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मियादी बुखार: इलाज खर्च ने 70 हजार परिवारों को बनाया कर्जदार, देश पर भी पड़ रहा बोझ; हो रहा करोड़ों का नुकसान

Sun, 29 Mar 2026 05:47 AM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 29 Mar 2026 05:47 AM IST
सार

भारत में मियादी बुखार (टाइफाइड) अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि आर्थिक संकट बनता जा रहा है। एक अध्ययन के अनुसार इससे हर साल करीब 12,300 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जिसमें 91% खर्च मरीजों को खुद उठाना पड़ता है। इलाज इतना महंगा है कि 70 हजार से ज्यादा परिवार अपनी आय का 40% से अधिक खर्च कर रहे हैं।

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Typhoid Treatment Costs Push 70000 Families into Debt Burden Mounts on the Nation Causing Losses Worth Crores
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में मियादी बुखार (टाइफाइड) अब सिर्फ एक संक्रामक बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों परिवारों को आर्थिक तबाही की ओर धकेलने वाला गंभीर संकट बनता जा रहा है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन के मुताबिक इस बीमारी के कारण देश को हर साल करीब 12,300 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसमें 91 फीसदी खर्च सीधे मरीजों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है।

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इलाज का बढ़ता बोझ ऐसा है कि 70 हजार से अधिक परिवार कैटास्ट्रॉफिक हेल्थ कॉस्ट की स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां उनकी आय का बड़ा हिस्सा केवल इलाज में खर्च हो रहा है। अध्ययन में स्पष्ट हुआ है कि मियादी बुखार का इलाज कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट में बदल चुका है। कैटास्ट्रॉफिक हेल्थ कॉस्ट का मतलब है कि परिवार अपनी आय का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा इलाज पर खर्च करने को मजबूर हैं। इस स्थिति में उनके लिए भोजन, आवास और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो जाता है।
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क्या कहती है रिपोर्ट, समझिए
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ: साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुआ है, जो इस समस्या की गंभीरता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित करता है। रिपोर्ट के अनुसार मियादी बुखार का सबसे अधिक आर्थिक और स्वास्थ्य प्रभाव 10 साल से कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है। देश में इसके आधे से ज्यादा मामले महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से सामने आते हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र विशेष रूप से ज्यादा प्रभावित हैं। एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेन्स (एएमआर)। टाइफाइड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं तेजी से बेअसर हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रतिरोधक क्षमता के कारण कुल इलाज खर्च का 87 फीसदी हिस्सा बढ़ रहा है।
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2023 के आंकड़े भी चिंताजनक
जनवरी 2026 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार वर्ष 2023 में भारत में मियादी बुखार के 49,30,326 मामले दर्ज किए गए, जबकि 7,850 लोगों की मौत हुई। इन मामलों का करीब 29 फीसदी बोझ दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक पर रहा। पांच से नौ साल के बच्चों में संक्रमण और दवा- प्रतिरोधी मामलों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई, जबकि छह महीने से चार साल तक के बच्चों में अस्पताल में भर्ती और मृत्यु का जोखिम अधिक रहा। पांच साल से कम उम्र के लगभग 3.21 लाख बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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