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राकेश अस्थाना केस मामले में सीबीआई को अपने वकीलों पर भरोसा न होना दुर्भाग्यपूर्ण : हाईकोर्ट
Fri, 29 Mar 2019 03:03 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 29 Mar 2019 03:03 AM IST
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Rakesh Asthana (File Photo)
- फोटो : PTI
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि जांच एजेंसी यदि अपने ही वकीलों को स्टेटस रिपोर्ट नहीं दिखा रही है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीबीआई को अपने वकीलों पर ही भरोसा न होना क्या दिखाता है। एजेंसी ने पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना समेत तीन पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पूरी करने के लिए छह माह का समय मांगा है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि अगर सीबीआई को अपने वकीलों पर ही भरोसा नहीं है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीबीआई के वकीलों को ही उसकी स्टेटस रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। अगर एजेंसी के वकील ही इस रिपोर्ट को नहीं पढ़ सकते तो कोर्ट को इसे क्यों पढ़ना चाहिए। सीबीआई की ओर से पेश एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह रिपोर्ट किसी को नहीं दिखाई गई है। कोर्ट ने इस तथ्य को मानने से इनकार कर दिया।
सीबीआई ने राकेश अस्थाना, डीएसपी देवेंद्र कुमार व बिचौलिया मनोज प्रसाद के खिलाफ जांच पूरी करने के लिए और समय देने का आवेदन दिया था। एजेंसी ने सीलबंद लिफाफे में जांच पर प्रगति रिपोर्ट बुधवार को पेश की थी। एजेंसी ने बृहस्पतिवार को कोर्ट को बताया कि जांच पूरी करने के लिए उसे छह माह का समय लगेगा। इस मामले की सुनवाई 4 अप्रैल को होगी।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कहा कि अगर सीबीआई को अपने वकीलों पर ही भरोसा नहीं है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीबीआई के वकीलों को ही उसकी स्टेटस रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। अगर एजेंसी के वकील ही इस रिपोर्ट को नहीं पढ़ सकते तो कोर्ट को इसे क्यों पढ़ना चाहिए। सीबीआई की ओर से पेश एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह रिपोर्ट किसी को नहीं दिखाई गई है। कोर्ट ने इस तथ्य को मानने से इनकार कर दिया।
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सीबीआई ने राकेश अस्थाना, डीएसपी देवेंद्र कुमार व बिचौलिया मनोज प्रसाद के खिलाफ जांच पूरी करने के लिए और समय देने का आवेदन दिया था। एजेंसी ने सीलबंद लिफाफे में जांच पर प्रगति रिपोर्ट बुधवार को पेश की थी। एजेंसी ने बृहस्पतिवार को कोर्ट को बताया कि जांच पूरी करने के लिए उसे छह माह का समय लगेगा। इस मामले की सुनवाई 4 अप्रैल को होगी।
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