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UP Election 2022: अब्बाजान के बाद ‘चचाजान’ की एंट्री, ओवैसी की पार्टी पर क्यों लगता है भाजपा की बी टीम होने का आरोप

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 15 Sep 2021 02:39 PM IST

सार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले तालिबान, फिर अब्बाजान और अब चचाजान की एंट्री हो गई है। किसान नेता राकेश टिकैत ने यह आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भाजपा के चचाजान हैं। ओवैसी पर यह आरोप लगने का सिलसिला बिहार चुनाव से शुरू हुआ जो अब तक जारी है। 
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टिकैत-ओवैसी
टिकैत-ओवैसी - फोटो : self
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विस्तार

उत्तर प्रदेश विधासभा के चुनाव में भले अभी कुछ महीने बाकी हों लेकिन नेताओं में जुबानी जंग शुरू हो गई है। भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने हापुड़ में एक रैली के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन  (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भारतीय जनता पार्टी का ‘चाचाजान’ कह दिया है। टिकैत ने कहा कि इस चुनाव में भाजपा के चचाजान आ गए हैं। वे यदि भाजपा को गाली भी देते हैं तो उन पर केस दर्ज नहीं होता क्योंकि वे दोनों एक ही टीम है। उससे पहले पटना में ओवैसी ने कल कहा था- क्या मुसलमान राजद-सपा का गुलाम है जो उन्हीं को वोट देता रहेगा। 
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राकेश टिकैत से पहले कई पार्टियां ओवैसी पर भाजपा की बी टीम होने का आरोप लगा चुकी है। ओवैसी के एजेंडे पर सवाल उठाने वालों में सबसे पहले कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी थे। कांग्रेस के बाद राजद सपा और तृणमूल कांग्रेस तक ने उन पर भाजपा की भी पार्टी होने का आरोप मढ़ा। अधीर रंजन चौधरी ने बिहार चुनाव के बाद कहा था " बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को इस्तेमाल करने की भाजपा की रणनीति एक हद तक सफल रही। यही आरोप यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भी ओवैसी पर लग रहे हैं। माना जा रहा है कि हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ओवैसी यूपी के चुनाव मैदान में उतरे हैं।




भाजपा के साथ सांठगांठ है 
उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी एल पुनिया ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कहा निश्चित तौर पर ओवैसी यूपी चुनाव केवल भाजपा के इशारे पर लड़ रहे हैं। उन्होंने 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है और वे हमेशा ऐसा करते हैं। चाहे महाराष्ट्र का चुनाव हो या बिहार का ये साफ है कि भाजपा के साथ पूरी तरह उनकी सांठगांठ है। वे ऊपरी तौर पर भाजपा के साथ विरोध दिखाते हैं लेकिन हैं वे भाजपा की बी टीम। उन पर निरंतर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे केवल भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए ही अपने उम्मीदवार उतारते हैं और यह आरोप उन पर बिना वजह नहीं लगते हैं। वे जहां-जहां चुनाव लड़ते हैं भाजपा को वहां- वहां फायदा मिलता है।

यह भी पढ़ें: राकेश टिकैत का तंज: भाजपा के चचाजान हैं ओवैसी, इन पर नहीं होता कभी कोई केस

भाजपा से हुआ ओवैसी का उदय
सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने बताया- यह साफ है कि भाजपा ओवैसी की पार्टी को प्रश्रय देती है। वे बिहार मे राजद को रोकने के लिए भाजपा के प्लान के हिसाब से वहां चुनाव लड़े और अब यूपी आ गए हैं। ओवैसी दक्षिण भारत के अन्य राज्य में चुनाव लड़ने नहीं जाते, वे केवल तेलंगाना तक सीमित हैं। नोटबंदी के दौरान उनके बैंक में करोड़ों रूपए जमा हुए लेकिन न तो ईडी ने पूछा और न सीबीआई। 2014 से पहले ओवैसी को कौन जानता था। इनका उदय ही केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद हुआ है।   
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