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Hindi News ›   India News ›   TVF founder Arunabh Kumar acquitted by Mumbai court in former employee harassment case

Arunabh Kumar: TVF संस्थापक अरुणभ कुमार महिला कर्मी के उत्पीड़न मामले में बरी, FIR में देरी से मिली राहत

Wed, 28 Dec 2022 04:59 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 28 Dec 2022 04:59 PM IST
सार

Arunabh Kumar: मुंबई की अंधेरी पुलिस ने पूर्व महिला कर्मचारी की शिकायत के आधार पर वर्ष 2017 में टीवीएफ के संस्थापक अरुणभ कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। 

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TVF founder Arunabh Kumar acquitted by Mumbai court in former employee harassment case
Court Order - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने द वायरल फीवर (TVF) के संस्थापक अरुणभ कुमार को यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में एफआईआर दर्ज कराने को लेकर संदेह जाहिर किया। अदालत ने गौर किया कि शिकायत द्वेषपूर्ण या व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के कारण दर्ज कराई गई थी।

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बता दें, अंधेरी पुलिस ने एक पूर्व कर्मचारी की शिकायत के आधार पर वर्ष 2017 में टीवीएफ के संस्थापक अरुणभ कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उन पर आईपीसी की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न के कारण) और 509 (महिला अपमान करने का इरादा) लगाई गई थीं।
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घटना के तीन साल बाद शिकायत दर्ज की गई थी
आईआईटी से पासआउट कुमार ने वर्ष 2011 में टीवीएफ की स्थापना की थी। अंधेरी कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एआई शेख ने इस साल सितंबर में कुमार को बरी कर दिया था। लेकिन विस्तृत आदेश हाल ही में उपलब्ध हुआ। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कथित घटना 2014 में हुई थी। घटना के तीन साल बाद शिकायत दर्ज की गई थी, क्योंकि शिकायतकर्ता को सोशल मीडिया पर इसी तरह के आरोप लगाने वाली अन्य महिलाओं के बारे में पता चला था।
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कोर्ट ने की यह टिप्पणी...
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। एफआईआर में भौतिक विसंगति और विरोधाभास है। यहां तक कि प्राथमिकी दर्ज करने में भी देरी हुई है। अदालत ने आगे कहा कि यह भी कहा जा सकता है कि शिकायत अभियुक्त और महिला के बीच व्यवसाय के कारण द्वेष या प्रतिद्वंद्विता के कारण दर्ज कराई गई। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि सभी गवाह अपने हित साधने वाले दिख रहे हैं। सभी आरोपी के उद्योग से जुड़े हैं। इसलिए, अभियोजन पक्ष अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

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