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UP Election 2022 सत्ता का संग्राम : नेतागण ध्यान दें, महिलाएं किस मुद्दे पर करेंगी वोट ये जान लें
Sat, 04 Dec 2021 03:26 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 04 Dec 2021 03:26 PM IST
सार
अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज के कई जिलों में 'अमर उजाला' का यह चुनावी कार्यक्रम हो चुका है। गाजियाबाद से शुरू हुआ हमारा चुनावी रथ मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, कन्नौज, इटावा, मैनपुरी,एटा, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ और बुलंदशहर पहुंचा। करीब 20 जिले और हजारों महिलाओं से बातचीत में महिलाओं ने सबसे ज्यादा महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी।
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सत्ता का संग्राम-यूपी चुनाव में महिलाओं के मुद्दे
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश की सियासत में महिलाओं को साधने की कोशिशें तेज हो गईं हैं, क्योंकि बीते कुछ समय से यह आधी आबादी किसी को सभी सत्ता में लाने का कुव्वत रखने लगी हैं। उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों पर नजर डालें तो 2017 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा था। जहां करीब 60 फीसदी पुरुषों ने वोट डाला था वहीं करीब 63 फीसदी महिलाओं ने अपना नेता चुना था।
जाहिर है आधी आबादी की अहमियत का अंदाजा सियासी दलों को हो गया है इसलिए सभी पार्टियों के केंद्र में महिलाएं और उनसे जुड़े मुद्दे हैं। ऐसे में ‘अमर उजाला’ के चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' के तहत हमने भी लोगों के चुनावी मिजाज, उनके मुद्दों को जानने और समझने के लिए हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं-युवाओं से संवाद किया और राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे गए। हमने आधी आबादी से यह जानने की कोशिश की कि उनके लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है और वे किस मुद्दे पर वोट डालेंगी।
विस्तार से पढ़िए पूरी रिपोर्ट
महिलाओं के लिए शिक्षा और सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा
हमारे चुनावी रथ का सफर 11 नवंबर को गाजियाबाद से शुरू हुआ था। यहां की महिलाओं के लिए शिक्षा और सुरक्षा की गारंटी की सबसे ज्यादा अमहियत है। वंदना चौधरी ने महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। कहा कि पहले के मुकाबले अपराध कम हुए हैं, लेकिन महिलाएं अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वहीं मेघना बंसल ने कहा कि देश में आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा। गर्ल्स के लिए विशेष डिग्री कॉलेज खुलने चाहिए।
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जाहिर है आधी आबादी की अहमियत का अंदाजा सियासी दलों को हो गया है इसलिए सभी पार्टियों के केंद्र में महिलाएं और उनसे जुड़े मुद्दे हैं। ऐसे में ‘अमर उजाला’ के चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' के तहत हमने भी लोगों के चुनावी मिजाज, उनके मुद्दों को जानने और समझने के लिए हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं-युवाओं से संवाद किया और राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे गए। हमने आधी आबादी से यह जानने की कोशिश की कि उनके लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है और वे किस मुद्दे पर वोट डालेंगी।
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विस्तार से पढ़िए पूरी रिपोर्ट
महिलाओं के लिए शिक्षा और सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा
हमारे चुनावी रथ का सफर 11 नवंबर को गाजियाबाद से शुरू हुआ था। यहां की महिलाओं के लिए शिक्षा और सुरक्षा की गारंटी की सबसे ज्यादा अमहियत है। वंदना चौधरी ने महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। कहा कि पहले के मुकाबले अपराध कम हुए हैं, लेकिन महिलाएं अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वहीं मेघना बंसल ने कहा कि देश में आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा। गर्ल्स के लिए विशेष डिग्री कॉलेज खुलने चाहिए।
