फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   UP Politics: big concern for Akhilesh Yadav, why Jayant Chaudhary not reached Rajya Sabha on voting day

UP Politics: क्या अमित शाह ने चल दिया 'चरखा दांव'! I.N.D.I.A से ज्यादा सपा के लिए है यह बड़ी चिंता

Tue, 08 Aug 2023 02:48 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 08 Aug 2023 02:48 PM IST
विज्ञापन
सार
UP Politics: सियासी जानकारों का कहना है कि जयंत चौधरी का न आना सिर्फ गठबंधन की कमजोर कड़ी ही नहीं साबित कर रहा है, बल्कि अखिलेश यादव के लिए बड़ी चिंता का सबब भी बनता जा रहा है। क्योंकि जिस दल के भरोसे पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी बिसात बिछा रहे हैं, कहीं वही दल भाजपा के खेमे में तो नहीं जा रहा है...
loader
UP Politics: big concern for Akhilesh Yadav, why Jayant Chaudhary not reached Rajya Sabha on voting day
UP Politics: Jayant Chaudhary - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के लिए जयंत चौधरी का राज्यसभा में न पहुंचना सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है। कहने को तो सियासी गलियारों में चर्चा यही हो रही है कि जब I.N.D.I.A गठबंधन की पहली परीक्षा सोमवार को राज्यसभा में थी, जिसमें राष्ट्रीय लोकदल के नेता और समाजवादी पार्टी के कोटे से राज्यसभा पहुंचे जयंत चौधरी नहीं पहुंचे। सियासी जानकारों का कहना है कि जयंत चौधरी का न आना सिर्फ गठबंधन की कमजोर कड़ी ही नहीं साबित कर रहा है, बल्कि अखिलेश यादव के लिए बड़ी चिंता का सबब भी बनता जा रहा है। क्योंकि जिस दल के भरोसे पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी बिसात बिछा रहे हैं, कहीं वही दल भाजपा के खेमे में तो नहीं जा रहा है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इस बात पर चिंता जाहिर की है।

इसलिए सपा के लिए बड़ा झटका है जयंत का ना पहुंचना

सियासी जानकारों का कहना है कि जयंत चौधरी ने विपक्षी गठबंधन के सबसे महत्वपूर्ण दिन उपस्थित न रहकर एक साथ समाजवादी पार्टी से लेकर गठबंधन के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषक हरिओम तंवर कहते हैं कि दरअसल इसके पीछे जो भी तर्क दिया जा रहा हो, लेकिन समाजवादी पार्टी सबसे ज्यादा असहज हो रही है। उनका कहना है कि I.N.D.I.A गठबंधन जितना जयंत चौधरी के न आने से असहज दिखा, उससे कहीं ज्यादा समाजवादी पार्टी के लिए यह चिंता का विषय है। इसके पीछे तर्क देते हुए तंवर कहते हैं कि दरअसल समाजवादी पार्टी ने जयंत चौधरी को अपने कोटे से राज्यसभा भेजा है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अपनी सियासी बिसात भी जयंत चौधरी के बलबूते ही बिछा रही है। क्योंकि इस सियासी गठबंधन में समाजवादी पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत कुछ आरएलडी के माध्यम से ही अपना सियासी दांव लगाया है। ऐसे में अगर राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के बीच बने गठबंधन की नींव हिलती है, तो समाजवादी पार्टी के लिए यह बड़ा सियासी झटका हो सकता है।

क्या अमित शाह का चल गया चरखा दांव

राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी का राज्यसभा न पहुंचना उन सियासी दावों को और मजबूत करता जा रहा है, जिसमें चर्चा यही हो रही थी कि वह कहीं इस गठबंधन से अपना दामन न छुड़ा लें। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार जटाशंकर सिंह कहते हैं कि बीते सप्ताह देश के गृहमंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि विपक्षी दलों का यह गठबंधन बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला है। उसके बाद जयंत चौधरी का राज्यसभा में पहले दिन ही न पहुंचना, जो विपक्ष के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन था यह इशारा करता है कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से विपक्षी नेताओं को तोड़कर अपने खेमे में शामिल करने के लिए अमित शाह माहिर माने जाते हैं, ऐसे में यह कहना मुश्किल होगा कि जयंत चौधरी टूटकर भाजपा के साथ शामिल नहीं हो सकते हैं। सियासी गलियारों में चर्चाएं भी इसी बात की हो रही हैं कि कहीं ऐसा न हो कि जयंत चौधरी इस गठबंधन से अलग होकर अपनी नई सियासी राह तलाश लें।

