दूसरे चरण में 40 सीटें ऐसी, जहां मुस्लिम मतदाता तय करते हैं हार-जीत
यूपी विधानसभा के दूसरे चरण के लिए 15 फरवरी को 11 जिलों की 67 सीटों के लिए वोटिंग होनी है। सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, संभल, रामपुर, बरेली, अमरोहा, पीलीभीत, खीरी, शाहजहांपुर और बदायूं जिले की 67 सीटों पर मतदान है। दूसरे चरण के लिए 721 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां कुल 2.28 करोड मतदाता है, जिनमें से 1.24 करोड़ पुरुष और 1.04 करोड महिलाएं हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 67 सीटों में से समाजवादी पार्टी को 34 सीटें मिली थी, जबकि बसपा को 18, बीजेपी को 10, कांग्रेस को 3 और अन्य को 2 सीटें हासिल हुई थीं।
इस चरण में 40 सीटें ऐसी मानी जाती है जहां मुस्लिम मतदाता हार जीत को काफी हद तक तय कर देते हैं। रामपुर में जहां देश में सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता रहते हैं। वहीं बदायूं में यादवों की बड़ी आबादी है। बदायूं की गुन्नौर सीट ऐसी है, जहां पूरे उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा यादव मतदाता रहते हैं और इस सीट को जीतना समाजवादी पार्टी के लिए नाक का सवाल माना जाता है।
सपा के गढ़ में चुनाव, अमित शाह का दांव
वहीं मुसलमानों के दो बड़े केंद्र बरेली और देवबंद दोनों इलाके में यहां चुनाव इसी चरण में हो रहे हैं। यह चुनाव मुस्लिम बहुल इलाके में हो रहा है और इसे सपा का गढ़ माना जाता है।
पहले चरण के मतदान के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि दो चरण में सपा से नहीं बल्कि बसपा से सीधा मुकाबला है। रणनीतिकारों का कहना है कि अमित शाह ऐसा जानबूझकर कहा था। दरअसल बीजेपी नहीं चाहती कि मुस्लिम मतदाताओं का रुझान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की तरफ पूरी तरह हो जाए। बीएसपी इस इलाके में मजबूती से चुनाव लड़ती है तो बीजेपी को भी फायदा होगा। इसीलिए दूसरे चरण में भी मुस्लिम मतदाताओं के रुझान पर सब की नजर होगी।
बरेली के आसपास के इलाकों में गंगवार कुर्मी मतदाताओं की बड़ी आबादी है। उनका वोट हासिल करने की कोशिश समाजवादी पार्टी के अलावा बीजेपी भी जोर शोर से कर रही हैं।
इस फेज की 67 सीटों में से 12 आरक्षित हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में इनमें से 9 पर सपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि 3 सीटें बसपा की झोली में गई थीं।