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UP Assembly Election 2022: अब लखनऊ में डेरा डालेंगी प्रियंका, लखीमपुर खीरी कांड को भुनाने की तैयारी

Sat, 09 Oct 2021 01:56 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 09 Oct 2021 01:56 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी कांड को लेकर प्रियंका गांधी की सियासी दांव ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के जिंदा होने का सबूत दे दिया। इसके साथ ही अब कांग्रेसियों की लंबे समय से हो रही मांग भी पूरी होने वाली है। कांग्रेस महासचिव लखनऊ में अपने जिस रिश्तेदार के घर पर ठहरती हैं वहां उनके लिए खास इंतजाम कर लिए गए हैं क्योंकि प्रियंका अब चुनाव तक लखनऊ में ही रूकने वाली है। 

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UP assembly elections 2022: Priyanka Gandhi Vadra will now camp in Lucknow, Congress preparing to win the election from Lakhimpur Kheri incident
लखनऊ की दलित बस्ती लवकुश नगर में झाड़ू लगातीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी कांड में पीड़ितों को इंसाफ दिलाने और आरोपियों की गिरफ्तारियों की मांग को लेकर प्रियंका गांधी ने यूपी में जिस तरह के तेवर दिखाएं हैं उससे पार्टी  कार्यकर्ताओं में एक नई जान आ गई है। साथ ही कांग्रेस ने प्रदेश में विपक्ष पर भी अपनी बढ़त ली है। रविवार को बनारस में किसान रैली का आयोजन करके प्रियंका गांधी ने एक तरह से यह संदेश भी दे दिया है कि वे अब रूकने वाली नहीं हैं। प्रियंका और पार्टी दोनों ने इस मुद्दे को चुनाव तक भुनाने की तैयारी कर ली है।
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कौल हाऊस तैयार
किसान आंदोलन को अपना मुख्य एजेंडा बनाते हुए प्रियंका गांधी ने कांर्यकर्ताओं में जो सियासी गर्माहट भर दी है उसके बाद उन्होंने अब लखनऊ में ही डेरा डालने का फैसला किया है। प्रियंका के लखनऊ में ही रूकने की बात सुनकर पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित हैं।
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कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कार्यकर्ता और प्रदेश के वरिष्ठ नेता लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि अब प्रियंका गांधी को लखनऊ में ही डेरा डालना चाहिए लेकिन कभी कोरोना तो कभी और किसी वजह से उनकी यह योजना खटाई में पड़ती रही। लेकिन अब जबकि चुनाव में 100 दिन बचे हैं ऐसे मे उन्होंने चुनाव तक लखनऊ में ही रूकने का कार्यक्रम बनाया है। प्रियंका गांधी लखनऊ में अपने एक रिश्तेदार शीला कॉल के यहां रूकती रही हैं। इसी घर को प्रियंका के प्रवास के लिए अच्छी तरह तैयार कर लिया गया है। हालांकि कौल हाउस में उनकी जरूरत के अनुसार पिछले साल ही साज-सज्जा पूरी कर ली गई थी।
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शीला कौल, जिनका 2015 में निधन हो गया,  वह भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की भाभी थीं। वह केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं। कौल का विशाल बंगला लखनऊ के गोखले मार्ग पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रियंका अभी भी यहीं ठहरी हुई हैं।

 

UP assembly elections 2022: Priyanka Gandhi Vadra will now camp in Lucknow, Congress preparing to win the election from Lakhimpur Kheri incident
लखनऊ में प्रियंका गांधी - फोटो : Agency
कांग्रेस के युवा नेता ने बताया कि प्रियंका गांधी ने हमें साफ कहा है कि वे अब कहीं नहीं जाने वाली हैं बल्कि लखनऊ में ही रहेंगी। कार्यकर्ता और नेता जब चाहें उनसे मिल सकते हैं। युवा नेता ने यह भी बताया कि हमारी नेता का साफ संदेश है कि किसान आंदोलन को लेकर यह सरकार जिस तरह किसानों को गाड़ियों से कुचल रही है यह बात हम गांव-गांव पहुंचाएं और इस सरकार का असली चेहरा सबके सामने लेकर आएं।

कोई फर्क नहीं पड़ने वाला
हालांकि बुंदेलखंड के नेता जो हाल में ही सपा में शामिल हो गए हैं उनका कहना है कि प्रियंका नीचे के किसी कार्यकर्ताओं और छोटे पदाधिकारियों से नहीं मिलतीं हैं और ना ही उनकी टीम के लोग मिलने देते हैं। वे पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की कोई कद्र नहीं करतीं इसलिए उनके यहां रहने और रहने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि बिना जमीनी कार्यकर्ताओं से मिले उन्हें असली जमीनी रिपोर्ट नहीं मिलेगी।