सीटों को लेकर चल रहा है मंथन

सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही है कि जयंत चौधरी और भाजपा के बीच में लगातार बातचीत गठबंधन को लेकर चल रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा और आरएलडी के बीच सीटों के फॉर्मूले को लेकर मामला फंस रहा है। राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि सियासी गुणा भाग के लिहाज से भाजपा के लिए भी जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे मुफीद चेहरे और बड़ी पार्टी के तौर पर सामने हैं। भारतीय जनता पार्टी जयंत चौधरी के मार्फत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मतदाताओं में अपनी मजबूत पैठ बनाकर यूपी से सियासत की राह को और आसान करने की फिराक में लगी है। वह कहते हैं कि तमाम सियासी समीकरणों को देखते हुए जयंत चौधरी की पार्टी से जुड़े हुए लोग भी भाजपा गठबंधन में न सिर्फ अपना, बल्कि पार्टी का भविष्य देखते हुए दांव लगाने की चर्चा कर रहे हैं। राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी भी अक्सर यह बात कहते आए हैं कि वह अपनी पार्टी के सभी फैसले अपने कार्यकर्ताओं की रायशुमारी के साथ ही तय करेंगे। ऐसे में सोमवार को राज्यसभा के सबसे महत्वपूर्ण दिन उनकी अनुपस्थिति उन सभी सियासी बातों को और मजबूती से आगे रखती है, जिसमें चर्चा यह हो रही है कि जयंत चौधरी जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

I.N.D.I.A से ज्यादा सपा को लगेगा बड़ा झटका

सियासी समझ रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जयंत चौधरी विपक्षी दलों के गठबंधन को छोड़ देते हैं, तो इससे I.N.D.I.A  को भले बड़ा झटका ना लगे, लेकिन समाजवादी पार्टी के लिए यह बहुत बड़ा झटका माना जाएगा। क्योंकि जिस तरह से समाजवादी पार्टी अपने बड़े गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल को लंबे समय से शामिल करते हुए चली आ रही है, उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की न सिर्फ मेहनत बढ़ेगी बल्कि उनके सियासी समीकरण भी जयंत चौधरी के साथ न होने से गड़बड़ाएंगे। ऐसी दशा में न सिर्फ नए गठबंधन बल्कि समाजवादी पार्टी की भाजपा से सियासी लड़ाई कमजोर हो सकती है।

राष्ट्रीय लोकदल का यह है कहना

हालांकि जयंत चौधरी के राज्यसभा में ना पहुंचने को लेकर पार्टी के प्रवक्ता अनिल दुबे कहते हैं कि जयंत चौधरी की पत्नी की सेहत खराब होने के चलते वह राज्यसभा में नहीं पहुंच सके। इसलिए इसे किसी भी दूसरे सियासी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे पहले भी जब सियासी गठबंधन को लेकर तमाम राजनीतिक दलों की पहली बैठक होनी थीं, उसमें भी जयंत चौधरी नहीं पहुंचे थे। तब भी कयास ही लगाए जा रहे थे कि क्या जयंत चौधरी इस गठबंधन से पीछे हट जाएंगे। हालांकि बाद में बेंगलुरु में हुई विपक्षी दलों की दूसरी बैठक में जयंत चौधरी ने शिरकत की थी। अब जब पहली बार विपक्षी दलों की सदन में बड़ी परीक्षा थी, उसमें उनकी अनुपस्थिति एक बार फिर से तमाम तरह के सियासी सवाल खड़े कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed