। ऐसे में जो सहयोगी दल जिस जातीय समुदाय की राजनीति करता है, उसके लिए अपनी आवाज तो उठाएगा ही। वह कहते हैं कि संजय निषाद का फूलन देवी का नाम लेकर सियासत करना भाजपा को भी सियासी रूप से अंदरूनी तौर पर ठीक लग रहा है, क्योंकि जितना संजय निषाद फूलन देवी के नाम का इस्तेमाल अपनी सियासत में करेंगे, उससे अति पिछड़ा समुदाय में उनकी पहुंच मजबूत होगी। निषाद पार्टी अंततः भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी दल है, तो अति पिछड़ों का जितना वोट मिलेगा वह भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल के खाते में ही आएगा। जिससे भाजपा को सियासी फायदा भी होगा।