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UP Election 2022 सत्ता का संग्राम : राजनीतिक पार्टियां कृपया ध्यान दें, महिलाओं की सुरक्षा बन सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा
Thu, 18 Nov 2021 01:49 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 18 Nov 2021 01:49 PM IST
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आधी आबादी के बीच पहुंचा अमर उजाला का चुनावी रथ
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का विशेष चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेश के कई जिलों से गुजर रहा है। जहां लोगों का चुनावी मूड भांपा जा रहा है, साथ ही मुद्दों की तलाश भी हो रही है। देश की आधी आबादी को खास तवज्जो देते हुए अमर उजाला महिलाओं से चुनाव के मुद्दों पर विशेष बातचीत कर रहा है और यह जानने की कोशिश कर रहा है कि वे किन मुद्दों पर वोट करती हैं और उनके लिए प्रमुख मुद्दे क्या हैं?हमारी टीम ने 11 नवंबर से गाजियाबाद से शुरुआत की थी और मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर होते हुए गुरुवार को लखीमपुर खीरी पहुंची है। महिलाओं के मुद्दे को सुनने और समझने के बाद हमने जो निचोड़ निकाला है वह यह है कि आगामी चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस चुनाव में वोट मुख्य तौर पर इस बात पर डाले जाएंगे कि मौजूदा सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो इंतजाम किए हैं वे कितने प्रभावी साबित हुए हैं और महिलाएं उससे कितनी संतुष्ट है। दूसरी बात, कि राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणापत्र में महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या महत्वपूर्ण वादे करने वाली है। हालांकि माना यही जा रहा है कि महिलाओं को प्रमुख वोट बैंक समझते हुए सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उठा सकती है।
पहले जानिए कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा किस तरह आधी आबादी के लिए शीर्ष पर है।
जब 11 नवंबर को हमारी टीम गाजियाबाद के 'राजनगर सेक्टर- 3 पार्क' पहुंची तो यहां ज्यादतर महिलाएं सुरक्षा को लेकर मुखर दिखीं। गाजियाबाद की महिलाओं के लिए महिला सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। वंदना चौधरी ने महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर कहा पहले के मुकाबले अपराध कम हुए हैं, लेकिन महिलाएं अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। ज्यादातर महिलाओं ने कहा कि पहले के मुकाबले महिलाओं की सुरक्षा बेहतर हुई है, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है।
चुनाव पर चर्चा करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं जुटीं।
- फोटो :
अमर उजाला
बेखौफ होकर निकल रही बेटियां
इसी तरह 12 नवंबर को मुरादाबाद में भी महिलाओं ने सुरक्षा को मुख्य मुद्दा माना और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों की बदौलत महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं। समाजसेविका प्रिया अग्रवाल ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। आज बेखौफ होकर हमारी बेटियां घर से बाहर निकलती हैं। महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं।
बिजनेस करने वाली तान्या भाट्या ने कहा कि अब तक सुरक्षा की कमी के चलते ही महिलाएं अन्य क्षेत्र में अपना कॅरियर नहीं बना पाती थी। आज वक्त बदल गया है। 2020 में मिस मुरादाबाद रह चुकीं अनुश्री रस्तोगी ने कहा, ' मैं कोचिंग संचालित करती हूं। पहले हम लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते थे, आज मैं ही नहीं, बल्कि सभी महिलाएं खुलकर निकल सकती हैं। छेड़खानी व अन्य घटनाएं कम हुई है।'
मुस्लिम महिलाएं भी सुरक्षित हुईं
इसी तरह 13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं के लिए सुरक्षा मुख्य मुद्दा रहा। यहां मुस्लिम महिलाओं ने भी महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। प्रशासन मजबूत हो गया है। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है।
बीना अग्रवाल का कहना था पहले कॉलेजों के सामने लड़के खड़े होते थे। बेटियों से छेड़खानी होती थी। अब नहीं होती है। हालांकि लिनी चावला ने सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की बात कही। उन्होंने कहा मेरे डेढ़ साल के बेटे को बदमाश घर के बाहर से ही उठा ले गए थे। पुलिस ने 15 मिनट के अंदर ही उन्हें पकड़ भी लिया। नीतू ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है, लेकिन इसमें सुधार की जरूरत है।
