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Gujarat Earthquake: गुजरात के कच्छ में भूकंप के झटके, तीव्रता 3.3 मापी गई; फिलहाल किसी नुकसान की खबर नहीं

Mon, 08 Jul 2024 06:06 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 08 Jul 2024 06:06 PM IST
सार

भूकंप के झटके शाम करीब 4:10 बजे दर्ज किए गए। इसका केंद्र 30 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इस महीने राज्य के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में दर्ज किया गया यह 3 तीव्रता से अधिक का तीसरा भूकंप है। 

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Tremor of Over 3 magnitude recorded in Gujarat Kutch no report of damage Latest News Update
भूकंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात के कच्छ जिले में गुरुवार दोपहर 3.3 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। भारतीय भूकंप अनुसंधान के एक अधिकारी ने बताया कि भूकंप का केंद्र कच्छ जिले के दुधई से 10 किलोमीटर पूर्व उत्तर पूर्व (ईएनई) में था। इंडियन सिस्मोलॉजी रिसर्च के मुताबिक, भूकंप के झटके शाम करीब 4:10 बजे दर्ज किए गए। इसका केंद्र 30 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इस महीने राज्य के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में दर्ज किया गया यह 3 तीव्रता से अधिक का तीसरा भूकंप है। 

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अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) के अनुसार, राज्य में भूकंप का खतरा बहुत अधिक है, पिछले 200 वर्षों में नौ बड़े भूकंप आए हैं। जीएसडीएमए ने कहा कि 26 जनवरी, 2001 को कच्छ में आया भूकंप पिछली दो शताब्दियों में देश में तीसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप था। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.9 मापी गई थी। इस भूकंप का केंद्र भचाऊ के पास था, जिसमें 13,800 लोग मारे गए और 1.67 लाख लोग घायल हुए थे।
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क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा। 


कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

कितनी तबाही लाता है भूकंप?

रिक्टर स्केल असर
0 से 1.9 सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9 हल्का कंपन
3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर
4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं और दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9  इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9  इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा  पूरी तबाही, कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।

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