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J&K: बेकाबू हुआ 'लश्कर' का मुखौटा, DGP को भेजा हैरान करने वाला तोहफा, घाटी में खौफनाक निशाने पर मुखबिर

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:21 PM IST
सार

गांदरबल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के जेएंडके में सक्रिय समूह 'द रजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है। इस बाबत टीआरएफ की तरफ से एक पोस्टर जारी किया गया है। ये वही संगठन है, जिसने पिछले दिनों आईपीएस नलिन प्रभात, (एपी-1992), जिन्हें जम्मू-कश्मीर का नया डीजीपी नियुक्त किया गया था, उन्हें चेतावनी दी थी।

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TRF went out of control in Jammu and Kashmir, sent threatening message to DGP
कश्मीर घाटी में बेकाबू हुआ टीआरएफ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में रविवार को हुए आतंकवादी हमले में सात लोग मारे गए हैं। मृतकों में एक डॉक्टर और छह मजदूर शामिल हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' का मुखौटा, जिसे द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) कहा जाता है, उसने इस हमले को अंजाम दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत वर्ष यूएपीए के तहत 'टीआरएफ' को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित किया था। वर्तमान में यह आतंकी समूह बेकाबू हो चुका है। घाटी में कई दूसरे आतंकी संगठन, टीआरएफ की मदद कर रहे हैं। ये वही संगठन है, जिसने पिछले दिनों जेएंडके के नए डीजीपी नलित प्रभात को सोशल मीडिया के जरिए एक मैसेज भेजा था। आतंकियों ने अपने संदेश में प्रभात की नियुक्ति को 'नई बोतल में पुरानी शराब' बताया था। आतंकी संगठन ने यह भी कहा था कि उनका कार्यकाल मुश्किलों भरा रहेगा। टीआरएफ, उन्हें समय-समय पर हैरान करने वाले तोहफे भेजता रहेगा। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, घाटी में अब इंटेलिजेंस का खौफनाक खेल चल रहा है। इस खेल में सुरक्षा बल और आतंकी संगठन, दोनों की खुफिया इकाई लगी हैं। इंटेलिजेंस के इस खौफनाक खेल में मुखबिर व प्रवासी श्रमिक ही नहीं, बल्कि 'भगवा' टोली भी निशाने पर है। 

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गांदरबल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के जेएंडके में सक्रिय समूह 'द रजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है। इस बाबत टीआरएफ की तरफ से एक पोस्टर जारी किया गया है। ये वही संगठन है, जिसने पिछले दिनों आईपीएस नलिन प्रभात, (एपी-1992), जिन्हें जम्मू-कश्मीर का नया डीजीपी नियुक्त किया गया था, उन्हें चेतावनी दी थी। प्रभात ने एक अक्तूबर को डीजीपी का कार्यभार संभाला था। जेएंडके में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले समूह, टीआरएफ ने नए डीजीपी नलित प्रभात की नियुक्ति को 'नई बोतल में पुरानी शराब' बताया है। आतंकी संगठन ने यह भी कहा था कि उनका कार्यकाल मुश्किलों भरा रहेगा। टीआरएफ, उन्हें समय-समय पर हैरान करने वाले तोहफे भेजता रहेगा। 
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मैसेज में कहा गया कि हम वादा करते हैं कि वे यानी डीजीपी, अपने कार्यकाल के दौरान ऊंचे पद पर रहेंगे, लेकिन हम उन्हें समय-समय पर हैरान करने वाले तोहफे भेजते रहेंगे। टीआरएफ ने अपने संदेश में कुलगाम एनकाउंटर का भी जिक्र किया है, जिसमें उसके दो सदस्यों को मार गिराया गया। उसके बाद टीआरएफ ने कई जवानों को घायल करने की बात कही है। इनमें जेकेपी के एएसपी 'ऑपरेशन' भी शामिल हैं। नए डीजीपी को दिए अपने संदेश में टीआरएफ ने कहा, जब तक हम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते, रेजिस्टेंस फ्रंट अपनी लड़ाई जारी रखेगा। टीआरएफ के अहमद खालिद ने लिखा, हम इस संघर्ष को किसी गद्दार या सहयोगी के हाथों छीनने नहीं देंगे। टीआरएफ ने जेएंडके में कई बड़े हमलों की जिम्मेदारी ली है। इनमें नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों, पुलिस कर्मियों, पर्यटकों व सुरक्षा बलों पर हमला शामिल है। 
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विश्वस्त सूत्रों का कहना है, जेएंडके में सुरक्षा बलों और आतंकी संगठनों के बीच इंटेलिजेंस का खौफनाक खेल चल रहा है। सुरक्षा बल, मानवीय इंटेलिजेंस के माध्यम से आतंकियों के बारे में सूचनाएं हासिल करने का प्रयास करते हैं। इस कड़ी में सामान्य नागरिक, जिनमें श्रमिक भी आते हैं, शामिल हैं। दूसरी तरफ टीआरएफ जैसे कई आतंकी समूह भी सुरक्षा बलों की मूवमेंट को लेकर जानकारी हासिल करते हैं। इन संगठनों ने भी अपने स्लीपर सेल लगा रखे हैं। ये लोग, सुरक्षा बलों एवं पुलिस की इंटेलिजेंस पर भी नजर रखते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि इनकी पहुंच, सुरक्षा बलों के मुखबिरों तक होती है। यही वजह है कि सुरक्षा बल, मानवीय इंटेलिजेंस को दो-तीन तरीके से क्रॉस चेक करते हैं। पुलिस एवं सुरक्षा बलों का इंटेलिजेंस नेटवर्क भी टनल, जंगल, पहाड़ एवं दूर दराज के क्षेत्रों में रहता है। वहां पर आतंकी भी मजबूत नेटवर्क रखते हैं। वे सुरक्षा बलों के इंटेलिजेंस नेटवर्क में सेंध लगाने का प्रयास करते हैं। सूत्रों के अनुसार, इसी चक्कर में कई बार पुलिस महकमे में टारगेट किलिंग की वारदात होती है। 

