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किसी भी पोल्ट्री फार्म में अब तक नहीं आया बर्ड फ्लू का कोई केस, इस बार पांच साल में सबसे कम हैं मामले
Thu, 07 Jan 2021 08:34 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 07 Jan 2021 08:34 PM IST
सार
केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री संजीव बालियान ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि बर्ड फ्लू (इम्यून इंफ्लुएंजा) का पहला केस 2006 में भारत में आया था। 2015 से अब तक हर वर्ष इसके केस देश के कुछ राज्यों में देखने को मिलते रहे हैं...
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बत्तखों में बर्ड फ्लू की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी
- फोटो : PTI
विस्तार
कोरोना संक्रमण के बीच अब देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है। बर्ड फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी भी कर दिया है। वहीं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम भी तैयार किया गया है। अफसरों की टीम राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर नजरे बनाए हुए है।
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हालांकि पशुपालन मंत्रालय में अब तक देश के किसी भी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू होने का कोई केस रजिस्टर्ड नहीं हुआ है। वहीं बीते पांच वर्षों में अब तक सबसे कम मामले बर्ड फ्लू के देखने को मिल रहे हैं।
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पशुपालन मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, 2015 में केरल, यूपी, तेलगांना, मणिपुर में बर्ड फ्लू से 85 हजार 775 पक्षियों की मौत हुई थी। इसी प्रकार 2016 में त्रिपुरा, कर्नाटक, दिल्ली, मध्यप्रदेश, केरल, पंजाब, हरियाणा में 85 हजार 819 पक्षियों की मौत हुई थी। 2017 में गुजरात, ओडिशा और दमन में पक्षियों की 2113 मौतों के मामले सामने आए थे।
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2018 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक, ओडिशा, यूपी और बिहार में 13 हजार 308 पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू से हुई थी। 2019 में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 5 हजार 902 पक्षियों की इस बीमारी से मारे गए थे।
वर्ष 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक ओडिशा, केरल, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड में 6541 पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू से हुई है। जो बीते पांच वर्ष की तुलना में सबसे कम है।
केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री संजीव बालियान ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि बर्ड फ्लू (इम्यून इंफ्लुएंजा) का पहला केस 2006 में भारत में आया था। 2015 से अब तक हर वर्ष इसके केस देश के कुछ राज्यों में देखने को मिलते रहे हैं। नियत्रंण करने पर 15 से 20 दिनों के अंदर ये मामले खत्म भी जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस साल जो केस आ रहे हैं। उन्हें लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं हैं। केरल में कुछ जगह बत्तख और राजस्थान में कौओं की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। हरियाणा में अभी तक कोई केस सामने नहीं आया है। अभी देश के सभी राज्यों में इसका फैलाव नहीं हुआ है। राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे पूरी सतर्कता के साथ इस पर तेजी से काम करें।
बालियान ने आगे कहा, सभी राज्यों से कहा कि जिस भी पक्षी में बर्ड फ्लू के लक्षण हों उसकी तुरंत सैंपलिंग हो। फ्लू होने की स्थिति में तुरंत डिस्पोजल किया जाए। बर्ड फ्लू के लिए हर वर्ष राज्यों को एडवाइजरी जारी करते हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में विदेश से प्रवासी पक्षी हर वर्ष भारत के कई राज्यों में आते हैं। इन्हें आने के लिए किसी तरह के वीजा की जरूरत नहीं होती है। हम इन्हें आने से रोक भी नहीं सकते हैं। जिसके कारण फ्लू होने का खतरा बढ़ जाता है। जिन-जिन स्थानों पर विदेशी पक्षियों का आना होता है। वहां हमने राज्य सरकारों से कहा है कि ऐसी जगहों को चिन्हित करें। वहां सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाएं ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं हो।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 2006 से आजतक मनुष्य में बर्ड फ्लू होने का कोई केस भारत में नहीं आया है। लोगों में ये नहीं फैले इसके लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय भी काम कर रहा है। वह लोगों को सतर्क कर रहा है। अगर लोग चिकन और अंडा भी उबाल कर प्रयोग करते हैं तो ये वायरस पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। अभी तक देश की किसी भी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू होने का केस सामने नहीं आया है। सिर्फ में केरल में बत्तखों में आया है। इसके चलते वहां आसपास के इलाकों में इन्हें नष्ट करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान के बारां, कोटा और झालावार में कौओं में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट है। मध्यप्रदेश के मंदसौर, इंदौर और मालवा में भी कौओं में ही बर्ड फ्लू की रिपोर्ट है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में प्रवासी पक्षियों में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट है। दक्षिण भारत स्थित केरल के कोट्टायम और आलापुझा में चार जगहों पर पोल्ट्री डक यानी घरेलू बत्तख में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट है।