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Northeast: पूर्वोत्तर राज्यों में लैंड गवर्नेंस के लिए टास्क फोर्स का होगा गठन, केंद्रीय मंत्रालय ने की पुष्टि

Wed, 10 May 2023 03:35 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 10 May 2023 03:35 PM IST
सार

असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय राज्यों में प्रादेशिक और स्वायत्त जिला परिषदों ने माना कि क्षेत्र में विकास के लिए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण आवश्यक है।

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Union Rural Development Ministry said to set up task force for land governance in North-Eastern states
पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि शासन के लिए टास्क फोर्स का होगा गठन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में लैंड गवर्नेंस (Land Governance) के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। असम के गुवाहाटी में तीन से चार मई को आयोजित "पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि शासन" पर हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया।

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असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय राज्यों में प्रादेशिक और स्वायत्त जिला परिषदों ने माना कि क्षेत्र में विकास के लिए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण आवश्यक है। इस तरह के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में विचार-विमर्श में वर्तमान राज्य प्रथाओं और भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, भूमि शासन मूल्यांकन ढांचे और प्रथागत और स्वदेशी कानूनों, भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण में वर्तमान प्रथाओं और नई पहल और भारत में सर्वेक्षण की भूमिका पर पर सत्र शामिल था।
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बोडोलैंड भूमि नीति तैयार की जा रही
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हालांकि, असम के बाकी हिस्सों में भू-अभिलेखों और नक्शों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण की पहल ने अच्छी प्रगति दिखाई है, लेकिन यह देखा गया कि बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद और दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद के तहत आने वाले क्षेत्रों में गंभीर अंतर हैं। बोडोलैंड भूमि नीति तैयार की जा रही है और शीघ्र ही इसे अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
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कार्बी आंगलोंग क्षेत्रों में सर्वेक्षण और निपटान नहीं किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि दीमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद ने असम भूमि नियमन अधिनियम को अपनाया है, लेकिन भूमि के बड़े हिस्से में गैर-कैडस्ट्राल क्षेत्र है और आवश्यकता महसूस की गई कि इन क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जाए। बयान में कहा गया है कि त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त परिषद में छठी अनुसूची और 10 प्रथागत कानूनों के तहत आठ जिले और लगभग 10,000 वर्ग किमी हैं। छठी अनुसूची के लाई स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्रों में, क्षेत्रों के सर्वेक्षण / पुनर्सर्वेक्षण के लिए एक आवश्यकता महसूस की गई है।


भूमि संसाधन विभाग के सचिव अजय तिर्की ने कहा कि उन्हें लगा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न स्वायत्त जिला परिषदों की आवश्यकता उनके भूमि रिकॉर्ड को डिजिटाइज और आधुनिक बनाने की है, यह आगे बढ़ने का एक तरीका है। संवैधानिक ढांचे और स्थापित कानूनों के भीतर परिषदों का समर्थन करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। बयान में कहा गया है कि इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के लिए एक प्रस्ताव रखा था और भूमि संसाधन विभाग ने इसे विधिवत मंजूरी दे दी थी।

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