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EXCLUSIVE: ऐतिहासिक सर्जरी से सिर जुड़े दो बच्चों को मिला नया जीवन, 125 डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

Mon, 12 Feb 2018 05:18 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Feb 2018 05:18 AM IST
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Two Children found new life after a historical surgery of 3D heads in AIIMS

सिर से जुड़े दो भाइयों को सर्जरी से नया जीवन देकर एम्स के डॉक्टरों ने इतिहास रच दिया है। जुड़वा भाइयों का इस तरह का उपचार दुनिया भर में कौतूहल का विषय बन गया है। ओडिशा के रहने वाले जग्गा और बलिया 25 अक्तूबर, 2017 को मैराथन ऑपरेशन के करीब चार माह बाद स्वस्थ हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस ऑपरेशन के लिए 125 डॉक्टरों की टीम ने दो 3डी सिर पर रोजाना आठ-आठ घंटे की प्रैक्टिस की। इन्हें जल्द ही एम्स से भुवनेश्वर के एम्स या कटक मेडिकल कॉलेज भेजा जा सकता है।

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ऐसा था अमेरिका से आया 3डी सिर

जिस सिर पर डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे थे, वह 3डी प्रिंटिंग युक्त अमेरिकी तकनीक है। इसे बनवाने में एम्स के डॉक्टरों को करीब 10 लाख रुपये और करीब महीने भर का वक्त लगा था। अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स गुडरिज ने जग्गा और बलिया के आकार के दो सिर बनाए थे। इस सिर को देखकर असली-नकली में फर्क करना मुश्किल है। इसमें बाकायदा दोनों भाइयों के सिर की नसें, कपाल, जबड़ा, दांत हर चीज दिखाई देती है। इसी की मदद से डॉक्टरों को पता चला कि ऑपरेशन के दौरान सिर के कौन से भाग की सर्जरी करनी है और कौन सी नस को कहां से जोड़ना है। 
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सबसे जरूरी था बच्चों को बचाना

एम्स के न्यूरो साइंस सेंटर के प्रोफेसर डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि अभी तक इस तरह के कई केस सामने आए, जिन्हें ऑपरेशन थियेटर तक तो ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। यही वजह है कि फरवरी 2017 में जब जग्गा और बलिया पहली बार एम्स आए तो डॉक्टरों के लिए सबसे पहले उनकी जान बचाना जरूरी था। 
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अमेरिका से एक महीने और 10 लाख रुपये में आया था 3डी सिर का मॉडल

छह महीने तक इस केस की स्टडी करने के बाद दो ऑपरेशन (पहला 27 घंटे, दूसरा 19 घंटे) किया गया। 125 डॉक्टरों की टीम में 35 से ज्यादा एम्स के अनुभवी वरिष्ठ और करीब 30 जूनियर डॉक्टर शामिल थे। वे बताते हैं कि इन दोनों बच्चों की हंसी-ठिठौली की आवाजें सुनने के बाद हमारी मेहनत सफल हो गई।


एम्स के निदेशक, डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि इस शानदार ऑपरेशन पर मैं डॉक्टरों को बधाई देता हूं। पूरी टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है, ताकि जग्गा और बलिया को एम्स के इतिहास से जोड़ा जा सके।

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