इसी तरह 12 नवंबर को मुरादाबाद में भी महिलाओं ने सुरक्षा को मुख्य मुद्दा माना और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों की बदौलत महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं। समाजसेविका प्रिया अग्रवाल ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। आज बेखौफ होकर हमारी बेटियां घर से बाहर निकलती हैं। महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं।
बिजनेस करने वाली तान्या भाट्या ने कहा कि अब तक सुरक्षा की कमी के चलते ही महिलाएं अन्य क्षेत्र में अपना कॅरियर नहीं बना पाती थी। आज वक्त बदल गया है। 2020 में मिस मुरादाबाद रह चुकीं अनुश्री रस्तोगी ने कहा, ' मैं कोचिंग संचालित करती हूं। पहले हम लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते थे, आज मैं ही नहीं, बल्कि सभी महिलाएं खुलकर निकल सकती हैं। छेड़खानी व अन्य घटनाएं कम हुई है।'
मुस्लिम महिलाएं भी सुरक्षित हुईं
इसी तरह 13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं के लिए सुरक्षा मुख्य मुद्दा रहा। यहां मुस्लिम महिलाओं ने भी महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। प्रशासन मजबूत हो गया है। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है।
बीना अग्रवाल का कहना था पहले कॉलेजों के सामने लड़के खड़े होते थे। बेटियों से छेड़खानी होती थी। अब नहीं होती है। हालांकि लिनी चावला ने सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की बात कही। उन्होंने कहा मेरे डेढ़ साल के बेटे को बदमाश घर के बाहर से ही उठा ले गए थे। पुलिस ने 15 मिनट के अंदर ही उन्हें पकड़ भी लिया। नीतू ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है, लेकिन इसमें सुधार की जरूरत है।
पीलीभीत, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 : चुनावी मुद्दों पर बात करते हुए महिलाएं।
- फोटो :
अमर उजाला
महिला सुरक्षा पर सवाल
बात की जाए बरेली की तो यहां 14 नवंबर को जब हमारी टीम पहुंची तो जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। इसके खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा। हाल ही में पीलीभीत में महिला सिपाही के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई। उसके बाद भी अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। छेड़खानी जैसी घटनाएं अब हर रोज हो रही हैं।
स्वाती गुप्ता ने कहा कि 2014 में एंटी रोमियो स्क्वायड जब बनाया गया मेरी बेटी बहुत खुश थी। अब नहीं मालूम कि वो एंटी रोमियो स्क्वायड कहां है। हालांकि कुछ महिलाओं ने माना कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हालात में काफी सुधार आया है।
कमियां सुधारने की जरूरत पर जोर
16 नवंबर को जब अमर उजाला की टीम पीलीभीत पहुंची तो एक दिन पहले छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना का मुद्दा 'आधी आबादी की बात' में भी प्रमुखता से उठा। ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाली रिया सूरी ने कहा महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर है। छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना इसकी तस्दीक करता है। शहनाज ने कहा कि पहले के मुकाबले महिला सुरक्षा की व्यवस्था ठीक हुई है, लेकिन इसमें अधिक काम करने की जरूरत है। सभी महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार को और ध्यान देने की जरूरत है।
इसी तरह 17 नवंबर को शाहजहांपुर में अमर उजाला के कार्यक्रम में शिक्षिका साक्षी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है। यहां बेटियां सुरक्षित हैं। अब रात को भी महिलाएं, बेटियां आसानी से बाहर निकल रही हैं। रचना सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में काफी हद तक काम हुआ है। हालांकि अभी भी कुछ घटनाएं होती हैं। पहले के मुकाबले बेहतर है, लेकिन जो कमियां है उसे सुधारने की जरूरत है।
बात की जाए बरेली की तो यहां 14 नवंबर को जब हमारी टीम पहुंची तो जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। इसके खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा। हाल ही में पीलीभीत में महिला सिपाही के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई। उसके बाद भी अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। छेड़खानी जैसी घटनाएं अब हर रोज हो रही हैं।
स्वाती गुप्ता ने कहा कि 2014 में एंटी रोमियो स्क्वायड जब बनाया गया मेरी बेटी बहुत खुश थी। अब नहीं मालूम कि वो एंटी रोमियो स्क्वायड कहां है। हालांकि कुछ महिलाओं ने माना कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हालात में काफी सुधार आया है।
कमियां सुधारने की जरूरत पर जोर
