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UP Nagar Nikay Chunav: निकाय चुनाव में भाजपा के कितने काम आएंगे ‘मुस्लिम टिकट’? समझें सियासी समीकरण
Tue, 02 May 2023 12:41 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 02 May 2023 12:41 PM IST
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यूपी नगर निकाय चुनाव
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अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव का प्रचार चरम पर है। पहले चरण के लिए आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है पहले चरण में चार मई को नौ मंडलों के 37 जिलों में चार मई को मतदान होना है। इसके लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने पुराने रिकॉर्ड को दोहराना चाहती है तो समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपनी खोई ताकत वापस पाने की कोशिश में हैं।कई क्षेत्रों में लड़ाई काफी मजबूत बताई जा रही है। कहीं भाजपा आगे है तो कहीं सपा या बसपा। इस बार भाजपा ने करीब 395 मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम चेहरों को मौका दिया है। ये पहली बार है जब भाजपा ने इतने बड़े पैमाने पर मुसलमानों को टिकट दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा का ये कदम कितना काम आएगा? आइए समझते हैं...
पहले जानिए भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों को
ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो नगर निगम पार्षद और नगर पालिका की करीब 300 सीटों पर मुस्लिम चेहरों को मौका दिया गया है। रामपुर जिले में भाजपा ने दो मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। टांडा नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर मेहनाज जहां और रामपुर नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर डॉ. मुसरेत मुजीब को प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह आजमगढ़ की मुबारकपुर से तमन्ना बानो और बदायूं जिले की ककराला पालिका अध्यक्ष पद पर मरगून अहमद खां को टिकट दिया है।
बिजनौर जिले की अफजलगढ़ नगर पालिका परिषद में खतीजा को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह कुल पांच पालिकाओं में मुसलमानों को टिकट दिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में पार्षद के उम्मीदवार भी मुस्लिम हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में ऐसा भी हुआ कि भाजपा को मुस्लिम चेहरे नहीं मिल पाए।
ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो नगर निगम पार्षद और नगर पालिका की करीब 300 सीटों पर मुस्लिम चेहरों को मौका दिया गया है। रामपुर जिले में भाजपा ने दो मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। टांडा नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर मेहनाज जहां और रामपुर नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद पर डॉ. मुसरेत मुजीब को प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह आजमगढ़ की मुबारकपुर से तमन्ना बानो और बदायूं जिले की ककराला पालिका अध्यक्ष पद पर मरगून अहमद खां को टिकट दिया है।
बिजनौर जिले की अफजलगढ़ नगर पालिका परिषद में खतीजा को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह कुल पांच पालिकाओं में मुसलमानों को टिकट दिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में पार्षद के उम्मीदवार भी मुस्लिम हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में ऐसा भी हुआ कि भाजपा को मुस्लिम चेहरे नहीं मिल पाए।
सूबे की राजधानी लखनऊ से भाजपा ने दो मुस्लिम उम्मीदवारों को निगम पार्षद का टिकट दिया है। पार्टी ने, कल्बे आबिद से कौसर मेंहदी शम्सी आजाद और हुसैनाबाद से लुबना अली खान को टिकट दिया है। इसी तरह बरेली में 80 में से नौ सीटों पर भाजपा ने मुस्लिम चेहरों को पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया है।
ये मुस्लिम आबादी वाली सीटें हैं। पिछली बार भाजपा ने ऐसी सात सीटों पर टिकट ही नहीं दिया था, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक थी। इस बार भाजपा ने नौ मुस्लिम प्रत्याशी भी मैदान में उतारे हैं। यानि सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।
भाजपा ने अलीगढ़ में सबसे ज्यादा 18 मुस्लिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। ये इलाके मुस्लिम आबादी वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछली बार इनमें से ज्यादातर सीटों पर भाजपा ने कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। कानपुर में भी पार्षद के पद जीतने के लिए पार्टी ने मुस्लिम कार्ड खेला है। भाजपा ने 11 मुस्लिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। जिसमें छह महिलाएं शामिल है। इतना ही नहीं चुनाव मैदान में कई पुराने चेहरों को भी फिर से चुनावी मैदान में उतारा गया है।