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चुनावी चर्चा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की।
- फोटो : अमर उजाला
जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग
12 नवंबर को मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।
मुस्लिम महिलाओं को आजादी मिली
13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने की बात की। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है।
महिलाओं के रोजगार बढ़ाने पर सोचे सरकार
13 नवबंर को रामपुर में अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें। बरेली में हमारी टीम 14 नवंबर को पहुंची। जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा।
12 नवंबर को मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।
मुस्लिम महिलाओं को आजादी मिली
13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने की बात की। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है।
महिलाओं के रोजगार बढ़ाने पर सोचे सरकार
13 नवबंर को रामपुर में अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें। बरेली में हमारी टीम 14 नवंबर को पहुंची। जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा।
बरेली में अमर उजाला का चुनावी रथ पहुंचा महिलाओं के बीच
- फोटो : अमर उजाला
जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग
12 नवंबर को मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।
मुस्लिम महिलाओं को आजादी मिली
13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने की बात की। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है। अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें।
बरेली में हमारी टीम 14 नवंबर को पहुंची। जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा।
12 नवंबर को मुरादाबाद में डॉक्टर वमिता अग्रवाल समेत कई महिलाओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। डॉ. वमिता ने कहा, 'देश में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। बढ़ती आबादी का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पुरुष महिलाओं को इंसान की तरह नहीं, बल्कि बच्चा पैदा करने की मशीन समझते हैं। इसलिए सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।
मुस्लिम महिलाओं को आजादी मिली
13 नवंबर को रामपुर में रोशन बाग में आयोजित कार्यक्रम में भी महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने की बात की। तरन्नुम ने कहा कि पहले मुस्लिम बेटियां घर से नहीं निकल पाती थी लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने और मुस्लिम बेटियों की शिक्षा व्यवस्था भी पहले के मुकाबले काफी अच्छी होने से स्थिति में सुधार हुआ है। नीना ने कहा कि महिलाएं अब पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं। एक कॉल करने पर 10 मिनट में पूरी प्रशासनिक टीम पहुंच जाती है। अनीता शुक्ला ने कहा कि रामपुर में फैक्ट्री होनी चाहिए, ताकि यहां की महिलाएं आसानी से रोजगार हासिल कर सकें।
बरेली में हमारी टीम 14 नवंबर को पहुंची। जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। वहीं डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला रही है उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा।
शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 : चुनावी मुद्दों पर बात करते हुए महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षा को लेकर ग्रामीण लड़कियों के साथ भेदभाव
15 नवंबर को बदायूं में महिलाओं ने हमें अपने मुद्दों से रूबरू कराया। नगरपालिका परिषद की चेयरमैन दीपमाला गोयल ने कहा कि यहां न केवल सियासी बल्कि प्रशासनिक स्तर भी आधी आबादी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां महिलाएं काफी आगे बढ़ रही हैं। उज्जवला योजना घर शौचालय योजना का लाभ मिल रहा है। प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती ने बताया कि गांवों में महिला शिक्षा की स्थिति काफी खराब है। लड़कियों के साथ अभी भी भेदभाव हो रहा है।
