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पढ़ाई छोड़कर वन्यजीव संरक्षक बने मेघालय के दो युवक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
Updated Mon, 25 Jun 2018 04:15 PM IST
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मेघालय के दो युवकों ने स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर ईस्ट खासी हिल्स जिले के जंगल में लुप्तप्राय वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन सहित जंगल में रहने वाले विभिन्न संकटग्रस्त जानवरों और पक्षियों को बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम शुरू किया है।
किराए पर कैमरा लेकर दोनों हिमा मलाइसोहमत क्षेत्र के जंगल में पक्षियों की तस्वीरें खींचते हैं। इस तरह से वे पक्षियों के संबंध में जानकारी जमा कर रहे हैं। यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा से लगता है। यहां पांच गांव हैं और जंगली क्षेत्र है। इस जंगल में लुप्तप्राय वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाला यह अकेला गोरिल्ला है।
संरक्षणकर्ता बनशिम वानियांग (22) ने बताया कि ये गोरिल्ले शिकारियों का पसंदीदा शिकार हैं। पिछले महीने अज्ञात शिकारियों ने एक ही परिवार के तीन गिब्बन का शिकार किया था। वानियांग के साथ उसके दोस्त वल्लम खारलिंगदोह इस प्रजाति को बचाने की कवायद में जुट गये हैं। इन दोनों ने 11वीं कक्षा से ही स्कूल जाना बंद कर दिया और अब जंगल के भीतर स्थित सुपारी की एक कंपनी में काम करते हैं।
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किराए पर कैमरा लेकर दोनों हिमा मलाइसोहमत क्षेत्र के जंगल में पक्षियों की तस्वीरें खींचते हैं। इस तरह से वे पक्षियों के संबंध में जानकारी जमा कर रहे हैं। यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा से लगता है। यहां पांच गांव हैं और जंगली क्षेत्र है। इस जंगल में लुप्तप्राय वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाला यह अकेला गोरिल्ला है।
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संरक्षणकर्ता बनशिम वानियांग (22) ने बताया कि ये गोरिल्ले शिकारियों का पसंदीदा शिकार हैं। पिछले महीने अज्ञात शिकारियों ने एक ही परिवार के तीन गिब्बन का शिकार किया था। वानियांग के साथ उसके दोस्त वल्लम खारलिंगदोह इस प्रजाति को बचाने की कवायद में जुट गये हैं। इन दोनों ने 11वीं कक्षा से ही स्कूल जाना बंद कर दिया और अब जंगल के भीतर स्थित सुपारी की एक कंपनी में काम करते हैं।
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