फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Two gujarat women designed india's first 3D zebra crossing

गुजरात में बनी पहली थ्रीडी पेंटिंग जेब्रा क्रॉसिंग, पढ़ें पूरा इतिहास

Sat, 12 Mar 2016 09:28 PM IST
Updated Sat, 12 Mar 2016 09:28 PM IST
विज्ञापन
Two gujarat women designed india's first 3D zebra crossing
3D स्ट्रीट पेंटिंग - फोटो : getty

थ्रीडी पेंटिंग, आपकी नजरों को धोखा न दे ऐसा कभी नहीं होता। पेंटिंग की इसी थ्रीडी तकनीक का प्रयोग गुजरात की दो छात्राओं ने किया है। इन छात्राओं ने सड़क पर थ्रीडी पेंटिंग से जेब्रा क्रॉसिंग बनाई है जो किसी भी वाहन चालक को धोखा देकर गाड़ी की गति धीमी करने के लिए मजबूर करती है।

विज्ञापन


छात्राओं (सौम्या पांड्या ठक्कर और शकुंतला पांड्या) के इस अनूठे प्रयोग के लिए लोग सराहना कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, छात्राओं ने थ्री पेंटिंग से जेब्रा क्रॉसिंग पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई है। साधारण जेब्रा क्रॉसिंग की तुलना में थ्रीडी पेंटिंग वाली जेब्रा क्रॉसिंग में ड्राइवरों का ध्यान ज्यादा जाएगा।
विज्ञापन


खुशी की बात यह भी है कि अहमदाबाद के सड़क एवं परिवहन विभाग ने कुछ जगहों पर थ्री पेंटिंग तकनीक का प्रयोग किया है। यह प्रयोग अभी तक सफल रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे जेब्रा क्रॉसिंग अभी स्कूलों दुर्घटना संभावित इलाकों में बनाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन यह इन छात्राओं को यह आइडिया आया कहां से और क्या है थ्रीडी पेंटिंग यह जानने के लिए आगे पढ़ें।

क्या है थ्रीडी स्ट्रीट पेंटिंग?

Two gujarat women designed india's first 3D zebra crossing
3D स्ट्रीट पेंटिंग

थ्रीडी पेंटिंगः 
थ्रीडी पेंटिंग चित्रकारी की एक ऐसी तकनीक है जो चित्र को आभासी रूप से देती है। थ्रीडी पेंटिंग का इस्तेमाल कर अगर किसी चीज का चित्र बनाते हैं तो हमें ऐसा आभास होगा कि सचमुच में वह चीज हमारे सामने है। हालांकि यह एक खास दिशा से देखने में ही ऐसा प्रतीत होता है।

आप धरातल पर तालाब या गड्ढे का चित्र बनाते हैं तो आपको यह एक चित्र नहीं बल्कि सचमुच का गड्ढा नजर आएगा।

थ्रीडी पेंटिंग का इतिहास

माना जाता है कि थ्रीडी पेंटिंग इटली की देन है। 15 शताब्दी के आसपास इटली में थ्रीडी पेंटिंग का चलन शुरू हुआ और फिर धीरे-धीरे 18वीं शताब्दी तक यूरोपीय देशों में फैल गई।

थ्रीडी स्ट्रीट पेंटिंग की भारत में शुरुआत

Two gujarat women designed india's first 3D zebra crossing
3D स्ट्रीट पेंटिंग - फोटो : getty

अगर स्ट्रीट थ्रीडी पेंटिंग की बात की जाए तो पता चलता है कि आधुनिक स्ट्रीट पेंटिंग आविष्कार ब्रिटेन में हुआ है। 1980 में 500 कलाकार अकेले लंदन में मौजूद थे जिनकी आजीविका का साधन सिर्फ थ्रीडी पेंटिंग ही था।

ड्रीडी पेंटिंग के इतिहास में और गहरे जाएं तो पता चलता है कि ब्रिटेन में थ्री पेंटिंग तकनीक से चित्रकारी करने वालों को स्क्रीनइवन कहा जाता था। 1500 ई. के आसपास ये कलाकार रास्तों के किनारे, फुटपाथ आदि पर रंगीन चॉक से चित्र बनाया करते थे। और यहां से गुजरने वाले यात्री का कुछ दान करते थे जिससे उनकी आजीव‌िका चलती थी।

उस वक्त ये कलाकार नैतिकता, राजनीति और मानवाता से जुड़े चित्र बनाया करते थे। 1906 में लंदन में एक पेंटिंग कम्पीटशन का आयोजन हुआ जिसके बाद इस पेंटिंग को व्यापकता और पहचान मिली।

972 में इटली में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीट पेंटिंग कम्टीशन का आयोजन किया गया और तब से स्ट्रीट पेंटिंग यानी सड़क/रास्तों थ्रीडी पेंटिंग बनाने का चलन शुरू हुआ। 

अब थ्रीड़ी पेंटिंग से जुड़े आयोजन चीन, अमेरिका समेत तमाम देशों में हो चुके हैं लेकिन भारत में अभी इसकी शुरुआत ही हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed