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मिसाल: भारी बारिश के बीच अकेले संभाल रहा था ट्रैफिक, देखकर प्रभावित हुए डीआईजी ने किया सम्मानित

Wed, 18 Aug 2021 04:57 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 18 Aug 2021 04:57 PM IST
सार

अपने काम को अगर ईमानदारी से किया जाए तो उसका फल जरूर मिलता है। यह साबित हुआ है महाराष्ट्र के शहर नांदेड़ की एक घटना में जहां भारी बारिश के बीच एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी एक व्यस्त जंक्शन पर अकेले ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे ऐसे हालात में भी ड्यूटी करते देखा और फिर कार्य के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए उसे सम्मानित किया गया। 

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Traffic Policeman rewarded after FIG spots him doing duty amit feavy rains at a busy junction in Nanded Maharashtra
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

28 वर्षीय ट्रैफिक पुलिसकर्मी अशोक वाडेवले को एक अच्छी खबर तब मिली जब उन्हें इस काम के लिए विभाग की ओर से 10 हजार रुपये नकद राशि पुरस्कार के तौर पर दी गई। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) निसार तंबोली ने वाडेवले को तब देखा था जब वह नांदेड़ के साठे चौक पर भारी ट्रैफिक अकेले संभाल रहे थे। यह शहर का ऐसा स्थान है जहां पूरे दिन वाहनों की आवाजाही लगी रहती है।

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एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को बताया कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी वाडेवले को विषम परिस्थितियों में भी पूरे समर्पण के साथ ड्यूटी करते देख कर डीआईजी ने सिफारिश की कि उन्हें 10 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। उल्लेखनीय है कि अशोक वाडेवले पुलिस बल में पिछले 28 साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और नांदेड़ की ट्रैफिक ब्रांच के साथ वह साल 2017 से काम कर रहे हैं।
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समाचार एजेंसी पीटीआई ने अनुसार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर वाडेवले ने कहा, 'मुझे पता नहीं था कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे काम करते हुए देखा। सोमवार को मैं साठे चौक पर दोपहर दो बजे से रात नौ बजे तक ड्यूटी पर था। इस चौक पर ट्रैफिक की स्थिति कई बार इतनी गंभीर हो जाती है कि एक आदमी से संभाली नहीं जा सकती है। लेकिन फिर भी मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहा था।'
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डीआईजी ने बुलाया तो परेशान हो गए थे वाडेवले
इसके अगले दिन यानी मंगलवार को डीआईजी ने वाडेवले को अपने कार्यालय में बुलाया। वाडेवले कहते हैं कि जब डीआईजी ने मुझे बुलाया तो मैं चिंतित हो गया था। उन्होंने कहा, 'मैं थोड़ा चिंता में आ गया था, लेकिन कार्यालय पहुंचने के बाद मुझे इसका कारण पता चला और तब मुझे राहत मिली। मैं हमेशा अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ करता हूं।' इस पहल से उम्मीद है बाकी कर्मचारी भी प्रेरित होंगे। 

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