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UP Election 2022: भाजपा की 'मातृ शक्ति' बनाम कांग्रेस की 'नारी शक्ति', यूपी चुनाव में महिलाओं की भूमिका क्यों हुई अहम
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Prayagraj News : प्रयागराज में मातृशक्ति महाकुंभ को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी।
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prayagraj
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को प्रयागराज में मातृशक्ति के महाकुंभ में भाग लिया। परेड मैदान पर आयोजित हुए महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं से संवाद किया। इस दौरान एसएचजी के बैंक खातों में एक हजार करोड़ रुपये भी डाले गए। इससे 16 लाख महिलाओं को मदद मिलेगी। इसके अलावा पीएम ने आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाओं को भी सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में करीब दो लाख से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। पीएम ने कहा यूपी में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो काम हुआ है उसे पूरा देश देख रहा है।इस कार्यक्रम के जरिए पीएम ने महिलाओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भाजपा सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। इस कार्यक्रम में मोदी सरकार की महिला मंत्री और महिला सांसद भी मंच पर नजर आईं। कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि यह कार्यक्रम महिलाओं को, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर, उन्हें आवश्यक कौशल, प्रोत्साहन और संसाधन प्रदान करके सशक्त बनाने के लिए मोदी के दृष्टिकोण के अनुसार आयोजित किया जा रहा है।
इस चुनाव में महिलाएं सबसे ज्यादा केंद्र में
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के 'नारी शक्ति' के नारे के बीच पीएम मोदी का ‘मातृशक्ति’ के इस कार्यक्रम में शामिल होने से और महिलाओं तक राजनीतिक दलों के पहुंचने की कोशिश से एक बात साफ है इस बार चुनाव में महिला मतदाता सबसे ज्यादा केंद्र में रहने वाली हैं। भाजपा हो या कांग्रेस इस चुनाव में दोनों के बीच यह समानता है कि वे आधी आबादी का समर्थन हासिल करना चाहते हैं। हिंदी भाषी राज्य में महिला मतदाताओं पर स्पॉटलाइट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अतीत में चुनावों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और उनके मुद्दों पर कम ध्यान दिया गया।
गाजियाबाद के राजनगर सेक्टर 3 में चुनाव पर चर्चा करतीं महिलाएं।
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अमर उजाला
महिलाएं, एक निर्णायक वोट बैंक
यूपी में अब तक जाति और धर्म से प्रेरित चुनावों में महिलाओं को लगभग अनसुना किया गया। राज्य में लगभग सात करोड़ महिला मतदाता हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यूपी में करीब 63 फीसदी महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के रूप में महिलाओं की भागीदारी में 1991 में 44.2 प्रतिशत से 2019 में 59.56 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले तीन दशकों में 15 प्रतिशत की वृद्धि बढ़ती राजनीतिक चेतना के साथ-साथ चुनावों में बढ़ती रुचि का संकेत है।
इसका मतलब यह भी है कि महिलाएं राजनीतिक रूप से लामबंद हो रही हैं और एक निर्णायक वोट बैंक के रूप में उभर रही हैं। वे उत्तर प्रदेश के चुनावों में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कमर कस रही हैं और 1991 से उनका प्रभाव बढ़ रहा है। जिसे अब राजनीतिक दलों ने भांप लिया है।
वोटिंग में पुरुषों से आगे महिलाएं
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएडीएस) में प्रोफेसर और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय कुमार के मुताबिक हाल के वर्षों में महिलाओं ने स्वतंत्र रूप से मतदान करना शुरू कर दिया है। एक दशक पहले, केवल लगभग 15 फीसदी महिलाओं ने अपने परिवार के पुरुष सदस्यों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से मतदान किया। लेकिन अब, 50 फीसदी से कुछ अधिक महिलाएं स्वतंत्र रूप से मतदान करती हैं। महिलाएं निश्चित रूप से पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्या में मतदान कर रही हैं। वोटिंग में भी वे पुरुषों से आगे हैं।
यूपी में अब तक जाति और धर्म से प्रेरित चुनावों में महिलाओं को लगभग अनसुना किया गया। राज्य में लगभग सात करोड़ महिला मतदाता हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यूपी में करीब 63 फीसदी महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के रूप में महिलाओं की भागीदारी में 1991 में 44.2 प्रतिशत से 2019 में 59.56 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले तीन दशकों में 15 प्रतिशत की वृद्धि बढ़ती राजनीतिक चेतना के साथ-साथ चुनावों में बढ़ती रुचि का संकेत है।
इसका मतलब यह भी है कि महिलाएं राजनीतिक रूप से लामबंद हो रही हैं और एक निर्णायक वोट बैंक के रूप में उभर रही हैं। वे उत्तर प्रदेश के चुनावों में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कमर कस रही हैं और 1991 से उनका प्रभाव बढ़ रहा है। जिसे अब राजनीतिक दलों ने भांप लिया है।