16 नवंबर को जब अमर उजाला की टीम पीलीभीत पहुंची तो एक दिन पहले छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना का मुद्दा 'आधी आबादी की बात' में भी प्रमुखता से उठा। ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाली रिया सूरी ने कहा महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर है। छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना इसकी तस्दीक करता है। शहनाज ने कहा कि पहले के मुकाबले महिला सुरक्षा की व्यवस्था ठीक हुई है, लेकिन इसमें अधिक काम करने की जरूरत है। सभी महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार को और ध्यान देने की जरूरत है।
इसी तरह 17 नवंबर को शाहजहांपुर में अमर उजाला के कार्यक्रम में शिक्षिका साक्षी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है। यहां बेटियां सुरक्षित हैं। अब रात को भी महिलाएं, बेटियां आसानी से बाहर निकल रही हैं। रचना सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में काफी हद तक काम हुआ है। हालांकि अभी भी कुछ घटनाएं होती हैं। पहले के मुकाबले बेहतर है, लेकिन जो कमियां है उसे सुधारने की जरूरत है।
चित्रकूट में प्रियंका गांधी
- फोटो :
PTI
क्या कहती हैं राजनीतिक पार्टियां
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा महिला सुरक्षा हमारी प्राथमिकताओं में एक है। हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद संभालते ही महिला सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया था और उसी का नतीजा है कि पुलिस और प्रशासन को इस ओर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कमी आई है।
अखिलेश विजय रथ यात्रा में उठा रहे यह मुद्दा-सपा
सपा के एक नेता का कहना है कि चुनाव आ रहे हैं तो सरकार सारे दावे बढा-चढ़ा कर करेगी, लेकिन असलियत क्या है यह 100 नंबर का डेटा निकालने पर पता चल सकता है। पीएम सीएम बार-बार हर कार्यक्रम में यही कहते हैं कि महिलाएं अब सुरक्षित हो गई हैं, लेकिन सड़कों पर चलने वाली और स्कूल कॉलेज जाने वाली बच्चियों से पूछ लीजिए वे कितनी सुरक्षित महसूस करती हैं। इसलिए हमारे नेता अखिलेश यादव, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों विजय रथ यात्रा में उठा रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया-कांग्रेस
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका गुप्ता ने कहा ‘कांग्रेस तो सबसे ज्यादा महिला सुरक्षा की बात उठा रही है। आपने देखा कि कैसे प्रियंक गांधी हाथरस पहुंची तो और बच्ची को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी थी। प्रियंका गांधी लगातार महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को बढ़चढ़ कर उठात रही हैं। अभी उन्होंने सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो... कविता के जरिए महिला सुरक्षा की ओर ही तो इशारा किया और क्योंकि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा की आवाज योगी सरकार तक नहीं पहुंच पाई हैं। इसलिए प्रियंका गांधी टिकट बंटवारे से लेकर महिलाओं को नौकरियों में भी आरक्षण देने की बात कर रही हैं। स्कूटी देने की बात भी महिलाओं की आजादी का ही संकेत है।
प्रियंका गुप्ता ने कहा, हमारी नेता की सोच यह है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा तभी सुलझ सकता है जब महिलाएं बराबरी में खड़ी हों। जब महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा तभी महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगीं। यदि सड़कों पर, ऑफिस में, पुलिस में, नौकरियों में और राजनीति में जब महिलाओं की संख्या बढ़ेंगी और वे हर पदों पर आगे रहेंगी वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा महिला सुरक्षा हमारी प्राथमिकताओं में एक है। हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद संभालते ही महिला सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया था और उसी का नतीजा है कि पुलिस और प्रशासन को इस ओर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कमी आई है।
अखिलेश विजय रथ यात्रा में उठा रहे यह मुद्दा-सपा
सपा के एक नेता का कहना है कि चुनाव आ रहे हैं तो सरकार सारे दावे बढा-चढ़ा कर करेगी, लेकिन असलियत क्या है यह 100 नंबर का डेटा निकालने पर पता चल सकता है। पीएम सीएम बार-बार हर कार्यक्रम में यही कहते हैं कि महिलाएं अब सुरक्षित हो गई हैं, लेकिन सड़कों पर चलने वाली और स्कूल कॉलेज जाने वाली बच्चियों से पूछ लीजिए वे कितनी सुरक्षित महसूस करती हैं। इसलिए हमारे नेता अखिलेश यादव, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों विजय रथ यात्रा में उठा रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया-कांग्रेस
