दिल्ली: निगमबोध घाट के निचले हिस्से में भी पानी भरा, नहीं हो पा रहा शवदाह
पीने के पानी के लिए साल भर तरसने वाली दिल्ली इस समय बाढ़ की चपेट में है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी तेजी से राजधानी की ओर आ रहा है जिसके कारण यमुना से सटे निचले इलाकों में पानी भर गया है। यमुना इस समय जलस्तर के खतरे के निशान 205.33 मीटर से ऊपर बह रही है। मंगलवार दोपहर तक जलस्तर 206 मीटर से ऊपर हो चुका है। बाढ़ से बचाने के लिए लोगों को निचले इलाकों से बाहर निकालना पड़ा है। पानी बढ़ने का असर दिल्ली के निगमबोध घाट पर भी पड़ा है जो राजधानी का प्रमुख शवदाह गृह है।
यमुना से सटे होने के कारण निगमबोध घाट के निचले हिस्से में भी पानी भर गया है और वहां शवदाह नहीं हो पा रहा है। हालांकि, ऊपर बने आधुनिक घाटों और सीएनजी आधारित शवदाह ग्रहों में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। घाट के एक कर्मचारी के मुताबिक कुछ लोग यमुना नदी के किनारे शवों का अंतिम कर्म करना पसंद करते हैं लेकिन पानी भर जाने के कारण अब वहां शवदाह नहीं हो पा रहा है, जबकि ऊपर बने शवदाह गृहों में शवों को जलाया जा रहा है।
टेंट में पर्याप्त सुविधा
दिल्ली के छह जिले सबसे ज्यादा बाढ़ के कारण प्रभावित होते हैं। इनमें भी यमुना की बाढ़ का सबसे ज्यादा नुकसान ओखला, पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के निचले इलाकों में देखने को मिलता है। सोनिया विहार, शास्त्रीनगर, गांधी नगर और मयूरविहार के इलाकों में अभी से ही पानी भर चुका है। अभी बैराज से और अधिक पानी छोड़े जाने की संभावना है। ऐसे में अनुमान है कि दिल्ली में बाढ़ की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
पूर्वी दिल्ली के गीताकोलोनी क्षेत्र में बने बाढ़ राहत केंद्र के एक अधिकारी के मुताबिक बाढ़ के कारण जितने भी परिवारों के प्रभावित होने की आशंका थी, सबको बाहर निकाल लिया गया है। टेंट में साफ-सफाई से लेकर शौचालय और पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सभी टेंट में सुबह का नाश्ता, दोपहर और शाम का भोजन पहुंचाया जा रहा है। लोगों को मलेरिया या अन्य मच्छरजनित बीमारियों से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। अधिकारीियों के मुताबिक, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और बाढ़ से किसी प्रकार से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
नहीं मिल रहा सहयोग
प्रशासन का कहना है कि स्थानीय लोग अपने आवास छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। रविवार और सोमवार को लोगों को निचले इलाकों से बाहर निकाला गया था, लेकिन अधिकारियों के वापस जाने के बाद लोग दोबारा निचले इलाकों में वापस चले गए। जबकि अधिकारियों के मुताबिक यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ बाढ़ का खतरा और अधिक गम्भीर होता जा रहा है। अधिक पानी छोड़ने के साथ समस्या और गंभीर होगी। रविवार को छोड़ा गया पानी अचानक जलस्तर बढ़ा सकता था जिससे हानि हो सकती है।