जाति आधारित आरक्षण पर उठे सवाल
16 नवंबर को पीलीभीत में महिलाओं ने जाति आधारित आरक्षण पर सवाल उठाए और सभी को एक बराबर मानने की मांग उठाई। महिलाओं ने कहा नौकरियों में एससी, एसटी और सामान्य श्रेणी के लोगों में भेदभाव न किया जाए। ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाली रिया सूरी ने कहा महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर है।
मंहगाई से परेशान महिलाएं
17 नवंबर को शाहजहांपुर में महिलाओं ने विकास, शिक्षा और महंगाई पर अपनी बात रखी। स्कूल कोआर्डिनेटर मंतिशा ने कहा कि शाहजहांपुर अब महानगर बन रहा है। यहां तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। कमियां भी हैं, लेकिन पहले से सुधार हुआ है। एक अन्य महिला ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा सब्जी, तेल व अन्य खाद्य पदार्थ पहले से काफी महंगे हो गए हैं।
15 नवंबर को बदायूं में महिलाओं ने हमें अपने मुद्दों से रूबरू कराया। नगरपालिका परिषद की चेयरमैन दीपमाला गोयल ने कहा कि यहां न केवल सियासी बल्कि प्रशासनिक स्तर भी आधी आबादी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां महिलाएं काफी आगे बढ़ रही हैं। उज्जवला योजना घर शौचालय योजना का लाभ मिल रहा है। प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती ने बताया कि गांवों में महिला शिक्षा की स्थिति काफी खराब है। लड़कियों के साथ अभी भी भेदभाव हो रहा है।
जाति आधारित आरक्षण पर उठे सवाल
16 नवंबर को पीलीभीत में महिलाओं ने जाति आधारित आरक्षण पर सवाल उठाए और सभी को एक बराबर मानने की मांग उठाई। महिलाओं ने कहा नौकरियों में एससी, एसटी और सामान्य श्रेणी के लोगों में भेदभाव न किया जाए। ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाली रिया सूरी ने कहा महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर है।
मंहगाई से परेशान महिलाएं
17 नवंबर को शाहजहांपुर में महिलाओं ने विकास, शिक्षा और महंगाई पर अपनी बात रखी। स्कूल कोआर्डिनेटर मंतिशा ने कहा कि शाहजहांपुर अब महानगर बन रहा है। यहां तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। कमियां भी हैं, लेकिन पहले से सुधार हुआ है। एक अन्य महिला ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा सब्जी, तेल व अन्य खाद्य पदार्थ पहले से काफी महंगे हो गए हैं।
हरदोई, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022, आधी आबादी से बात
- फोटो : अमर उजाला
गुंडागर्दी खत्म हुई
19 नवंबर को सीतापुर में सरिता ने बताया कि यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है। आधी रात को किसी चीज की जरूरत पड़ती है तो बाहर निकलने के नाम से डर लगता है। वहीं कल्पना गुप्ता ने बताया कि यहां गुंडागर्दी एक मुख्य समस्या थी जो अब खत्म हो गई है। विकास के मुद्दे पर यहां महिलाओं की मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिली। कई महिलाओं ने कहा कि महंगाई एक बड़ा मुद्दा है। रेहाना ने कहा कि लोग महंगाई से परेशान हैं। हम वोट उसे देंगे जो महंगाई कम करेगा।
लड़कियों के लिए खोले जाएं और कॉलेज
20 नवंबर को हमारा चुनावी रथ हरदोई में आधी आबादी के बीच पहुंचा। यहां की महिलाओं ने सबसे पहले शहर की साफ-सफाई और स्वच्छता पर बात की। विनीता ने बताया पार्कों में गंदगी और सौंदर्यीकरण का काम नहीं हो रहा। अनुराधा मिश्रा ने कहा महिला शिक्षा को लेकर पहले से स्थिति में सुधार हुआ है। लड़कियों के लिए और कॉलेज खोले जाने की जरूरत है।
महिला सुरक्षा में पुलिस की मनमानी
21 नवंबर को हम थे फर्रुखाबाद में। यहां छात्रा आरती चतुर्वेदी ने कहा कि महिला सुरक्षा में पुलिस मनमानी कर रही है। सरकार चाहे सपा की हो या भाजपा की, पूरी तरह फेल है। सुलक्षणा सिंह ने कहा कि मौजूदा सरकार गड्ढा मुक्त सड़कों के दावे कर रही है, मगर इसमें फेल है। अब चुनाव नजदीक आ गए तो सड़कें बनाने का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने महंगाई को ऐसा मुद्दा बताया जिससे हर घर परेशान है।