जम्मू-कश्मीर में 'द एलीट लिब्रेशन फोर्स' ने एक दिन पहले ही सनसनीखेज खुलासा किया है। शुक्रवार को बिहार के अशोक चौहान को शोपियां जिले में गोली मारी गई। उनकी हत्या के बाद 'द एलीट लिब्रेशन फोर्स' ने चेतावनी वाला एक पत्र जारी कर दिया। इसमें कहा गया कि स्थानीय लोग आरएसएस वर्कर को अपने यहां पर न रखें। जमीन पर काम करने वाले आरएसएस वर्कर को सहन नहीं किया जाएगा। 'द एलीट लिब्रेशन फोर्स' ने लिखा, हमारी इंटेलिजेंस इकाई, कई दिनों से अशोक चौहान की गतिविधियों पर नजर रखे हुई थी। पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद ही इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। हमारा क्लीयर मैसेज है, जम्मू कश्मीर में जो भी आरएसएस वर्कर आएगा, उसे सहन नहीं करेंगे। सभी लोकल लोगों को चेताया गया है कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति को अपने पास न रखें। बाहरी लोगों को चेतावनी देते हुए उक्त संगठन के प्रवक्ता जुनैद अहमद ने कहा, वे जितना जल्द हो सकें, घाटी को छोड़ दें। 

जम्मू-कश्मीर में एनआईए और दूसरी सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के ऑपरेशन में कई तरह के खुलासे हो रहे हैं। आतंकियों को मदद पहुंचाने की नई तरकीब सामने आई है। पंक्चर लगाने वाले और ट्रक चालक, आतंकी गतिविधियों में इनका नाम पहले भी लिया जाता रहा है, लेकिन ये लोग अब एक नई भूमिका में दिखे हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में आतंकियों के पास जो तकनीकी उपकरण मौजूद हैं, सुरक्षा एजेंसियां उन्हें सर्विलांस पर ले रही हैं। उनके संदेश भी पकड़े गए हैं। नतीजा, आतंकियों ने मोबाइल फोन और अन्य दूरसंचार उपकरणों का इस्तेमाल करना कम कर दिया है। अब उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं दूसरे मार्गों पर दस बारह किलोमीटर के दायरे में अपने एजेंट बैठा दिए हैं। टायर पंक्चर लगाने वालों के रूप में बैठे एजेंट उन्हें आगे पीछे के पांच छह घंटे की सिक्योरिटी मूवमेंट बताते रहते हैं। जिस ट्रक में हथियार या गोला बारूद होता है, उसे एक कोड वर्ड मिला होता है। जैसे ही ट्रक चालक, पंक्चर मेकेनिक को वह कोड बताता है, उसे आगे की जानकारी दे देता है। इस नेक्सस का तोड़ निकालने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने मानवीय इंटेलिजेंस की मदद लेनी शुरु की है। 

जेकेपी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आतंकी संगठन अब दोबारा से मोबाइल तकनीक का कम इस्तेमाल करने लगे हैं। 2017 से लेकर 2020 तक मोबाइल सर्विलांस के जरिए कई बड़े आतंकियों का खात्मा किया गया। उसके बाद से आतंकी संगठनों ने संदेश पहुंचाने का अपना तरीका बदल लिया। अब वे रोमिंग सिस्टम के जरिए अपनी बात, स्लीपर सेल या टारगेट तक पहुंचने वाले आतंकी के पास पहुंचाते हैं। सड़क पर टायर पंक्चर लगाने के रूप में उनके एजेंट बैठे हुए हैं। वे ट्रक चालक को आगे का रास्ता बता देते हैं। यह भी बताया जाता है कि अब कितनी दूरी पर उन्हें ठहरना है। अगर बीच राह से कोई ट्रक में चढ़ता है तो वह सूचना ड्राइवर को पहले वाले पंक्चर मेकेनिक से मिलती है। इसका मतलब ये है कि अगर कोई व्यक्ति बीच रास्ते में लिफ्ट लेना चाहे तो ट्रक नहीं रोका जाता। अगले प्वाइंट पर मेकेनिक उसे बताता है कि फलां किलोमीटर पर एक व्यक्ति उनके साथ जाएगा। उसके पास भी कोड वर्ड होता है। 


आतंकी संगठनों की ये चाल, सुरक्षा एजेंसियों के सर्विलांस नेटवर्क को तोड़ने के लिए होती है। अब मानवीय इंटेलिजेंस के जरिए आतंकियों के मददगारों का पता लगाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी सड़क किनारे और जंगलों में अपने जवान लगाए हैं। वे सादे कपड़ों में होते हैं, जिससे किसी को उन पर शक नहीं होता। घाटी में जम्मू कश्मीर पुलिस का अच्छा इंटेलिजेंस नेटवर्क है, ऐसे में सुरक्षा बल, इनकी मदद ले रहे हैं। 

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