वोटिंग में पुरुषों से आगे महिलाएं
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएडीएस) में प्रोफेसर और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय कुमार के मुताबिक हाल के वर्षों में महिलाओं ने स्वतंत्र रूप से मतदान करना शुरू कर दिया है। एक दशक पहले, केवल लगभग 15 फीसदी महिलाओं ने अपने परिवार के पुरुष सदस्यों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से मतदान किया। लेकिन अब, 50 फीसदी से कुछ अधिक महिलाएं स्वतंत्र रूप से मतदान करती हैं। महिलाएं निश्चित रूप से पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्या में मतदान कर रही हैं। वोटिंग में भी वे पुरुषों से आगे हैं।
घोषणा पत्र जारी करतीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (मध्य में), आराधना शुक्ला व प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत।
- फोटो :
amar ujala
स्वस्थ परंपरा का विकास
राजनीति के अन्य जानकार मानते हैं इस चुनाव में महिलाओं पर राजनीतिक दलों का विशेष ध्यान होने के कारण इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका अहम होती जा रही है और कहीं न कहीं प्रियंका गांधी ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने और ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देकर इस मामले में बढ़त लेने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि इससे स्वस्थ परंपरा का विकास हो रहा है। अब कम से कम महिलाओं ने चुनाव में अपनी जगह बना ली है।
क्या कांग्रेस को फायदा होगा?
संजय कुमार के मुताबिक प्रियंका गांधी यूपी में महिला वोटरों को लामबंद करने की कोशिश कर रही हैं। महिलाओं के लिए की गई उनकी घोषणाएं भले ही कांग्रेस के चुनावी भाग्य को नहीं बदल सकती, लेकिन निश्चित रूप से यह वो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जिसके बारे में ज्यादातर महिला मतदाताएं सोचती हैं।
कांग्रेस ने उन मुद्दों को छूआ जो महिलाओं को पसंद
संजय कुमार का मानना है कि कांग्रेस बेशक लड़ाई में आगे नहीं है लेकिन पार्टी ने निश्चित रूप से उन मुद्दों को छुआ है जो भारत की महिला मतदाताओं को प्रिय हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस का 40% महिला उम्मीदवारों को टिकट देने का निर्णय पार्टी के समर्थन आधार को बढ़ाने में मदद कर सकता है, हालांकि फिर से इससे पार्टी को चुनाव में गंभीर मुकाबले में नहीं माना जा सकता।
राजनीति के अन्य जानकार मानते हैं इस चुनाव में महिलाओं पर राजनीतिक दलों का विशेष ध्यान होने के कारण इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका अहम होती जा रही है और कहीं न कहीं प्रियंका गांधी ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने और ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देकर इस मामले में बढ़त लेने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि इससे स्वस्थ परंपरा का विकास हो रहा है। अब कम से कम महिलाओं ने चुनाव में अपनी जगह बना ली है।
क्या कांग्रेस को फायदा होगा?
संजय कुमार के मुताबिक प्रियंका गांधी यूपी में महिला वोटरों को लामबंद करने की कोशिश कर रही हैं। महिलाओं के लिए की गई उनकी घोषणाएं भले ही कांग्रेस के चुनावी भाग्य को नहीं बदल सकती, लेकिन निश्चित रूप से यह वो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जिसके बारे में ज्यादातर महिला मतदाताएं सोचती हैं।
कांग्रेस ने उन मुद्दों को छूआ जो महिलाओं को पसंद
संजय कुमार का मानना है कि कांग्रेस बेशक लड़ाई में आगे नहीं है लेकिन पार्टी ने निश्चित रूप से उन मुद्दों को छुआ है जो भारत की महिला मतदाताओं को प्रिय हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस का 40% महिला उम्मीदवारों को टिकट देने का निर्णय पार्टी के समर्थन आधार को बढ़ाने में मदद कर सकता है, हालांकि फिर से इससे पार्टी को चुनाव में गंभीर मुकाबले में नहीं माना जा सकता।
महिलाओं के साथ प्रियंका गांधी
- फोटो :
Twitter : @priyankagandhi
प्रियंका गांधी ने लिया श्रेय
प्रियंका गांधी इस चुनाव में महिलाओं को अहमियत दिए जाने का श्रेय अपनी पार्टी को दे रही हैं। पीएम मोदी के कार्यक्रम केबाद उन्होंने कहा कि पीएम आज प्रयागाज में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में शामिल हुए थे. इसपर प्रियंका ने कहा कि 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' की वजह से आज प्रधानमंत्री को महिलाओं के लिए काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा महिलाएं जाग गई हैं। इस देश की शक्ति के आगे पीएम झुक गए। यह उत्तर प्रदेश की महिलाओं की जीत है। मैं बहुत खुश हूं।
भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश
आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पिछले सात सालों में महिलाएं बड़ी संख्या में भाजपा को वोट देने के लिए सामने आ रही हैं, और इसके परिणामस्वरूप भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत हासिल की। हालांकि, 2012 में समाजवादी पार्टी के अब तक के सबसे अच्छा प्रदर्शन के पीछे भी महिला मतदाताओं का ही हाथ माना जाता है। पहली बार महिला मतदाताओं ने वोटिंग में पुरुषों को पछाड़ दिया और 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार किया।
