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चेतावनी : यूनिसेफ ने कहा- कोरोना महामारी का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
Thu, 27 May 2021 06:26 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 27 May 2021 06:26 AM IST
सार
- समय रहते यदि कदम नहीं उठाए गए तो बिगड़ सकते हैं हालात
- सरकार के मुताबिक दूसरी लहर में 577 बच्चे हुए अनाथ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ) ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशियाई देशों में बढ़ते कोरोना संक्रमण का असर यहां रहने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
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यूनिसेफ ने कहा है कि कोरोना के चलते पूरी दुनिया इस तरह के हालतों से पहली बार सामना कर रही है। लिहाजा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो हालात बिगड़ सकते हैं।
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यूनिसेफ के मुताबिक अस्पतालों के बाहर कतारें लगी हैं, परिजन उपचार के लिए बाट जोह रहे हैं, कई बच्चों ने अपने एक अभिभावक या दोनों अभिभावकों को खो दिया है। अनाथ हुए बच्चों के सामने एकाएक आए हालत से निपटने में असमंजसता दिख रही है।
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दक्षिण एशियाई देशों की आबादी करीब दो अरब है और दुनिया के बच्चों की कुल आबादी का एक चौथाई यहीं निवास करता है। यूनिसेफ के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक जार्ज लारेया अडजेई ने कहा दक्षिण एशियाई देशों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के मुकाबले संक्रमण के मामले कहीं ज्यादा है।
यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भूटान में भी कोरोना संक्रमण के हालात बिगड़ सकते हैं। उन्होने दुनिया के देशों से दक्षिण एशियाई देशों के लिए मदद के हाथ बढ़ाने की अपील की है।
जॉर्ज लारेया ने कहा संगठन प्रभावित देशों में जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति के लिए जुटा हुआ है। कुछ देशों में वैक्सीन का एक डोज भी नहीं पहुंचने पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। उन्होंने सक्षम देशों से अपील की है कि वह वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक देकर लोगों के जीवन को बचाने के लिए आगे आएं।
दूसरी लहर में 577 बच्चे हुए अनाथ : स्मृति ईरानी
केंद्रीय महिला एवं विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते 1 अप्रैल से 25 मई तक 577 बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया है। उन्होंने राज्यों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए यह बात कही।
ईरानी ने कहा केंद्र सरकार इन बच्चों की हर तरह से देखभाल और संरक्षण में सक्षम है, जिन्होंने इस आपदा में अपने दोनों अभिभावकों को खो दिया है। सोशल मीडिया पर अनाथ हुए बच्चों के बारे में जानकारी को साझा करते हुए कहा कि वह आश्वस्त कर देना चाहती हैं कि यह सभी बच्चे सतत निगरानी में हैं, और जिला प्रशासन द्वारा उनका संरक्षण किया जा रहा है।
इन बच्चों की देखभाल में किसी तरह से धन की कमी आड़े नहीं आएगी। इसके लिए सरकार के पास धन समेत संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा इन बच्चों को लेकर केंद्र राज्यों और संबधित जिलों के संपर्क में है। इन बच्चों की देखभाल को लेकर मंत्रालय ने हाल ही में यूनिसेफ समेत सभी हित धारकों के साथ बैठक भी की है।