19 नवंबर को सीतापुर में सरिता ने बताया कि यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है। आधी रात को किसी चीज की जरूरत पड़ती है तो बाहर निकलने के नाम से डर लगता है। वहीं कल्पना गुप्ता ने बताया कि यहां गुंडागर्दी एक मुख्य समस्या थी जो अब खत्म हो गई है। विकास के मुद्दे पर यहां महिलाओं की मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिली। कई महिलाओं ने कहा कि महंगाई एक बड़ा मुद्दा है। रेहाना ने कहा कि लोग महंगाई से परेशान हैं। हम वोट उसे देंगे जो महंगाई कम करेगा।
लड़कियों के लिए खोले जाएं और कॉलेज
20 नवंबर को हमारा चुनावी रथ हरदोई में आधी आबादी के बीच पहुंचा। यहां की महिलाओं ने सबसे पहले शहर की साफ-सफाई और स्वच्छता पर बात की। विनीता ने बताया पार्कों में गंदगी और सौंदर्यीकरण का काम नहीं हो रहा। अनुराधा मिश्रा ने कहा महिला शिक्षा को लेकर पहले से स्थिति में सुधार हुआ है। लड़कियों के लिए और कॉलेज खोले जाने की जरूरत है।
महिला सुरक्षा में पुलिस की मनमानी
21 नवंबर को हम थे फर्रुखाबाद में। यहां छात्रा आरती चतुर्वेदी ने कहा कि महिला सुरक्षा में पुलिस मनमानी कर रही है। सरकार चाहे सपा की हो या भाजपा की, पूरी तरह फेल है। सुलक्षणा सिंह ने कहा कि मौजूदा सरकार गड्ढा मुक्त सड़कों के दावे कर रही है, मगर इसमें फेल है। अब चुनाव नजदीक आ गए तो सड़कें बनाने का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने महंगाई को ऐसा मुद्दा बताया जिससे हर घर परेशान है।
इटावा में चुनावी चर्चा करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
पूर्ण टीकाकरण बन रहा मुद्दा
22 नवबंर को कन्नौज में गुंजन ने बताया कि यहां विकास तो हुए हैं यहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी सक्रिय हैं। कुसुम यादव ने महिलाओं के शोषण से लेकर महंगाई के बारे में चर्चा की। किसानों को खाद-बीज नहीं मिलने और पूरा टीकाकरण का मुद्दा भी उठा।
स्वयंसहायता समूह ने महिलाओं को बनाया स्वाबलंबी
23 नवंबर को इटावा में पूनम ने बताया कि स्वयंसहायता समूह से महिलाएं यहां स्वाबलंबी बनी है जिससे महिलाओं को घर से बाहर निकलने का मौका मिला है। वहीं क्षमा दीक्षित ने महिलाओं की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इटावा में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
रात में निकलने में महिलाओं को लगता है डर
24 नवंबर को मैनपुरी में महिला सुरक्षा, शिक्षा और विकास समेत तमाम मुद्दों पर महिलाओं ने अपनी राय खुल कर रखी। राधा तिवारी ने कहा कि यहां महिला सुरक्षा मुख्य मुद्दा है। मैनपुरी में रात 10 बजे के बाद घर से बाहर निकलने में डर लगता है। यहां लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। आरती दुबे भी लगभग यही राय थी यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। अंधेरा होते ही घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
22 नवबंर को कन्नौज में गुंजन ने बताया कि यहां विकास तो हुए हैं यहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारी सक्रिय हैं। कुसुम यादव ने महिलाओं के शोषण से लेकर महंगाई के बारे में चर्चा की। किसानों को खाद-बीज नहीं मिलने और पूरा टीकाकरण का मुद्दा भी उठा।
स्वयंसहायता समूह ने महिलाओं को बनाया स्वाबलंबी
23 नवंबर को इटावा में पूनम ने बताया कि स्वयंसहायता समूह से महिलाएं यहां स्वाबलंबी बनी है जिससे महिलाओं को घर से बाहर निकलने का मौका मिला है। वहीं क्षमा दीक्षित ने महिलाओं की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इटावा में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
रात में निकलने में महिलाओं को लगता है डर
24 नवंबर को मैनपुरी में महिला सुरक्षा, शिक्षा और विकास समेत तमाम मुद्दों पर महिलाओं ने अपनी राय खुल कर रखी। राधा तिवारी ने कहा कि यहां महिला सुरक्षा मुख्य मुद्दा है। मैनपुरी में रात 10 बजे के बाद घर से बाहर निकलने में डर लगता है। यहां लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। आरती दुबे भी लगभग यही राय थी यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। अंधेरा होते ही घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
अलीगढ़ में चुनावी चर्चा करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
