Rajya Sabha: 56 में 53 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय; यूपी, हिमाचल और कर्नाटक की एक-एक सीट पर फंसा पेंच
यूपी में 10 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। यहां एक उम्मीदवार जिताने के लिए 37 वोट चाहिए। इस हिसाब से राजग की अगुवाई वाली भाजपा के पास सात उम्मीदारों को जिताने के लिए जरूरी मत से 29 ज्यादा हैं, मगर यह आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी संख्या से 8 कम हैं।
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इसी महीने के अंतिम सप्ताह में 15 राज्यों की राज्यसभा की 56 सीटों पर होने वाले चुनाव में अतिरिक्त उम्मीदवारों ने चुनावी जंग को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तो कर्नाटक में उसकी सहयोगी जदएस ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश में सपा और कर्नाटक में कांग्रेस को अपना तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए एक वोट कम पड़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि उसे द्वितीय वरीयता के मत का लाभ मिलेगा। विभिन्न राज्यों में दलों के संख्या बल की बात करें तो इन 56 में से 53 सीटों पर उम्मीवारों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय है। चूंकि तीन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार खड़े हैं, ऐसे में इनके भाग्य का फैसला 27 फरवरी को होने वाले मतदान में ही होगा।
यूपी में 10 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। यहां एक उम्मीदवार जिताने के लिए 37 वोट चाहिए। इस हिसाब से राजग की अगुवाई वाली भाजपा के पास सात उम्मीदारों को जिताने के लिए जरूरी मत से 29 ज्यादा हैं, मगर यह आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी संख्या से 8 कम हैं। सपा और कांग्रेस को मिलाकर 110 सदस्य हैं, जबकि तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को 111 मत चाहिए।
हिमाचल में भी खेल
हिमाचल की इकलौती सीट के लिए कांग्रेस के पास अतिरिक्त आठ मत हैं। बावजूद इसके भाजपा ने पूर्व सीएम वीरभद्र के करीबी हर्ष महाजन को मैदान में उतारा है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस में कभी गहरी पैठ रखने वाले महाजन कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी के खिलाफ पार्टी के विधायकों के एक वर्ग को अपने साथ जोड़ सकते हैं।
कर्नाटक में भी यूपी जैसी स्थिति राज्य की जिन चार सीटों पर चुनाव होना है, उसमें अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए कांग्रेस के पास एक वोट कम है। यहां भाजपा और जदएस ने मिलकर चौथी सीट के लिए वोक्कालिंगा बिरादरी के कुपेंद्रस्वामी को मैदान में उतार दिया है। यहां भी पार्टी की कोशिश कांग्रेस के तीसरे उम्मीदार को प्रथम वरीयता मत के आधार पर चुनाव नहीं जीतने देने की है।