ये मुस्लिम आबादी वाली सीटें हैं। पिछली बार भाजपा ने ऐसी सात सीटों पर टिकट ही नहीं दिया था, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक थी। इस बार भाजपा ने नौ मुस्लिम प्रत्याशी भी मैदान में उतारे हैं। यानि सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।
भाजपा ने अलीगढ़ में सबसे ज्यादा 18 मुस्लिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। ये इलाके मुस्लिम आबादी वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछली बार इनमें से ज्यादातर सीटों पर भाजपा ने कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। कानपुर में भी पार्षद के पद जीतने के लिए पार्टी ने मुस्लिम कार्ड खेला है। भाजपा ने 11 मुस्लिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। जिसमें छह महिलाएं शामिल है। इतना ही नहीं चुनाव मैदान में कई पुराने चेहरों को भी फिर से चुनावी मैदान में उतारा गया है।
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र यानी वाराणसी में भी भाजपा ने तीन क्षेत्रों से मुस्लिम चेहरों को मौका दिया है। जमालुद्दीन्पुरा से अहमद अंसारी, बधू कच्ची बाग से रेशमा बीबी और मदनपुरा से हुमा बानो को मैदान में उतारा गया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर से भी भाजपा ने मुस्लिम उम्मीदवार पर भरोसा जताया है। हकीबुलन्निशा को बाबा गंभीरनाथ नगर से प्रत्याशी बनाया गया है।
इस तरह से ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा ने छह नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, 32 नगर पंचायत अध्यक्ष और 375 पंचायत, वार्ड और पालिका सदस्यों के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका दिया है। मतलब पार्टी ने 395 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं।
इस तरह से ओवरऑल आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा ने छह नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, 32 नगर पंचायत अध्यक्ष और 375 पंचायत, वार्ड और पालिका सदस्यों के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका दिया है। मतलब पार्टी ने 395 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं।
विरोधी दलों पर भाजपा के कदम का क्या असर?
वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, 'भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार उतारने से सपा, बसपा और कांग्रेस को मुस्लिम वोट में बिखराव की आशंका है। अगर भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं तो आने वाले दिनों में पार्टी विधानसभा और लोकसभा में भी इस तरह के उम्मीदवारों की संख्या बढ़ा सकती है।'
वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव कहते हैं, 'भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार उतारने से सपा, बसपा और कांग्रेस को मुस्लिम वोट में बिखराव की आशंका है। अगर भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं तो आने वाले दिनों में पार्टी विधानसभा और लोकसभा में भी इस तरह के उम्मीदवारों की संख्या बढ़ा सकती है।'
भाजपा का ये कदम उसे कितना फायदा देगा?
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'अब भाजपा ने इस चुनाव में मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लोगों पर फोकस किया है। अगर नगर निकाय चुनाव के मुस्लिम प्रत्याशियों पर नजर डालें तो ज्यादातर मुस्लिम महिलाओं को ही भाजपा ने टिकट दिया गया है। इसके अलावा मुस्लिम समाज के ओबीसी और अति पिछड़े वर्ग के लोगों को टिकट दिया है। इसके जरिए भाजपा उन मुस्लिम वोटर्स के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है, जिन्हें राजनीतिक तौर पर पार्टियां अनदेखा करती रहीं हैं।'
प्रो. सिंह के अनुसार, भले ही अभी भाजपा को इसमें बड़ी सफलता न मिले, लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी इसके जरिए मुस्लिम वोटों को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'अब भाजपा ने इस चुनाव में मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लोगों पर फोकस किया है। अगर नगर निकाय चुनाव के मुस्लिम प्रत्याशियों पर नजर डालें तो ज्यादातर मुस्लिम महिलाओं को ही भाजपा ने टिकट दिया गया है। इसके अलावा मुस्लिम समाज के ओबीसी और अति पिछड़े वर्ग के लोगों को टिकट दिया है। इसके जरिए भाजपा उन मुस्लिम वोटर्स के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है, जिन्हें राजनीतिक तौर पर पार्टियां अनदेखा करती रहीं हैं।'
प्रो. सिंह के अनुसार, भले ही अभी भाजपा को इसमें बड़ी सफलता न मिले, लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी इसके जरिए मुस्लिम वोटों को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है।