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रोस्टर प्रणाली को जल्द सार्वजनिक करेगा SC, चीफ जस्टिस ने की जजों के साथ चर्चा
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 21 Jan 2018 09:01 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट में संवेदनशील जनहित याचिकाओं को जजों को आवंटित करने में पारदर्शिता लाने के लिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सभी पक्षों की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार किया है। चीफ जस्टिस से जुड़े करीबी सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा, सीबीआई के विशेष जज जस्टिस लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली दो याचिकाओं पर चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ के सुनवाई करने से ही साफ है कि 12 जनवरी की विवादास्पद प्रेस वार्ता में शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठ जजों की ओर से मामलों के आवंटन समेत जो मामले उठाए गए, उन पर विचार किया जा रहा है। लोया मामले में याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होगी।
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सूत्रों के अनुसार, चीफ जस्टिस ने साथी जजों के साथ इस मुद्दे पर बात की है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सुझावों का भी संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में केसों के आवंटन के लिए जल्द ही स्पष्ट रोस्टर प्रणाली आ सकती है।
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एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, मामलों के आवंटन पर चीफ जस्टिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के अपनी वेबसाइट पर डाले जाने की संभावना है। केसों की आवंटन प्रणाली को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि किस श्रेणी के मामलों को कौन सुनेगा।
उधर, संपर्क करने पर एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि बार की ओर से यह मांग की गई थी कि काम के आवंटन के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही प्रणाली को अपनाया जाना चाहिए। विकास सिंह ने कहा, हमें उम्मीद है कि चीफ जस्टिस हमारे सुझावों को स्वीकार करेंगे और चार वरिष्ठ जजों की प्रेस वार्ता के बाद सामने आई सभी तरह की गलतफहमी दूर हो जाएगा।
अहम मामलों को पसंदीदा पीठों में भेज रहे हैं
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक प्रेस वार्ता में कई मुद्दों को उठाया था जिनमें अहम और संवेदनशील जनहित याचिकाओं के आवंटन का मुद्दा भी शामिल था।
जजों ने चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वह अहम मामलों को पसंदीदा पीठों में भेज रहे हैं। लोया केस में सुप्रीम कोर्ट में जो याचिकाएं दायर हैं, उन पर पहले जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करने वाली थी लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया।
वरिष्ठ जजों की वार्ता से नाखुश हैं कई जज
सूत्रों का कहना है कि जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका के संकट को खत्म करने के लिए चीफ जस्टिस से बात की है। ये सभी भविष्य में सीजेआई पद के दावेदार हैं। हालांकि ये जज इस बात से भी नाखुश हैं कि 4 सबसे वरिष्ठ जजों ने प्रेस वार्ता कर अपनी आपत्तियों को सार्वजनिक किया।
सोमवार को चार नाराज जजों से मिल सकते हैं सीजेआई
18 जनवरी के बाद सीजेआई और 4 वरिष्ठ जजों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है क्योंकि जस्टिस चेलमेश्वर दिल्ली से बाहर थे। वह अपने चेन्नई व बंगलूरू के पूर्व निर्धारित दौरे पर थे। सूत्र के अनुसार, ऐसा मुमकिन है कि सोमवार को केसों की सुनवाई से पहले सीजेआई और 4 जज मुलाकात कर सकते हैं।
जजों ने चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वह अहम मामलों को पसंदीदा पीठों में भेज रहे हैं। लोया केस में सुप्रीम कोर्ट में जो याचिकाएं दायर हैं, उन पर पहले जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करने वाली थी लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया।
वरिष्ठ जजों की वार्ता से नाखुश हैं कई जज
सूत्रों का कहना है कि जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका के संकट को खत्म करने के लिए चीफ जस्टिस से बात की है। ये सभी भविष्य में सीजेआई पद के दावेदार हैं। हालांकि ये जज इस बात से भी नाखुश हैं कि 4 सबसे वरिष्ठ जजों ने प्रेस वार्ता कर अपनी आपत्तियों को सार्वजनिक किया।
सोमवार को चार नाराज जजों से मिल सकते हैं सीजेआई
18 जनवरी के बाद सीजेआई और 4 वरिष्ठ जजों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है क्योंकि जस्टिस चेलमेश्वर दिल्ली से बाहर थे। वह अपने चेन्नई व बंगलूरू के पूर्व निर्धारित दौरे पर थे। सूत्र के अनुसार, ऐसा मुमकिन है कि सोमवार को केसों की सुनवाई से पहले सीजेआई और 4 जज मुलाकात कर सकते हैं।