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वंदे भारत एक्सप्रेस नाम से जानी जाएगी ट्रेन 18, कानपुर वाया प्रयागराज होकर पहुंचेगी वाराणसी
Sun, 27 Jan 2019 08:52 AM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Sun, 27 Jan 2019 08:52 AM IST
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Train 18
- फोटो : self
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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि ट्रेन 18 अब वंदे भारत एक्सप्रेस के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में बनी है और दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। यह ट्रेन एक उदहारण है कि भारत में भी मेक इन इंडिया के अंतर्गत वर्ल्ड क्लास ट्रेन बन सकती है।
रेल अधिकारियों के मुताबिक इस ट्रेन का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से 40 से 50 फीसदी ज्यादा हो सकता है। अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय कार्यालय से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि बजट के बाद प्रधानमंत्री इस ट्रेन की शुरुआत कर सकते हैं।
इससे पहले रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि ट्रेन 18 दिल्ली से वाराणसी के बीच 755 किमी की दूरी आठ घंटों में पूरी करेगी। यह ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के रास्ते में कानपुर और प्रयागराज में रुकेगी। यह इस रुट की सबसे तेज ट्रेन होगी। अभी वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी जाने में साढ़े ग्यारह घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
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रेल अधिकारी ने बताया कि ट्रेन 18 का किराया शताब्दी के एग्जीक्यूटिव और चेयर क्लास से 40 से 50 फीसदी ज्यादा हो सकता है। एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 2900 रुपये और चेयर कार का किराया 1700 रुपये तक हो सकता है। इस ट्रेन का परिक्षण रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गेनाईजेशन, लखनऊ के देखरेख में किया गया है। इसने 180 किमी की रफ्तार पर सभी परीक्षण को सफलतापूर्वक पार किया।
इस ट्रेन को चेन्नई की इंटरनल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है। ट्रेन की खासियतों की बात करें तो इसमें डिफ्यूज लाइटिंग और ऑटोमेटिक दरवाजे और फुटस्टेप हैं जो ट्रेन के रुकने पर खुद ही खुल जाएंगे। ट्रेन में 52 सीट का एग्जीक्यूटिव कंपार्टमेंट है। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें वाईफाई के अलावा जीपीएस आधारित पेसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम भी है।
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रेल अधिकारियों के मुताबिक इस ट्रेन का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से 40 से 50 फीसदी ज्यादा हो सकता है। अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय कार्यालय से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि बजट के बाद प्रधानमंत्री इस ट्रेन की शुरुआत कर सकते हैं।
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इससे पहले रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि ट्रेन 18 दिल्ली से वाराणसी के बीच 755 किमी की दूरी आठ घंटों में पूरी करेगी। यह ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के रास्ते में कानपुर और प्रयागराज में रुकेगी। यह इस रुट की सबसे तेज ट्रेन होगी। अभी वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी जाने में साढ़े ग्यारह घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
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रेल अधिकारी ने बताया कि ट्रेन 18 का किराया शताब्दी के एग्जीक्यूटिव और चेयर क्लास से 40 से 50 फीसदी ज्यादा हो सकता है। एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 2900 रुपये और चेयर कार का किराया 1700 रुपये तक हो सकता है। इस ट्रेन का परिक्षण रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गेनाईजेशन, लखनऊ के देखरेख में किया गया है। इसने 180 किमी की रफ्तार पर सभी परीक्षण को सफलतापूर्वक पार किया।
इस ट्रेन को चेन्नई की इंटरनल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है। ट्रेन की खासियतों की बात करें तो इसमें डिफ्यूज लाइटिंग और ऑटोमेटिक दरवाजे और फुटस्टेप हैं जो ट्रेन के रुकने पर खुद ही खुल जाएंगे। ट्रेन में 52 सीट का एग्जीक्यूटिव कंपार्टमेंट है। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें वाईफाई के अलावा जीपीएस आधारित पेसेंजर इनफॉर्मेशन सिस्टम भी है।