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UP Election 2022: पार्टी…विचारधारा…वफादारी... जब चुनाव की बात आती है तो कुछ भी मायने नहीं रखता, मौर्य के भाजपा छोड़ने का क्या मतलब है?

Tue, 11 Jan 2022 07:26 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 11 Jan 2022 07:26 PM IST
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सार
चुनाव से पहले कई नेताओं ने पाला बदलना शुरू कर दिया है। जानकार कहते हैं कि 'नेता' राजनीतिक अवसरवाद पर ध्यान केंद्रित करते हुए सत्ता में बने रहना चाहते हैं।  
 
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UP Election 2022 UP Minister Swami Prasad Maurya  quits bjp joins SP, What is the point of Swami Prasad Maurya leaving BJP and going to SP and changing party?
स्वामी प्रसाद मौर्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका देते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूपी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए उनका पार्टी  में स्वागत किया है।  स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा विधायक रोशन लाल वर्मा, भगवती सागर, बृजेश प्रजापति, ममतेश शाक्य, विनय शाक्य, धर्मेंद्र शाक्य और नीरज मौर्य ने भी पार्टी पद से इस्तीफा देने का एलान किया है।  कहा जा रहा है ये सभी नेता सपा में शामिल हो सकते हैं।


इसके साथ ही यूपी चुनाव में नेताओं के पार्टी बदलने का सिलसिला बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। कई बड़े चेहरे पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का जाना-माना मुसलमान चेहरा रहे इमरान मसूद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।  इसी कड़ी में पूर्वांचल के बहुजन समाज पार्टी के बाहुबली नेता का नाम भी इन दिनों काफी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि उनका बसपा से मोहभंग हो चुका है। वे भी कभी भी सार्वजनिक मंच के माध्यम से वे समाजवादी पार्टी में शामिल होने का एलान कर सकते हैं।

इमरान मसूद सपा में शामिल हुए
इमरान मसूद सपा में शामिल हुए - फोटो : अमर उजाला
नेता पार्टियां क्यों बदलते हैं
पार्टी में शामिल होते समय जो नेता वफादारी और विचारधारा की कसमें खाते हैं, वे चुनाव आते ही पार्टियां बदल क्यों लेते हैं? उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं, अब नेता या तो सत्ता में रहना चाहते हैं या मुख्य विपक्षी पार्टी में। राजनीति, राज करने की नीति का नाम है यानी जहां सत्ता दिखी वहां गए।

हालांकि वे मानते हैं कि कई बार नेताओं का जाना हवा का रूख भी बताता है। कई बार उन पर अपने क्षेत्र की जनता का दबाव भी होता है। यानी अगर स्वामी प्रसाद मौर्य का उदाहरण लें तो यह समझना चाहिए कि यदि उनके वोटर्स या उनका समुदाय उनके सपा में जाने से खुश नहीं होता तो वे भाजपा नहीं छोड़ते। 
 
नेता सपा में क्यों जा रहे हैं? 
राम दत्त त्रिपाठी इसके पीछे की मुख्य वजह यह बताते हैं राज्य में चुनाव स्पष्ट रूप से दो कोणीय हो गया है। अब भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है। इसलिए जो नेता अपनी पार्टी से असंतुष्ट है या फिर जिन्हें लग रहा है कि उन्हें पार्टी में सम्मान नहीं मिल रहा या टिकट नहीं मिलेगा वे दूसरी पार्टियों का रुख कर रहे हैं। यूपी में नेताओं के पास दो ही विकल्प हैं। या तो वे अब भाजपा में जाएंगे या सपा में। 

स्वामी प्रसाद मौर्य अखिलेश यादव से मिले
स्वामी प्रसाद मौर्य अखिलेश यादव से मिले - फोटो : अखिलेश के ट्विटर अकाउंट से
मौर्य ने भाजपा का साथ क्यों छोड़ा ? 
राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं कि मौर्य के साथ यह समस्या नहीं थी कि उन्हें टिकट नहीं मिलता या उन्हें मंत्री नहीं बनाया जाता। उनके भाजपा छोड़ने की मोटी वजह यह है कि वे जिस गैर यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं वह ग्रामीण इलाकों का वोट बैंक हैं जो पिछड़े और गरीब हैं। खेती-किसानी करने वाले लोग हैं। लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ लोगों में नाराजगी नजर आ रही है, मौर्य ने इस नाराजगी को भांप लिया और उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ दिया।

हालांकि, कुछ विश्लेषक कहते हैं कि मौर्य अपने साथ अपने बेटे और समर्थक विधायकों के लिए भी टिकट चाहते थे। उनकी ये मांग पूरी होती नहीं दिख रही थी। इसलिए वे पाला बदलना चाहते हैं। 

कारोबारी पुष्पराज जैन
कारोबारी पुष्पराज जैन - फोटो : अमर उजाला
आचार संहिता लागू होने से छापे का डर खत्म 
उनके मुताबिक चुनावों की घोषणा के बाद अब नेताओं के पास निर्णय लेने का सही वक्त आया है। आचार संहिता लागू होने जाने के बाद मोटे तौर पर नेताओं के मन से ईडी और सीबीआई के छापे का डर भी निकल गया है, क्योंकि ब्यूरोक्रेसी मुख्यमंत्री के हाथ से निकल कर चुनाव आयोग के हाथ में पहुंच गई है। हाल ही में देखा गया है कि पुष्पराज जैन समेत कई सपा समर्थक नेताओं के घर पर आयकर विभाग के छापे पड़े हैं और उनके घरों से करोड़ों की अवैध नगदी मिली है। 

उनका कहना है 'नेता पाला बदलने के लिए इस समय को मुफीद मान रहे हैं क्योंकि सभी पार्टियां जल्दी ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकती है। उनका मानना है कि हो सकता है कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में भाजपा नेता सपा में शामिल हो सकते हैं क्योंकि भाजपा कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की तैयारी में है।'
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