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका गुप्ता ने कहा ‘कांग्रेस तो सबसे ज्यादा महिला सुरक्षा की बात उठा रही है। आपने देखा कि कैसे प्रियंक गांधी हाथरस पहुंची तो और बच्ची को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी थी। प्रियंका गांधी लगातार महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को बढ़चढ़ कर उठात रही हैं। अभी उन्होंने सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो... कविता के जरिए महिला सुरक्षा की ओर ही तो इशारा किया और क्योंकि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा की आवाज योगी सरकार तक नहीं पहुंच पाई हैं। इसलिए प्रियंका गांधी टिकट बंटवारे से लेकर महिलाओं को नौकरियों में भी आरक्षण देने की बात कर रही हैं। स्कूटी देने की बात भी महिलाओं की आजादी का ही संकेत है।
प्रियंका गुप्ता ने कहा, हमारी नेता की सोच यह है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा तभी सुलझ सकता है जब महिलाएं बराबरी में खड़ी हों। जब महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा तभी महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगीं। यदि सड़कों पर, ऑफिस में, पुलिस में, नौकरियों में और राजनीति में जब महिलाओं की संख्या बढ़ेंगी और वे हर पदों पर आगे रहेंगी वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती हैं।
महिला अपराध
अब जान लेते हैं यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति है।
इसी साल 13 सितंबर को लखनऊ में एक समारोह में बोलते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी निगरानी में राज्य में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा था "बेटियाँ असुरक्षित थीं, बहनें असुरक्षित थीं, लेकिन अब वह स्थिति नहीं है।"
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा को देखें तो साल 2014 से लेकर साल 2019 तक उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के दर्ज मामलों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ी। साल 2014 में जहां महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के 38,467 मामले दर्ज किए गए वहीं 2018-19 में यह संख्या बढ़कर 60 हजार के करीब पहुंच गई। लेकिन साल 2020 में ये संख्या घटकर 49 हजार रह गई।
सबसे ज्यादा मामलों के साथ महिला अपराध में यूपी आगे
एनसीआरबी के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक 2019 की तुलना में उत्तर प्रदेश में 2020 में पंजीकृत मामलों की कुल संख्या में गिरावट आई है। हालांकि महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक मामलों में उत्तर प्रदेश 49,385 मामलों के साथ सबसे ऊपर है। 2020 में पूरे देश में दुष्कर्म के रोज औसतन 77 मामले दर्ज किए गए और कुल 28,046 मामले सामने आए।
देश में ऐसे सबसे ज्यादा 5,310 मामले राजस्थान में और दूसरे नंबर पर 2,769 उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। पर सबसे जघन्य अपराधों जैसे दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, अग़वा किए जाने से लेकर पोक्सो आदि मामलों में अपराध में करीब 60 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। 2016 में उत्तर प्रदेश में सामूहिक दुष्कर्म के दर्ज किए गए मामलों की संख्या 682 थी जो कि 2020 तक घटकर 271 रह गयी।
इसी साल 13 सितंबर को लखनऊ में एक समारोह में बोलते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी निगरानी में राज्य में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा था "बेटियाँ असुरक्षित थीं, बहनें असुरक्षित थीं, लेकिन अब वह स्थिति नहीं है।"
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा को देखें तो साल 2014 से लेकर साल 2019 तक उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के दर्ज मामलों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ी। साल 2014 में जहां महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के 38,467 मामले दर्ज किए गए वहीं 2018-19 में यह संख्या बढ़कर 60 हजार के करीब पहुंच गई। लेकिन साल 2020 में ये संख्या घटकर 49 हजार रह गई।
सबसे ज्यादा मामलों के साथ महिला अपराध में यूपी आगे
एनसीआरबी के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक 2019 की तुलना में उत्तर प्रदेश में 2020 में पंजीकृत मामलों की कुल संख्या में गिरावट आई है। हालांकि महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक मामलों में उत्तर प्रदेश 49,385 मामलों के साथ सबसे ऊपर है। 2020 में पूरे देश में दुष्कर्म के रोज औसतन 77 मामले दर्ज किए गए और कुल 28,046 मामले सामने आए।
