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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले: 1960 के दशक से सरकारी नौकरियों में हो रही हैं लेटरल इंट्री के जरिए नियुक्तियां
Fri, 15 Oct 2021 09:10 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 15 Oct 2021 09:10 PM IST
सार
सरकारी नौकरियों में लेटरल इंट्री को लेकर केंद्री मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि यह 1960 के दशक से होता आ रहा है।
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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी नौकरियों में 'लेटरल इंट्री' 1960 के दशक से होती रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य नई प्रतिभाओं को सामने लाना और मानव संसाधन की उपलब्धता को बढ़ाना है। 'लेटरल इंट्री' निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की सरकार में नियुक्ति को कहा जाता है।
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जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से लेटरल इंट्री भर्तियां संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की उचित चयन प्रक्रिया के माध्यम से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसकी चयन प्रक्रिया को संस्थागत बनाने और अधिक उद्देश्यपूर्ण बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।
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हाल ही में सरकार में संयुक्त सचिवों और निदेशकों के पदों पर 31 उम्मीदवारों की लेटरल भर्ती की सिफारिश की गई है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि सबसे उल्लेखनीय लेटरल इंट्री नियुक्ति 1972 में मनमोहन सिंह को मुख्य आर्थिक सलाहकार और 1976 में वित्त मंत्रालय में सचिव बनाकर हुई थी, जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं।
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