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Train Accident: यात्री सुरक्षा पर तय 1.27 लाख करोड़ रु. का नहीं हो रहा इस्तेमाल, कांग्रेस ने याद दिलाया ये कोष

Mon, 17 Jun 2024 10:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 17 Jun 2024 10:25 PM IST
सार

कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ देश में रेल हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे, वहीं दूसरी तरफ, रेल मंत्री सारी जिम्मेदारियों से दूर रेलवे के खोखले पीआर और रील बनाने में व्यस्त है। 

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Train Accident Congess alleges Centre not using Funds for Passengers Security amid Kanchenjunga Express Train
रेल हादसा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पश्चिम बंगाल और बिहार की सीमा के पास सोमवार को ट्रेन हादसा हुआ है। सियालदाह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) को पीछे से मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कंचनजंगा एक्सप्रेस के तीन डिब्बे बेपटरी हो गए। ये हादसा रंगा पानी और निज बाड़ी के पास हुए हादसे में तीन बोगियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। ट्रेन दुर्घटना में 15 यात्रियों की मौत हो गई है। जबकि 60 लोग घायल हो गए है। हादसे के बाद रेलवे की टीम जांच में जुट गई है। हादसे के बाद भारतीय रेलवे के यात्री सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मार्च 2024 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए 2017 में बनाए गए राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष की राशि का उपयोग अफसर गैर जरूरी कामों में कर रहे हैं।
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कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ देश में रेल हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे, वहीं दूसरी तरफ, रेल मंत्री सारी जिम्मेदारियों से दूर रेलवे के खोखले पीआर और रील बनाने में व्यस्त है। मोदी सरकार में रेलवे की सुरक्षा के लिए दावे और प्लानिंग तो बहुत की गई। लेकिन उसकी आड़ में नेताओं ने और अधिकारियों ने सिर्फ मलाई खाई है। वर्ष 2017 में यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाया गया था। लेकिन इसमें आवंटित फंड का इस्तेमाल अफसर अपनी सुविधाओं पर करते हैं। राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष में पांच वर्ष के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आम आदमी के टैक्स के इन पैसों का इस्तेमाल यात्रियों की सुरक्षा के लिए किया जाना था, लेकिन रेलवे ये पैसा रेलवे के अफसरों पर खर्च हो रहा है।
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सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट एक्स पर कांग्रेस ने 2021 में आई सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रेलवे के इस फंड का इस्तेमाल गैर जरूरी चीजों में हो रहा है। इस फंड का उपयोग रेलवे सुरक्षा के लिए किया जाना था। लेकिन इस फंड को लगातार गैर—जरुरी चीजों पर खर्च किया गया। हर साल यह खर्च बढ़ता भी किया गया। 2017-18 में 463 करोड़, 2018-19 में 837 करोड़ रुपये और 2019-20 में 1004 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस फंड का उपयोग अफसरों की फुट मसाजर, जैकेट, फर्नीचर, महंगी क्रॉकरी, किचन का सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और लैपटॉप जैसी चीजों के लिए खर्च किए गए।  
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हाल ही में रेलवे के फेयर स्ट्रक्चर और आम जनता के लिए सर्विसेज पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने न्यूज एजेंसी से चर्चा करते हुए कहा था कि हम हर साल लगभग 700 करोड़ लोगों को ले जाते हैं। व्यावहारिक रूप से हर दिन लगभग 2.5 करोड़ लोगों को ट्रेन यात्रा का लाभ मिलता है। यदि एक व्यक्ति को ले जाने की लागत 100 रुपये है, तो हम 45 रुपये लेते हैं। इसलिए रेलवे यात्रा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को औसतन 55 फीसदी की छूट देते हैं।


रेलमंत्री के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा पर रेलवे का खास ध्यान है। पिछले 10 वर्षों में यात्रियों की सुरक्षा पर 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है और हर साल लगभग 7000 किलोमीटर की खराब पटरियों को बदला गया है। रेल नेटवर्क पर स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली कवच को लागू किया जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री ने रेलवे के कुल सालाना खर्च का ब्यौरा देते कहा कि पेंशन पर 55,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। रेलवे वेतन पर 97,000 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके साथ ही सोलर बिल पर 40,000 करोड़ रुपये और लीज इंटरेस्ट पेमेंट पर 32,000 करोड़ रुपये खर्च किया जाता है। 12,000 करोड़ रुपये रखरखाव पर खर्च होते हैं। इस तरह सभी खर्च मिलाकर लगभग 2.40 लाख करोड़ रुपये सालाना खर्च हो जाते हैं।
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