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Politics: '1 जुलाई के बाद 18 साल के हो रहे युवाओं को मतदान के अधिकार से वंचित कर रहा आयोग'; ECI पर बरसे उद्धव

Mon, 03 Nov 2025 04:25 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 03 Nov 2025 04:25 PM IST
सार

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार 'जेन जेड' से डरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि एक जुलाई के बाद 18 साल की उम्र पूरी करने वालों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि चुनाव आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता पात्रता के लिए एक जुलाई की कट-ऑफ तिथि तय की है।

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Uddhav Thackeray says Local body polls after cleaning up of voters list; refutes appeasement politics charge
उद्धव ठाकरे, शिवसेना यूबीटी प्रमुख - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनाव से पहले आरोप प्रत्यारोप का दौर हर दिन तेज होता जा रहा है। जहां एक ओर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार ने ठाकरे बंधुओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं, दूसरी ओर पूर्व सीएम और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एससीआर को लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव मतदाता सूची की सफाई के बाद ही कराए जाने चाहिए।

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केंद्र सरकार जेन जेड से डरी हुई है- ठाकरे
सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए ठाकरे ने एक-एक कर सत्ता पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार 'जेन जेड' से डरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि एक जुलाई के बाद 18 साल की उम्र पूरी करने वालों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि चुनाव आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता पात्रता के लिए एक जुलाई की कट-ऑफ तिथि तय की है।
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तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप को खारिज किया
इस दौरान उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के संबंध में सत्तारूढ़ भाजपा के तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप को भी खारिज कर । ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में डुप्लिकेट और फर्जी नामों सहित अन्य खामियों को सुधारना चाहिए। न तो शिवसेना (यूबीटी) और न ही किसी अन्य विपक्षी दल ने किसी भी फर्जी मतदाता का धर्म के आधार पर उल्लेख किया है। हम चुनावों का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि मतदाता सूची साफ होने के बाद ही चुनाव हों।
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नागरिकों से की यह अपील
साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने निकटतम शिवसेना (यूबीटी)  के स्थानीय कार्यालय में जाएं और यह सत्यापित करें कि क्या उनके नाम सही ढंग से सूचीबद्ध हैं और क्या कोई त्रुटि या छूट हुई है। ताकि हमें पता चल सके कि कितने युवा मताधिकार से वंचित हैं।

भाजपा का ठाकरे बंधुओं पर पलटवार
अब सत्ताधारी भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं और आगामी निकाय चुनाव के लिए सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाने की साजिश रच रहे हैं। महाराष्ट्र में बीएमसी समेत राज्यभर के निकायों में जनवरी 2026 तक चुनाव होने हैं। शेलार ने आरोप लगाया कि 'ठाकरे बंधु और महा विकास अघाड़ी के नेता पाप कर रहे हैं, वे बिहारियों से नफरत करने के साथ ही अपने ही मराठी लोगों को भी निशाना बना रहे हैं।' 

'तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे ठाकरे बंधु'
शेलार ने कहा कि 'वे हमारा राजनीतिक रूप से विरोध कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए। वे हिंदू मतदाताओं की कथित कई एंट्री पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन ऐसा करके वे हिंदू मुस्लिम बंटवारे के बीज बो रहे हैं। उन्होंने अन्य समुदाय के मतदाताओं के नामों का जिक्र क्यों नहीं किया? हम इसका जवाब चाहते हैं।' शेलार ने कहा कि 'क्यों मराठी लोगों पर ही मतदाता सूची में फर्जी एंट्री के आरोप लगाए जा रहे हैं? एनसीपी एसपी विधायक रोहित पवार द्वारा करजत जमखेड विधानसभा में फर्जी एंट्री के आरोप लगाए गए, लेकिन उसी लिस्ट में इमरान कादर और तबस्सुम अब्दुल मुलानी के नाम की भी डबल एंट्री हैं, लेकिन ये राज ठाकरे को क्यों नहीं दिखाई दी और उन्हें सिर्फ मराठी लोगों के नाम ही क्यों दिखे?' आशीष सेलार ने कहा कि 'मुस्लिम और अन्य समुदाय के लोगों के नामों की भी कई एंट्रीज हैं, लेकिन सिर्फ हिंदू, दलित, मराठी लोगों की ही बात की जा रही है।'


गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को 31 जनवरी, 2026 तक राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया है। वहीं, चुनाव आयोग ने बीते दिनों महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराने का फैसला किया था। विपक्ष द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। हाल ही में महा विकास अघाड़ी ने इसके खिलाफ मोर्चा भी निकाला और चुनाव आयोग पर भाजपा की मदद करने के आरोप लगाए। 

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