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यूपी: मथुरा के जवाहर बाग में कथित सत्याग्रही कर रहे पेड़ से फायरिंग, एसएचओ की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
Updated Fri, 03 Jun 2016 10:26 AM IST
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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जवाहर बाग पर ढाई साल से कब्जा जमाए बैठे लोग गुरुवार को अराजक और हिंसक हो गए। उन्होंने कब्जा हटवाने के लिए पहुंची पुलिस पर गोलियां चलाईं और बम फेंके। गोलीबारी और बमबाजी में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव समेत 12 लोगों की मौत हो गई। इनमें 10 कब्जाधारी भी शामिल हैं। करीब बीस पुलिसकर्मी गोलीबारी और पथराव में घायल हुए हैं। इनमें तीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। बड़ी संख्या में कब्जाधारी भी घायल हैं, जो अस्पताल भर्ती हैं।
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उधर, बाग के भीतर कई और शव पड़े होने की आशंका है। इससे पुलिस भी इनकार नहीं कर रही है। अंधेरा होने के कारण सर्च नहीं हो पा रही है। उधर, पुलिस ने दो सौ से ज्यादा कब्जाधारियों को गिरफ्तार भी किया है। करीब 300 एकड़ में फैले जवाहरबाग में कई जगह आग भी लगी। बताया जा रहा है कि आग बम फेंके जाने से लगी। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मारे गए एसओ संतोष कुमार के आश्रितों को 20 लाख रुपये देने की घोषणा की है।
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मार्च, 2014 से जवाहर बाग पर खुद को सत्याग्रही बताने वाले इन लोगों ने कब्जा जमा रखा था। इन्हें हटाने के प्रयास तभी से हो रहे हैं लेकिन लगातार बढ़ रही भीड़ के आगे सारे प्रयास विफल रहे। इन लोगों ने कई दफा पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हमला भी बोला है। गुरुवार शाम पुलिस ने जवाहर बाग को खाली कराने के लिए आपरेशन शुरू किया। इस दौरान कब्जाधारियों की भीड़ में शामिल युवकों ने पेड़ों पर चढ़कर पुलिस पर बम फेंकने शुरू कर दिए और गोलियां चलाईं। एक गोली थानाध्यक्ष फरह संतोष कुमार के सीने में लगी।
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(फोटो- अमर उजाला ब्यूरो, मथुरा)
संतोष पर बम भी फेंके गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, सिर में गोली लगने से एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की भी अस्पताल में मौत हो गई। करीब बीस अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। इन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मौके से दो सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। कब्जाधारियों की अगुवाई करने वाले रामवृक्ष यादव के भी गोली से घायल होने की सूचना है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
फायरिंग के बाद भारी फोर्स पहुंचते ही बाग में जमा लोगों के पैर उखड़ गए। देर रात तक जवाहर बाग को खाली कराने का ऑपरेशन जारी था। मंडलायुक्त (आगरा) प्रदीप भटनागर ने बताया कि मथुरा की एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है, लेकिन इसके लिए पुलिस विभाग ने बड़ी कुर्बानी दी है। हमें अपने पुलिस कर्मियों पर नाज है। आपरेशन अभी जारी है। इसके अधिक कुछ नहीं बता सकते। मृतक संख्या के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
पूरे जिले की फोर्स के अलावा तीन कंपनी अतिरिक्त फोर्स भी भेज दी गई है। हम घटना पर नजर रखे हुए हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- हरि राम शर्मा, आईजी, कानून व्यवस्था
क्या है जवाहर बाग प्रकरण
एक जनवरी, 2014 को कथित सत्याग्रहियों ने मथुरा स्थित जवाहर बाग में डेरा डाला था। करीब एक हजार लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे थे। वे मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली जंतर-मंतर पर पहुंचने के लिए चले थे। यहां डेरा जमाने के बाद इन लोगों का जवाहर बाग में स्थापित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से विवाद होने लगा। उन्होंने आम, आंवला, बेर सहित अनेक बाग उजाड़ दिए। ठेकेदार के साथ मारपीट की। प्रशासनिक अफसरों ने इस समस्या को सुलझाने कोशिश की तो खुद को सत्याग्रही बताने वालों ने इन पर हमला कर दिया। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई थी। ऐसे कई मामलों में 12 से अधिक रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। अब इनकी संख्या तीन हजार के करीब बताई जाती है।
कौन है रामवृक्ष यादव
कथित सत्याग्रहियों का नेतृत्व रामवृक्ष यादव नाम का व्यक्ति कर रहा है। यह उनके साथ ही मध्यप्रदेश के सागर से दिल्ली के लिए चला था। इसके बारे ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। हां, जब भी प्रशासन से कथित सत्याग्रहियों का टकराव हुआ, रामवृक्ष यादव की ओर से ही बयान जारी किए गए। अभी कुछ दिन पहले जवाहर बाग के सत्याग्रहियों के चंगुल से बचकर आए दो व्यक्तियों ने रामवृक्ष यादव पर खुद को बंधक बनाने का आरोप लगाया था।