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CJI: सीजेआई चंद्रचूड़ बोले- नागरिकों की स्वतंत्रता के संरक्षक के तौर पर न्यायपालिका पर विश्वास करें

Sat, 17 Dec 2022 08:22 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गुलाम अहमद Updated Sat, 17 Dec 2022 08:22 PM IST
सार

सीजेआई ने एक चोरी के मामले का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति को 18 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप नहीं किया होता कि हम अपने नागरिकों की स्वतंत्रता के संरक्षक के तौर पर हैं, तो उसे 18 साल जेल में बिताने पड़ते।

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Trust us to be guardians of liberties of our citizens no case is small for court cji dy chandrachud
CJI DY Chandrachud - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को मुंबई में बॉम्बे बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में कहा कि न्यायपालिका नागरिकों की स्वतंत्रता की संरक्षक है। उन्होंने कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया और स्वतंत्रता की सुरक्षा में नागरिकों का विश्वास न्यायपालिका में निहित है।

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साथ ही सीजेआई ने अधिवक्ताओं के जीवन पर प्रकाश डाला, जो नागरिकों की स्वतंत्रता के लिए निडर होकर काम करते हैं। उन्होंने एक चोरी के मामले का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति को 18 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप नहीं किया होता कि हम अपने नागरिकों की स्वतंत्रता के संरक्षक के तौर पर हैं, तो उसे 18 साल जेल में बिताने पड़ते। सीजेआई ने कहा कि वह यह कहना चाहते हैं कि नागरिकों की स्वतंत्रताओं के संरक्षक के तौर पर हम पर विश्वास करें।
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सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि सत्र अदालत ने बिजली उपकरण और चोरी के नौ मामलों में एक अभियुक्त को दो-दो साल की कैद की सजा सुनाई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट के जज यह निर्देश देना भूल गए कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके चलते बिजली की चोरी करने वाले इस व्यक्ति को 18 साल की सजा भुगतनी पड़ती।
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गौरतलब है कि सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के इकराम नाम के व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई की, जिसे बिजली विभाग के उपकरणों और बिजली की चोरी के नौ मामलों में 18 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की बरी करते हुए रिहा करने का आदेश दिया था। अदालत ने सवाल खड़ा किया कि हम यहां क्यों हैं, यदि हम अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते?

सुप्रीम केस के लिए कोई केस छोटा या बड़ा नहीं
पीठ ने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के लिए कोई केस छोटा या बड़ा नहीं है। यदि हम व्यक्तिगत आजादी के मामलों में कार्रवाई नहीं करते और राहत प्रदान नहीं करते तो हम यहां क्यों हैं? शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामले में कार्रवाई नहीं करते हैं तो हम अनुच्छेद 136 (संविधान के तहत राहत देने की विशेष शक्तियां) का उल्लंघन करेंगे।


हापुड़ की कोर्ट ने सुनाई थी नौ मामलों में दो साल की सजा
इकराम को उत्तर प्रदेश के हापुड़ की निचली अदालत ने नौ आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया था और प्रत्येक मामले में जुर्माने के अलावा दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। उसकी सजा का जेल अधिकारियों ने गलत आकलन किया। इस कारण उसकी जेल की कुल सजा 18 साल हो गई। इकराम लगभग तीन साल से जेल में था।

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