टीवी-सोशल मीडिया: नकारात्मक खबरें बढ़ा रही हैं चिंता का स्तर, कोरोना मरीजों के लिए हो सकती हैं जानलेवा
नकारात्मक खबरों से बढ़ जाता है एंग्जायटी लेवल, इससे धमनियों पर बढ़ जाता है दबाव, जो बन सकता है हार्ट अटैक का कारण, कुछ लक्षणों से इसे पहचानकर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी।
विस्तार
कोरोना के 85 प्रतिशत से ज्यादा मरीज अपने घर पर ही स्वस्थ हो रहे हैं। उन्हें सामान्य देखरेख और कुछ दवाओं की आवश्यकता पड़ रही है। लेकिन इसके बाद भी कोरोना को लेकर टीवी-सोशल मीडिया पर इतनी ज्यादा नकारात्मक खबरें दिखाई-सुनाई जा रही हैं कि इससे कोरोना मरीजों का ‘एंग्जायटी लेवल’ (ANXIETY) बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर या हार्ट के मरीजों में एंग्जायटी का एक स्तर से ज्यादा बढ़ना जानलेवा साबित हो सकता है।
एंग्जायटी बढ़ने से क्या होता है बदलाव
सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर राजीव मेहता ने अमर उजाला को बताया कि हमारे शरीर का विज्ञान यह है कि अचानक किसी विपरीत परिस्थिति के सामने आने पर (जैसे किसी शेर का सामने आ जाना) उसके परिणाम को लेकर हमें तुरंत ‘एंग्जायटी’ (चिंता) होने लगती है। ऐसी विपरीत परिस्थिति से लड़ने के लिए हमें ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है।
हमारा शरीर काम करने के लिए रक्त में उपलब्ध ग्लूकोज से ऊर्जा प्राप्त करता है। विपरीत परिस्थिति में ज्यादा ऊर्जा के लिए ज्यादा ग्लूकोज की जरूरत होती है, इसकी आपूर्ति के लिए शरीर रक्त का प्रवाह भी बढ़ा लेता है जिससे तुरंत हृदय की धड़कन भी बढ़ जाती है।
लेकिन जो लोग डाइबिटीज या हृदय रोग के मरीज होते हैं, उनमें शुगर या हार्ट की धड़कन पहले ही ज्यादा बढ़ी हुई होती है, इसलिए असामान्य स्थिति सामने आने पर जब शरीर ज्यादा ऊर्जा की मांग के लिए और अधिक शुगर प्रवाहित करने लगता है तो रोगी का शरीर इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता है जो कई मामलों में जानलेवा तक साबित हो जाता है।
कैसे पहचानें कि बढ़ रहा एंग्जायटी लेवल
इंडियन एसोसिएसन ऑफ प्राइवेट साइकियेट्री के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर राजीव मेहता के अनुसार किसी विपरीत स्थिति में चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन जब यह चिंता अस्वाभाविक व्यवहार में बदलने लगे तो परिवार के अन्य लोगों या करीबियों को सावधान हो जाना चाहिए।
जैसे भीड़ में जाने से कोरोना फैलने का खतरा बढ़ जाता है, यह हम सभी जानते हैं। लेकिन किसी व्यक्ति के अंदर भीड़ से संक्रमित होने का यही डर इतना ज्यादा बढ़ जाए कि वह वैक्सीन सेंटर पर जाने से भी मना करने लगे तो यह असामान्य व्यवहार बढ़ी एंग्जायटी का संकेत हो सकता है।
बार-बार हाथ धोने जैसी प्रक्रिया को यदि कोई कई बार दोहराना शुरू कर दे, या संक्रमण के डर से लोगों से बिलकुल ही मिलना-जुलना छोड़ दे तो यह भी बढ़ी एंग्जायटी का संकेत हो सकता है। किसी की बातों में घबराहट दिखाई देने लगे तो भी यह एंग्जायटी लेवल के बढ़ने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में देर करना बिलकुल भी सही नहीं है।
ऐसे में क्या करें
डॉ. राजीव मेहता बताते हैं कि ऐसे मरीजों का ईको टेस्ट (हृदय गति की सही स्थिति जानने के लिए) कराना आवश्यक होता है। अगर हृदय गति सामान्य है, लेकिन इसके बाद भी घबराहट हो रही है तो यह बढ़ते एंग्जायटी लेवल का स्पष्ट संकेत है। ऐसे मरीज को तत्काल मानसिक चिकित्सक को दिखाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नकारात्मक सोच वाले लोगों और टीवी या सोशल मीडिया की भड़काऊ नकारात्मक खबरों से दूर रहना चाहिए।
सकारात्मक बात करें
जानकारों का कहना है इस तरह के किसी खतरे से बचे रहने के लिए उन लोगों से संपर्क बढ़ाना चाहिए जिनके मिलने या जिनसे बात करने पर हमें खुशी महसूस होती है। बच्चों के साथ खेलना, मन पसंद भोजन बनाना, खाना, गाना, नाचना, पुस्तकें पढ़ना या रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होना एंग्जायटी लेवल को घटाने में बहुत मददगार साबित होता है।