फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Uddhav Thackeray and Sharad Pawar completed one year term of the Maharashtra government

महाराष्ट्रः ठाकरे-पवार की जोड़ी का कमाल, सरकार ने पूरा किया एक साल का कार्यकाल

Fri, 27 Nov 2020 09:25 PM IST
संजीव कुमार झा सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 27 Nov 2020 09:25 PM IST
विज्ञापन
Uddhav Thackeray and Sharad Pawar completed one year term of the Maharashtra government
शरद पवार और उद्धव ठाकरे - फोटो : पीटीआई

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार शनिवार को अपना एक वर्ष पूरा करने जा रही है। इस सरकार की स्थिरता को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे। अटकलें थी कि ठाकरे सरकार अपना एक साल पूरा नहीं कर पाएगी। लेकिन भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद उद्धव ठाकरे की सत्ता पर पकड़ मजबूत बनी रही। ठाकरे और पवार की जोड़ी ने बेमेल गठबंधन की सरकार चलाने का यह कमाल कर दिखाया।

विज्ञापन

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि महाराष्ट्र में तीन दलों की महाविकास आघाड़ी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने श्रेय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार को जाता है। हालांकि शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन वाली इस सरकार में मनमुटाव की खबरे भी चर्चा में रही हैं।

विज्ञापन


यही नहीं, सहयोगी दलों के बीच समन्वय का अभाव भी रहा है लेकिन अपना-अपना निहित स्वार्थ और राजनीतिक मजबूरी के कारण ठाकरे सरकार पर अब तक आंच नहीं आई। तीन दलों की इस सरकार में एनसीपी सबसे ज्यादा फायदे में रही जबकि कांग्रेस को राजनीतिक स्तर पर इसका नुकसान उठाना पड़ा। बिहार चुनाव इसकी बानगी है। इस गठबंधन से शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाने की चाहत पूरी हुई। लेकिन जिस हिंदुत्ववादी विचारधारा के लिए शिवसेना चर्चित रही है उससे पार्टी को समझौता करना पड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोरोना महामारी के बीच प्राकृतिक आपदाओं ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
देश में महाराष्ट्र कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा। यहां 18 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हुए और 46 हजार 800 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई। इस बीच प्राकृतिक आपदाएं जैसे चक्रवात निसर्ग, पूर्व विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बाढ़ आदि घटनाओं ने ठाकरे सरकार के सामने कड़ी चुनौतियां पेश की।


मुख्यमंत्री घर से बाहर नहीं निकले। इसलिए उन पर घर से काम करने के आरोप लगे।किसानों को मुआवजा, मराठा आरक्षण और लॉकडाऊन में बिजली बिल छूट आदि ऐसे मामले रहे जिसमें ठाकरे सरकार लोकलुभावन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं कर सकी।

पालघर में साधुओं की हत्या और सुशांत सिंह की मौत बनी गले की हड्डी
पालघर में दो साधुओं की पीट-पीटकर हत्या और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला उद्धव ठाकरे के गले की हड्डी बन गई। उनके बेटे पर्यावरण मंत्री आदित्य का नाम सुशांत सिंह आत्महत्या मामले में सामने आया। आदित्य को सुशांत मामले में खींचने की कोशिशें भी हुई।



वहीं, आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किए जाने और अभिनेत्री कंगना रनौत के बांद्रा स्थित बंगले के कुछ हिस्से को शिवसेना नीत बीएमसी द्वारा ढहाए जाने के मामले में ठाकरे को मुंह की खानी पड़ी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed