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अरनब और बरखा के बीच की जंग में आया ट्विस्ट, मशहूर कमेंटेटर ने दिया जवाब

Thu, 28 Jul 2016 01:16 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 01:16 PM IST
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twist came in Barkha and arnab war, the answers given by the famous commentator
दो टीवी पत्रकारों की जंग

टीवी मीडिया के दो वरिष्ठ पत्रकारों के बीच की जंग सोशल मीडिया पर छाई हुई  है। ये लड़ाई एनडीटीवी की मशहूर पत्रकार बरखा दत्त और टाइम्स नाऊ के पत्रकार अरनब गोस्वामी के बीच है।

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बरखा ने 27 जुलाई को ट्विटर पर लिखा ' ‘वो टाइम्‍स नाऊ मीडिया के दमन की बात करता है। वो पत्रकारों पर मामला चलाने की बात करता है। क्या यह पत्रकार है? इस व्यक्ति की तरह मैं इस इंडस्ट्री का हिस्सा होने पर शर्मिंदा हूं।’ 
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बरखा का ये ट्वीट वायरल हो गया। बरखा ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट लिखी। जिसके बाद उनके ट्वीट और फेसबुक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। लोग तरह-तरह की टिप्पणियां करने लगे। इन्हीं सबके बीच जानेमाने क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने बरखा और अरनब को पत्रकारिता का असल मतलब समझा दिया।

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क्यों भड़कीं बरखा दत्त

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आपको बता दें कि अरनब गोस्वामी ने अपने न्यूज ऑवर कार्यक्रम में कुछ पत्रकारों पर निशाना साथा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पक्षधर झूठ धर्मनिरपेक्ष पत्रकारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जिसपर बरखा ने ट्विटर और फेसबुक पर कड़ा जवाब दिया।

अपनी फेसबुक पोस्ट में बरखा ने लिखा कि 'वे पाकिस्तानपरस्त कबूतरों की बात करते हैं लेकिन जम्म-कश्मीर में गठबंधन को लेकर हुए समझौते पर कुछ नहीं बोलते'

बरखा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सवाल उठाया कि वे मोदी की पाकिस्तान की नजदीकी पर वो क्यों खामोश हो जाते हैं। बरखा ने अपनी पोस्ट में उनके लिए चमचागीरी शब्द का इस्तेमाल किया है।

हर्षा ने समझाया पत्रकारिता का मतलब

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हर्षा भोगले

बरखा ने आगे लिखा कि एक पत्रकार सरकार से कह रहा है कि मीडिया के कुछ संस्थानों को बंद रकर देना चाहिए उन्हें आईएसआई का एजेंट बताता है।

वहीं क्रिकेट कमेंटेटर ने इन दोनों की लड़ाई को लेकर फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी है। वो कहते हैं कि न्यूज एक प्रतियोगिता की तरह है आपको हमेशा आगे रहना होता है।

सोशल मीडिया आने के बाद हर कोई पत्रकार बन गया है। जब खबरें बनाने वाला खुद खबर बनने की कोशिश करता है और भड़काऊ व्यवहार करता है तो हम वाकई खतरनाक दौर में पहुंच जाते हैं।

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