सीएए के समर्थन पर उद्धव को कांग्रेस की नसीहत- कानून को ठीक से समझें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Sat, 22 Feb 2020 09:25 PM IST

सार

  • मनीष तिवारी बोले, नियमों को पढ़ें तब समझ आएगा एनपीआर-एनआरसी में संबंध
  • शिवसेना और उसके नए सहयोगी के बीच मतभेद एक बार फिर दिखाई दिए
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी - फोटो : ANI
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विस्तार

एनडीए से अलग हो महाराष्ट्र में कांग्रेस संग सरकार बनानी वाली शिवसेना और उसके नए सहयोगी के बीच मतभेद एक बार फिर दिखाई दिए। उद्धव ठाकरे के सीएए का समर्थन करने के बाद कांग्रेस ने उन्हें नागरिकता कानून को बारीकी से पढ़ने और इस पर अपनी समझ बढ़ाने की नसीहत दी है।  
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कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, जब उद्धव पूरे कानून को ध्यान से पढ़ेंगे तब उन्हें समझ आएगा कि एनपीआर और एनआरसी में बहुत फर्क नहीं है। एक बार आप एनपीआर पर सहमत हुए तो एनआरसी को नहीं रोक पाएंगे। सीएए पर तिवारी ने कहा, सरकार को संविधान के अनुसार इसके प्रारूप में परिवर्तन करने होेंगे। संविधान में स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती। दरअसल, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को पीएम मोदी और कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। उद्धव ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति को सीएए से डरने की जरूरत नहीं है।


कांग्रेस प्रवक्ता तिवारी ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को संशोधित नागरिकता नियम-2003 के बारे में फिर से जानकारी लेने की जरूरत है, जिससे वह यह समझ पाएं कि कैसे एनपीआर ही एनआरसी की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि एक बार जब आप एनपीआर करते हैं तो फिर एनआरसी को नहीं रोक सकते। सीएए पर भारतीय संविधान के स्वरूप से फिर से अवगत होने की जरूरत है कि धर्म नागरिकता का आधार नहीं हो सकता।

उधर, महाराष्ट्र के बीड जिले के पाथरूड गांव ने सीएए और एनआरसी के विरोध में एक प्रस्ताव पारित किया है। मजलगांव तहसील स्थित पाथरूड ग्राम पंचायत ने दो फरवरी को एक बैठक में यह प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव की प्रति सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें कहा गया कि सीएए और एनआरसी को लेकर समाज में भ्रम फैला हुआ है। इस गांव में सभी भारतीय हैं, लेकिन इनके पास राष्ट्रीयता साबित करने का प्रमाण नहीं है। इसलिए यहां सीएए और एनआरसी लागू नहीं किया जा सकता। पाथरूड निवासी एकनाथ मसके के मुताबिक गांव की आबादी 18 हजार है। गांववासी नए नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ हैं। 

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