देश में ऐसे सबसे ज्यादा 5,310 मामले राजस्थान में और दूसरे नंबर पर 2,769 उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। पर सबसे जघन्य अपराधों जैसे दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, अग़वा किए जाने से लेकर पोक्सो आदि मामलों में अपराध में करीब 60 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। 2016 में उत्तर प्रदेश में सामूहिक दुष्कर्म के दर्ज किए गए मामलों की संख्या 682 थी जो कि 2020 तक घटकर 271 रह गयी।
गाजियाबाद के राजनगर सेक्टर 3 में चुनाव पर चर्चा करतीं महिलाएं।
- फोटो :
अमर उजाला
महिलाओं के लिए और कौन से मुद्दे अहम हैं
उच्च शिक्षा और रोजगार
सुरक्षा के अलावा महिलाओं ने जो और मुद्दा उठाया उसमें लड़कियों की शिक्षा, उच्च शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था की भी बात की गई। गाजियाबाद में मेघना बंसल ने कहा कि देश में आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा। गर्ल्स के लिए विशेष डिग्री कॉलेज खुलने चाहिए। परास्नातक की पढ़ाई कर रही छात्रा ओनिका विल्सन ने स्कॉलरशिप का मुद्दा उठाया। कहा कि सभी वर्ग के छात्र और छात्राओं को सामान रूप से स्कॉलरशिप मिलनी चाहिए। छात्राओं के लिए विशेष उच्च शिक्षण संस्थान बनने चाहिए।
मुरादाबाद में पूनम महाजन ने कहा, ' मैंने ग्रामीण इलाकों में काफी काम किया है। मनरेगा के तहत काम महिलाएं करती हैं, लेकिन उनका पैसा उनके पति के खातों में भेजा जा रहा है। काम करने वाली महिलाओं के पतियों से मिलकर ग्राम प्रधान धांधली करते हैं। महिलाओं का बैंक में अकाउंट खुलना चाहिए और उन्हें ज्यादा से ज्यादा काम मिलना चाहिए। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना चाहिए।
रामपुर में ज्यादातर महिलाओं ने रोजगार और महंगाई का मुद्दा उठाया। अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें।
उच्च शिक्षा और रोजगार
सुरक्षा के अलावा महिलाओं ने जो और मुद्दा उठाया उसमें लड़कियों की शिक्षा, उच्च शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था की भी बात की गई। गाजियाबाद में मेघना बंसल ने कहा कि देश में आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा। गर्ल्स के लिए विशेष डिग्री कॉलेज खुलने चाहिए। परास्नातक की पढ़ाई कर रही छात्रा ओनिका विल्सन ने स्कॉलरशिप का मुद्दा उठाया। कहा कि सभी वर्ग के छात्र और छात्राओं को सामान रूप से स्कॉलरशिप मिलनी चाहिए। छात्राओं के लिए विशेष उच्च शिक्षण संस्थान बनने चाहिए।
मुरादाबाद में पूनम महाजन ने कहा, ' मैंने ग्रामीण इलाकों में काफी काम किया है। मनरेगा के तहत काम महिलाएं करती हैं, लेकिन उनका पैसा उनके पति के खातों में भेजा जा रहा है। काम करने वाली महिलाओं के पतियों से मिलकर ग्राम प्रधान धांधली करते हैं। महिलाओं का बैंक में अकाउंट खुलना चाहिए और उन्हें ज्यादा से ज्यादा काम मिलना चाहिए। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना चाहिए।
रामपुर में ज्यादातर महिलाओं ने रोजगार और महंगाई का मुद्दा उठाया। अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें।
सीएम योगी ने जनसंख्या नीति का एलान किया
- फोटो :
एएनआई
पीलीभीत में भी महिला रोजगार पर बात हुई। डॉ. लोहित प्रभा ने कहा कि बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है। मैं पीएचडी कर चुकी हूं, लेकिन मैं बेरोजगार हूं। अगर कॅरियर बनाना है तो बाहर ही जाना पड़ेगा। सरकार को महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करानी चाहिए। डॉ ईशा ने भी महिलाओं के रोजगार का मुद्दा उठाया।
जनसंख्या नियंत्रण कानून
परिवार छोटा हो तो घर में खुशहाल रहती है, इसका महत्व समझाते हुए महिलाओं ने यूपी में बनने वाले जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर भी उत्साह दिखाया। मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए। पीलीभीत में याची रस्तोगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जा रहा है। ये महिलाओं की कई और समस्याओं का हल है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून
परिवार छोटा हो तो घर में खुशहाल रहती है, इसका महत्व समझाते हुए महिलाओं ने यूपी में बनने वाले जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर भी उत्साह दिखाया। मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए। पीलीभीत में याची रस्तोगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जा रहा है। ये महिलाओं की कई और समस्याओं का हल है।