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उत्तर प्रदेश चुनाव का सातवां चरण: सपा के लिए अनुकूल रहा है यहां का इतिहास, क्या भाजपा को मिलेगा मौका

Sat, 05 Mar 2022 03:55 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sat, 05 Mar 2022 03:55 PM IST
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सार
आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का दबदबा कितना मजबूत है, इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि 2017 में भाजपा की जबरदस्त लहर में भी सपा ने आजमगढ़ में पांच सीटों पर जीत हासिल कर ली थी। चार सीटें बसपा के खाते में गई थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह क्षेत्र सपा के ही साथ रहा और अखिलेश यादव को यहां से जीत मिली थी...
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UP election 2022: In the seventh phase of Uttar Pradesh assembly elections, votes will be cast on March 7 for 54 seats in nine districts of Purvanchal
अखिलेश यादव की जनसभा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें चरण में पूर्वांचल के नौ जिलों की 54 सीटों के लिए सात मार्च को वोट डाले जाएंगे। इस अंतिम चरण में वाराणसी, जौनपुर, संत रविदास नगर (भदोही), आजमगढ़, चंदौली, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र जिले शामिल हैं। मंडल-कमंडल की राजनीति की शुरुआत से ही इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का दबदबा रहा है। पारंपरिक रूप से जातिवादी राजनीति के ज्यादा असर के कारण इस क्षेत्र में भाजपा के लिए संभावनाएं कम ही रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से इस क्षेत्र का चुनावी परिदृश्य काफी बदल गया है, लेकिन इसके बाद भी इस क्षेत्र में दबदबा सपा-बसपा का ही रहा है।



2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वांचल के गढ़ वाराणसी जिले की आठ सीटों में से सात पर कब्जा जमा लिया था। लेकिन पड़ोस के ही जिले आजमगढ़ की दस विधानसभा सीटों में से उसे केवल एक सीट फूलपुर पवई पर सफलता मिली थी। वह भी केवल इस कारण क्योंकि सपा नेता रमाकांत यादव उस समय अपनी पार्टी से नाराज होकर उसे सबक सिखाना चाहते थे और इस सीट पर उन्होंने अपने बेटे अरुणकांत यादव को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़वा दिया था।


आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का दबदबा कितना मजबूत है, इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि 2017 में भाजपा की जबरदस्त लहर में भी सपा ने आजमगढ़ में पांच सीटों पर जीत हासिल कर ली थी। चार सीटें बसपा के खाते में गई थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह क्षेत्र सपा के ही साथ रहा और अखिलेश यादव को यहां से जीत मिली थी। 2014 में यहां से मुलायम सिंह को जीत हासिल हुई थी।  

जौनपुर जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। यहां भाजपा को चार, भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) को एक, सपा को तीन और बसपा को एक सीट पर सफलता मिली थी। इस चुनाव में बसपा ने मुंगरा बादशाहपुर की जिस सीट पर जीत हासिल की थी, वह ब्राह्मण बाहुल्य है। लगातार तीन बार जीत हासिल कर चुकी भाजपा की प्रत्याशी सीमा द्विवेदी को बसपा की सुषमा पटेल के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

गाजीपुर की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर भाजपा, दो पर सुभासपा को जीत मिली थी, जो उस चुनाव में भाजपा के साथ थी। दो सीटें सपा के खाते में आई थीं। लेकिन अब सुभासपा के सपा के साथ आ जाने के कारण गाजीपुर में चुनावी समीकरण बदल गए हैं, और बदले माहौल में सपा को लाभ मिल सकता है।

यहां मिला था भाजपा को लाभ

चंदौली जिले की चार सीटों में से तीन भाजपा को और एक पर सपा को जीत मिली थी। भदोही की तीन सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर उसके सहयोगी दल निषाद पार्टी को जीत मिली थी। मिर्जापुर की पांचों सीटों पर भाजपा-अपना दल एस का कब्जा हो गया था। भाजपा चार पर और अपना दल एक सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। सोनभद्र जिले की चारों सीटें भी भाजपा गठबंधन के खाते में गई थीं। यहां तीन पर भाजपा और एक पर अपना दल को जीत मिली थी।

भाजपा को मिला था एकतरफा लाभ

पिछले चुनाव में पीएम मोदी की लोकप्रियता की नाव पर सवार भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव की लड़ाई लगभग एक तरफा साबित हुई थी। अकेले वाराणसी मंडल की 28 सीटों में ही उसे 15 पर जीत मिली थी, तो समाजवादी पार्टी केवल सात सीटों पर सिमट गई थी। बसपा को तो केवल दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस बार भाजपा को महंगाई, बेरोजगारी और योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज का हिसाब भी देना पड़ रहा है।

हालांकि, इस चरण में भी भाजपा को जनता की आस्था के केंद्र काशी विश्वनाथ मंदिर के कायाकल्प, वाराणसी के ढांचागत विकास, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा के विकास का लाभ मिलता दिख रहा है। उसे केंद्र-राज्य सरकार की लाभकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। लेकिन इसके बाद भी 2022 में यहां का चुनावी माहौल काफी बदल गया है।   

भाजपा दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंचेगी- सपा

समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के लिए बेचैन है और वह सरकार में बदलाव के लिए पूरी मेहनत कर रही है। उसके नेता अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि इस चरण में भाजपा दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंचेगी। आजमगढ़, जौनपुर, चंदौली और मिर्जापुर में खाता खोलना भी मुश्किल हो जाएगा। वहीं, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी पूर्वांचल में अपनी पैठ बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह चरण किसी पार्टी के लिए एक तरफा नहीं होने जा रहा है। इससे यहां सभी पार्टियों के लिए संभावनाएं बनती दिख रही हैं।

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