Jharkhand: झारखंड के चुनावी रण में उतरेगी HAM, जीतनराम मांझी ने 10 सीटों पर ठोंका दावा; बढ़ेगी NDA की मुश्किल?
Jharkhand: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को कहा कि एनडीए की सहयोगी उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में कम से कम 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
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मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री और पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने झारखंड के चुनावों में 10 सीटों पर लड़ने का दावा ठोंका है। हालांकि, बिहार के पूर्व सीएम ने एनडीए के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। गठबंधन के अंदर रहकर उन्होंने चुनाव लड़ने की बात कही है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को कहा कि एनडीए की सहयोगी उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में कम से कम 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि, वह भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर किए गए किसी भी सीट-बंटवारे की व्यवस्था का पालन करेंगे।
उन्होंने कहा, हम निश्चित रूप से झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
10 सीटों पर चुनाव लड़ने के इरादे की पुष्टि की
इससे पहले चतरा में एक रैली के दौरान उन्होंने कम से कम 10 सीटों पर चुनाव लड़ने के इरादे की पुष्टि की थी। मांझी ने कहा कि, हम एनडीए का हिस्सा हैं... झारखंड में अन्य गठबंधन सहयोगियों के साथ परामर्श के बाद जो भी सीट-बंटवारे की व्यवस्था की जाएगी, मैं उसे स्वीकार करूंगा। लेकिन हम झारखंड विधानसभा चुनाव लड़ेंगे; यह बिल्कुल स्पष्ट है।
हम (एस) के संस्थापक जीतन राम मांझी अपने दलित समर्थक एजेंडे के लिए जाने जाते हैं। मुसहर दलित जीतन राम मांझी 2024 में गया लोकसभा क्षेत्र निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले, उन्होंने 2014 में जेडी(यू) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे और 2019 में, उन्होंने एचएएम (एस) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जिसमें जेडी(यू) से 150,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए।
2014 में आया जीतन राम मांझी के जीवन का सबसे निर्णायक मोड़
जीतन राम मांझी के जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ 2014 में आया। जब नीतीश कुमार ने मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। उस वर्ष लोकसभा चुनावों में महत्वपूर्ण हार के बाद नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें अस्थायी रूप से पद संभालने का काम सौंपा गया था। मुख्यमंत्री बनने से पहले मांझी ने नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के पद पर थे। 1996 से 2005 तक मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के अधीन राजद सरकार में भी मंत्री रहे।
अपने पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान मांझी कई राजनीतिक दलों से जुड़े। जिनमें कांग्रेस (1980-1990), जनता दल (1990-1996), राष्ट्रीय जनता दल (1996-2005) और जेडी(यू) (2005-2015) शामिल हैं। बाद में उन्होंने नीतीश कुमार से अलग होकर नई पार्टी बना ली थी।
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