TTD: तिरुपति की गौशाला में गायों की मौत पर सियासत, चेयरमैन बोले- करवाएंगे ACB जांच; पूर्व सरकार पर मढ़ा दोष
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) गोशाला मंदिर में गायों की मौत पर सियासत तेज हो गई है। इसी बीच टीटीडी के चेयरमैन बीआर नायडू ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से पिछले 5 वर्षों में मंदिर में हुई सभी कथित अनियमितताओं की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग करेंगे।
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आंध्र प्रदेश में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) गोशाला मामले में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है। जहां टीटीडी के चेयरमैन बीआर नायडू ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से पिछले 5 वर्षों में मंदिर में हुई सभी कथित अनियमितताओं की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग करेंगे। यह बयान तब आया है जब वाईएसआरसीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों में टीटीडी गोशाला में 100 से ज्यादा गायों की मौत हुई है।
बता दें कि गोशाला का दौरा करने के बाद नायडू ने आरोपों को झूठा प्रचार बताया। साथ ही इसके लिए पूर्व वाईएसआरसीपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उनके शासन में गायों को ठीक से चारा तक नहीं मिला और ओंगोल में दान में दी गई गायों को बेच दिया गया।
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वाईएसआरसीपी के कार्यकाल के घोटालों की जांच पर जोर
बी. आर. नायडू ने आगे कहा कि अगर कोई जनहित याचिका दायर करता है तो वह उसका स्वागत करेंगे, लेकिन उसमें वाईएसआरसीपी के कार्यकाल के घोटालों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीडीपी सरकार के पिछले 10 महीनों के कार्यकाल में कोई अनियमितता नहीं हुई है।
100 गायों की मौत होने का दावा
मामले में पूर्व टीटीडी चेयरमैन और वाईएसआरसीपी नेता बी. करुणाकर रेड्डी ने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं कि गोशाला में लापरवाही से लगभग 100 गायों की मौत हुई है। उन्होंने सरकार पर गैरजिम्मेदाराना और विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाया। इस बीच, टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी जे. श्यामला राव ने कहा कि 43 गायों की मौत हुई है, जबकि बी. आर. नायडू के अनुसार यह संख्या 22 है। हालांकि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पहले कहा था कि कोई मौत नहीं हुई है।
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गैर-हिंदू कर्मचारियों को तुरंत नहीं हटाएंगे- चेयरमैन
बीआर नायडू ने आगे कहा कि मंदिर प्रशासन में काम कर रहे गैर-हिंदू कर्मचारियों के साथ न्याय किया जाएगा और उन्हें अचानक नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म किसी को भी रातोंरात बाहर निकालने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने बताया कि करीब 200 से ज्यादा गैर-हिंदू कर्मचारियों की पहचान की गई है। पहले चरण में 48 लोगों की लिस्ट तैयार की गई है। इन कर्मचारियों से बातचीत कर यह तय किया जाएगा कि वे गैर-धार्मिक कामों में शिफ्ट होना चाहते हैं या फिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेना चाहेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई कर्मचारी ऐसे हैं जो हिंदू नामों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी असल धार्मिक पहचान कुछ और होती है। ऐसे मामलों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 से 50 ऐसे कर्मचारी पाए गए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की जा रही है।