उनके मुताबिक केवल प्रियंका गांधी के जुझारूपन से सीटें नहीं मिलेंगी। जब तक कि एक मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क उनके साथ नहीं हो लेकिन अब तक उनके प्रयास केवल राज्य में पार्टी को पुनर्जीवित करने और खुद को इंदिरा गांधी के रूप में पेश करने के इर्द-गिर्द ही घूमती दिखती है।

लखीमपुर खीरी कांड से कांग्रेस ने ली बढ़त    
राजनीति के जानकार कहते हैं इस कांड के कारण यूपी के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी विपक्ष को भाजपा के खिलाफ आक्रमक होने का मौका मिला है जिसमें कांग्रेस सबसे आगे दिखाई दे रही है। खासतौर पर यूपी में प्रियंका ने हाथरस से लेकर लखीमपुर खीरी कांड तक में  जिस तरह की सियासी फुर्ती दिखाई उससे प्रदेश में कांग्रेस के जीवित रहने का संकेत तो मिला ही साथ ही इससे भाजपा और सपा के माथे पर भी बल पड़ गए।

प्रिंयका ने अपने तेवर से इस बार दूसरी पार्टियों को कुछ सोचने का मौका ही नहीं दिया। लखीमपुर खीरी में हुई घटना की खबर मिलते ही जहां वे तुरंत लखनऊ के लिए निकल गई थीं वहीं दूसरे दल सुबह होने का इंतजार करते नजर आए। सपा अध्यक्ष तो इस मामले में बहुत पीछे रह आए। 

 

UP assembly elections 2022: Priyanka Gandhi Vadra will now camp in Lucknow, Congress preparing to win the election from Lakhimpur Kheri incident
लखनऊ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा। - फोटो : amar ujala
कितनी बदलेगी पार्टी की किस्मत
लेकिन क्या 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रियंका गांधी वाड्रा का लखीमपुर खीरी दौरे से भाजपा को नुकसान होगा? इस बारे में राजनीतिक पर्यवेक्षक यह मानते हैं कि उन्होंने यूपी में अपने पैर जमीन पर मजबूती से टिका लिए हैं और खुद को स्ट्रीट-फाइटर मोड पर स्विच कर लिया है। 1970 के दशक में अपनी दादी इंदिरा गांधी और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की स्टाइल-शीट से उधार लेते हुए, उन्होंने लखीमपुर खीरी जिले के रास्ते में यूपी पुलिस का सामना किया, पुलिस ने उन्हें धक्का दिया तो उन्होंने दहाड़ लगाई (जिसका वीडियो वायरल हुआ)। लखनऊ से लगभग 90 किलोमीटर दूर सीतापुर के एक गेस्ट हाउस में नजरबंद रहीं।

इन सभी घटनाओं से देश में चर्चा हुई और इसमें कोई शक नहीं है कि लखीमपुर खीरी मुद्दे पर एकमात्र राजनेता प्रियंका गांधी ही रहीं और उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी अवाक कर दिया। यह उनके लिए व्यक्तिगत जीत का क्षण था और हो सकता है भाजपा को थोड़ा-बहुत नुकसान हो जाए लेकिन यह शायद ही 2022 के चुनावों में उनकी पार्टी की किस्मत बदलने के लिए पर्याप्त हो।

सपा का वोट काटने के लिए प्रियंका के प्रति नरमी
वहीं सपा के एक नेता ने कहा कि सरकार ने प्रियंका गांधी ने जिस तरह हाउस अरेस्ट के बाद भी टेलीविजन चैनलों को इंटरव्यू दिए, जिस कमरे में उन्हें हिरासत में लिया गया था, उसके फर्श पर झाड़ू लगाने उसकी क्लिप बना कर उसे वायरल किया गया, उन्हें वापिस लखनऊ क्यों नहीं लाया गया? जाहिर तौर पर यह कुछ ऐसे सवाल है जिससे यह संदेश पैदा होता है कि प्रियंका गांधी के साथ यह नरमी क्यों बरती गई? क्या सिर्फ इसलिए कि भाजपा को कांग्रेस से कोई खतरा नजर नहीं आ रहा बल्कि सपा को वह अपना असली प्रतिद्वंदी मानती हैं। प्रियंका की सियासत से सपा के वोट बैंक में कटौती हो इसलिए ऐसा किया गया। 

कांग्रेस को कोई फायदा नहीं मिलेगा
एक सर्वे में भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी कांड के बाद भी कांग्रेस को चुनाव में कोई खास फायदा नहीं  मिलेगा और पार्टी को केवल तीन से सात सीटें मिल सकती हैं। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से सरकार बना सकती है। सर्वे में दावा किया गया है कि भाजपा के खाते में 241 से 249 सीटें आ सकती हैं। वहीं सपा के हिस्से में 130 से 138 सीटें तो बसपा को 20 से कम सीटें मिलने के आसार हैं। 

 
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