आगरा टूरिस्ट हब लेकिन सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं
27 नवंबर को आगरा में महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। महिलाओं ने बताया कि टूरिस्ट हब होने के बाद भी महिलाएं यहां सुरक्षित नहीं है। वहीं 28 नवंबर को मथुरा में महिला सशक्तीकरण के लिए काम करने वाली एक महिला ने बताया कि धार्मिक नगरी होने के कारण पहले यहां महिलाओं के लिए केवल शादी या मंदिर की बात सोची जाती थी और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हैं। डिजाइनिंग के काम में महिलाओं को काम के मौके मिल सकते हैं। वहीं उमा सक्सेना का मानना है कि बच्चों के लिए यहां पढ़ाई के अवसर कम है।
बेहतर स्वास्थ्य सेवा भी मुख्य चुनावी मुद्दा
29 नवंबर को हम हाथरस में थे। यहां की महिलाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तो खुश नजर आईं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी पीड़ा भी झलकी। लाइव शो के दौरान शिक्षिका नीरू गुप्ता रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में अच्छा इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनके पति की मौत हो गई। हाथरस में बेहतर स्वास्थय सुविधा का मुद्दा छाया रहा।
बच्चों की महंगी फीस से परेशान महिलाएं
30 नवंबर को जब हमारी टीम अलीगढ़ की महिलाओं के बीच पहुंची तो वे बताने लगीं कि शाम के बाद अभी भी लड़कियों और महिलाओं को घर से बाहर निकलने में डर लगता है। महंगाई से परेशान महिलाओं ने बताया कि पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर, खाद्य पदार्थ सबकुछ महंगा हो गया है। सरकार को इसे कम करने पर फोकस करना चाहिए। कुसुम कौशिक बच्चों की महंगी फीस को लेकर बहुत परेशान थीं।
एक दिसंबर को हम बुलंदशहर की महिलाओं के बीच थे। निशा परवीन सरकारी स्कूलों की दुर्दशा की वजह से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी गिनाने लगीं। वहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि जब नौकरी नहीं देनी है तो कॉलेज क्यों खोलते हो? साधना सक्सेना महंगाई और युवाओं के रोजगार को लेकर सरकार से शिकायत करने लगीं।
27 नवंबर को आगरा में महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। महिलाओं ने बताया कि टूरिस्ट हब होने के बाद भी महिलाएं यहां सुरक्षित नहीं है। वहीं 28 नवंबर को मथुरा में महिला सशक्तीकरण के लिए काम करने वाली एक महिला ने बताया कि धार्मिक नगरी होने के कारण पहले यहां महिलाओं के लिए केवल शादी या मंदिर की बात सोची जाती थी और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हैं। डिजाइनिंग के काम में महिलाओं को काम के मौके मिल सकते हैं। वहीं उमा सक्सेना का मानना है कि बच्चों के लिए यहां पढ़ाई के अवसर कम है।
बेहतर स्वास्थ्य सेवा भी मुख्य चुनावी मुद्दा
29 नवंबर को हम हाथरस में थे। यहां की महिलाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तो खुश नजर आईं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी पीड़ा भी झलकी। लाइव शो के दौरान शिक्षिका नीरू गुप्ता रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में अच्छा इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनके पति की मौत हो गई। हाथरस में बेहतर स्वास्थय सुविधा का मुद्दा छाया रहा।
बच्चों की महंगी फीस से परेशान महिलाएं
30 नवंबर को जब हमारी टीम अलीगढ़ की महिलाओं के बीच पहुंची तो वे बताने लगीं कि शाम के बाद अभी भी लड़कियों और महिलाओं को घर से बाहर निकलने में डर लगता है। महंगाई से परेशान महिलाओं ने बताया कि पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर, खाद्य पदार्थ सबकुछ महंगा हो गया है। सरकार को इसे कम करने पर फोकस करना चाहिए। कुसुम कौशिक बच्चों की महंगी फीस को लेकर बहुत परेशान थीं।
एक दिसंबर को हम बुलंदशहर की महिलाओं के बीच थे। निशा परवीन सरकारी स्कूलों की दुर्दशा की वजह से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी गिनाने लगीं। वहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि जब नौकरी नहीं देनी है तो कॉलेज क्यों खोलते हो? साधना सक्सेना महंगाई और युवाओं के रोजगार को लेकर सरकार से शिकायत करने लगीं।