सीबीआई को लेकर केंद्र सरकार में भी खेमेबाजी, फोन टेपिंग से खुलेंगे कई राज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई प्रकरण को लेकर नौकरशाही ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार में भी जबर्दस्त खेमेबाजी देखने को मिल रही है। पीएमओ, डीओपीटी, सीवीसी और गृह मंत्रालय में सीबीआई प्रकरण पर मंत्रियों और नौकरशाहों की अलग-अलग राय है। केंद्र सरकार के मंत्रियों का समूह, जिसमें गृह मंत्रालय भी शामिल है, इस मसले पर कहीं न कहीं सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के साथ खड़ा होता जान पड़ता है।
सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर एमके सिन्हा, जिनका पिछले दिनों नागपुर तबादला कर दिया गया था, ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई नए खुलासे कर दिए हैं। डीओपीटी से जुड़े एक अधिकारी का दावा है कि सीबीआई प्रकरण में हुई फोन टेपिंग से अभी कई नए राज खुलेंगे। फोन टेपिंग में मंत्री, देश के टॉप नौकरशाह और कई दूसरे नेताओं का नाम कई बार लिया गया है।
सीबीआई प्रकरण पर पीएमओ और एनएसए के अधिकारी भी एकमत नहीं...
एक आला नौकरशाह बताते हैं, सीबीआई प्रकरण पर शुरु से ही केंद्रीय कैबिनेट ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के अधिकारी भी एकमत नहीं हैं। गृह मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय एवं एनडीए के सहयोगी दलों से जुड़े तीन चार मंत्री भी सीबीआई मामले को लेकर सरकार की भूमिका से नाराज बताए गए हैं। यहां तक कि पीएमओ में टॉप लेवल के दो अफसर भी सीबीआई विवाद में अलग राय रखते हैं। पीएमओ में एक पूर्व नौकरशाह ने इस मामले में वर्मा के खिलाफ एक्शन लेने की बात का विरोध किया था। उसी वक़्त, दूसरे नौकरशाह, राकेश अस्थाना के पाले में खड़े हुए नजर आ रहे थे।
सूत्रों का कहना है कि आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने और उनके करीबी अफसरों का दिल्ली से बाहर ट्रांसफर करने की बात पर पीएमओ में ज़बर्दस्त तनातनी रही थी। सीबीआई अधिकारी एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जो बातें रखी हैं, उनसे साफ हो जाता है कि सीबीआई में कथित तौर पर केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य, एनएसए, सीवीसी, डीओपीटी व रॉ का भी हस्तक्षेप रहा है।
दर्जनभर फोन टेपिंग, जिसने कई बड़े लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं...
सीबीआई अधिकारी सिन्हा की याचिका से पता चला है कि जांच एजेंसी के अफसरों की फोन टेपिंग ने कई ऐसे लोगों का नाम उजागर कर दिया है, जो बड़े पैमाने पर सीबीआई के कामकाज को प्रभावित करने में लगे थे। मोईन कुरैशी मामले में भ्रष्टाचार के आरोपी मनोज और सोमेश के साथ जिन लोगों की बातचीत हुई थी, उसमें कथित तौर पर देश के टॉप नौकरशाह, पीएमओ के अफसर और केंद्रीय मंत्रियों का नाम सामने आया है। साथ ही जांच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के बड़े अफसरों की पोल खुलती जा रही है।
अभी तक जो कॉल डिटेल मौजूद हैं, उसमें रॉ के स्पेशल सचिव, सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और पीएमओ व एनएसए के एक अधिकारी का नाम भी सामने आया है। फोन टेपिंग मामलों में यह बात सार्वजनिक हुई है कि मंत्री और दूसरे कई प्रभावशाली अधिकारी किस तरह से सीबीआई को अपनी अंगुली पर नचाते हैं। मोईन कुरैशी मामले में एमके सिन्हा ने तो सीधे तौर पर एक केंद्रीय मंत्री का नाम सामने ला दिया है। सीडीआर रिपोर्ट में कथित रूप से मंत्री पर केस में राहत दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है।
जल्द आ सकती है फोन रिकॉर्डिंग की एक नई फाइल...
सीबीआई प्रकरण से जुड़े एक अघिकारी का दावा है कि अभी तक अदालत या मीडिया के पास जो भी सबूत हैं, उनसे कहीं ज्यादा प्रभावी एक नई फोन रिकॉर्डिंग फाइल जल्द बाहर आ सकती है। इस फाइल की जानकारी सीबीआई में निदेशक स्तर के एक अधिकारी, डीआईजी व दो डीएसपी एवं देश के दो बड़े वकीलों के पास भी है।
इस फाइल में वे सब बातें रिकॉर्ड हैं, जिसमें रॉ, सीबीआई, एनएसए और डीओपीटी के तीन अधिकारी आपस में बातचीत करते हैं। इस बातचीत के दौरान कई ऐसे लोगों का नाम लिया गया है, जो देश में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं। आपसी बातचीत में अफ़सर ये कह रहे हैं कि सरकार में वर्मा और अस्थाना के साथ कौन- कौन है। पीएमओ और एनएसए में किसने अस्थाना का समर्थन किया है।