1993 के बाद से, 2007 के अपवाद को छोड़कर राज्य विधानसभा चुनावों में महिलाओं का वोट प्रतिशत 50 प्रतिशत से ऊपर रहा है। सबसे अधिक 2017 विधानसभा चुनाव में 63 फीसदी था। लिहाजा एक तरफ जहां भाजपा अपने इस वोट बैंक को स्थिर बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
प्रियंका गांधी इस चुनाव में महिलाओं को अहमियत दिए जाने का श्रेय अपनी पार्टी को दे रही हैं। पीएम मोदी के कार्यक्रम केबाद उन्होंने कहा कि पीएम आज प्रयागाज में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में शामिल हुए थे. इसपर प्रियंका ने कहा कि 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' की वजह से आज प्रधानमंत्री को महिलाओं के लिए काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा महिलाएं जाग गई हैं। इस देश की शक्ति के आगे पीएम झुक गए। यह उत्तर प्रदेश की महिलाओं की जीत है। मैं बहुत खुश हूं।
भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश
आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पिछले सात सालों में महिलाएं बड़ी संख्या में भाजपा को वोट देने के लिए सामने आ रही हैं, और इसके परिणामस्वरूप भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत हासिल की। हालांकि, 2012 में समाजवादी पार्टी के अब तक के सबसे अच्छा प्रदर्शन के पीछे भी महिला मतदाताओं का ही हाथ माना जाता है। पहली बार महिला मतदाताओं ने वोटिंग में पुरुषों को पछाड़ दिया और 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार किया।
1993 के बाद से, 2007 के अपवाद को छोड़कर राज्य विधानसभा चुनावों में महिलाओं का वोट प्रतिशत 50 प्रतिशत से ऊपर रहा है। सबसे अधिक 2017 विधानसभा चुनाव में 63 फीसदी था। लिहाजा एक तरफ जहां भाजपा अपने इस वोट बैंक को स्थिर बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जिनसे पीएम मोदी ने किया संवाद
- फोटो :
अमर उजाला
भाजपा की भी योजना तैयार
प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश चुनावों में महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत टिकट दिए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस की रणनीति का मुकाबला करने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने भी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। मिली जानकारी के मुताबकि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा राज्य में महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और बेहतर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर किए गए उपायों को बार-बार सामने लाने की योजना बनाई है।
आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान हुए सकारात्मक बदलावों पर चर्चा करने के लिए महिलाओं के साथ 'सम्मेलन' हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को हुए कार्यक्रम में महिलाओं के लिए किए गए विकास कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। भाजपा ने उन 2000 महिलाओं को पार्टी में शामिल करने की योजना बनाई है, जिनका जीवन योगी के सत्ता में आने के बाद बदल गया था। भाजपा ने महिला सुरक्षा पर फोकस रखा है और यह बताया जाएगा कि यूपी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी-रोमियो स्क्वॉड के गठन और सेना में महिलाओं के लिए पदों को खोलने के लिए केंद्र के कदम, पुलिस बल में अधिक भागीदारी जैसे अन्य कदमों ने महिलाओं को कितना सशक्त बनाया है।
प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश चुनावों में महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत टिकट दिए जाने के फैसले के बाद कांग्रेस की रणनीति का मुकाबला करने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने भी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। मिली जानकारी के मुताबकि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा राज्य में महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और बेहतर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर किए गए उपायों को बार-बार सामने लाने की योजना बनाई है।
आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान हुए सकारात्मक बदलावों पर चर्चा करने के लिए महिलाओं के साथ 'सम्मेलन' हो रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को हुए कार्यक्रम में महिलाओं के लिए किए गए विकास कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। भाजपा ने उन 2000 महिलाओं को पार्टी में शामिल करने की योजना बनाई है, जिनका जीवन योगी के सत्ता में आने के बाद बदल गया था। भाजपा ने महिला सुरक्षा पर फोकस रखा है और यह बताया जाएगा कि यूपी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी-रोमियो स्क्वॉड के गठन और सेना में महिलाओं के लिए पदों को खोलने के लिए केंद्र के कदम, पुलिस बल में अधिक भागीदारी जैसे अन्य कदमों ने महिलाओं को कितना सशक्त बनाया है।