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Traffic Jam: बारिश में कैसे संभले ट्रैफिक जाम, मोबाइल की ताकत और बेहतर प्रशिक्षण से बनेगी बात
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ट्रैफिक जाम की समस्या।
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
आजकल भारी बारिश में लंबे-लंबे ट्रैफिक जाम पूरी दुनिया की समस्या बन गए हैं। थोड़ी सी भारी बारिश में सड़कों पर जलभराव हो जाता है, इसमें गाड़ियां फंस जाती हैं और लोग जाम में फंस जाते हैं। गुरुग्राम सहित दुनिया के अनेक शहरों में कई बार ऐसी स्थिति बनी है, जब लोग भारी बारिश के कारण कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम में फंस गए और पूरी रात उन्हें अपनी कार में ही गुजारनी पड़ी। बुधवार रात को हुई बारिश के बाद भी पूरी दिल्ली में लोगों को भारी जाम से जूझना पड़ा। लोग लंबे जाम से जूझने के बाद ही देर रात तक अपने घर पहुंच सके।
लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस तरह के ट्रैफिक जाम की समस्या से बचा जा सकता है? जब किसी शहर के आम नागरिकों और ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में जुटे कर्मियों को इस बात की जानकारी रहती है कि शहर के किन स्थानों पर जलभराव हो सकता है, तब क्या उन्हें कुछ बेहतर प्रशिक्षण देकर और कुछ तकनीकी सहायता लेकर इस समस्या की गंभीरता को कम किया जा सकता है?
किसी शहर में सड़कों पर जलभराव की समस्या का सीधा संबंध इसके ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ा होता है। यदि ड्रेनेज सिस्टम सही से काम कर रहा है, शहर की छोटी नालियों से लेकर बड़े नाले तक सही तरीके से साफ निकाले गए हैं, उनमें सिल्ट निकासी की गई है, तो ऐसी स्थिति में ज्यादातर संभावना यही रहती है कि बारिश का पानी थोड़ी-बहुत देर में स्वयं बहकर निकल जायेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर नहीं होगी। इन व्यवस्थाओं के बेहतर होने के कारण ही विकसित देशों में इस तरह की समस्या का कम सामना करना पड़ता है।
जबकि हमारे यहां जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने पर पानी सड़कों-कॉलोनियों में फैल जाता है। दिल्ली में सड़कों पर बनी बाढ़ के पीछे इसी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बारिश में सड़कों पर बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इसमें बीच-बीच में गाड़ियों के खराब हो जाने से जो ट्रैफिक जाम की अव्यवस्था पैदा होती है, उसे संभालना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए ड्रेनेज सिस्टम से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र बिल्कुल सुनिश्चित होने चाहिए। इसके लिए उन्हें उचित श्रम-धन बल भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही कर्तव्य पालन में असफल होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों को कड़े दंड की व्यवस्था ही स्थिति को सुधारने में मददगार साबित हो सकती है।
यहां तैनाती आवश्यक
चूंकि प्रशासन को इस बात की पूरी जानकारी होती है कि भारी बारिश के कारण किन इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है, ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में तुरंत ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या में तैनाती करनी चाहिए। चूंकि कई बार बारिश में ट्रैफिक लाइट भी खराब हो जाती है, ऐसे में पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस कर्मी व्यवस्था को संभालने में मददगार साबित हो सकते हैं। लेकिन अकसर देखा जाता है कि ऐसे अवसरों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी गायब रहते हैं, जिससे व्यवस्था और अधिक खराब हो जाती है।
भारी बारिश के दौरान किन क्षेत्रों में जलजमाव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है, इसकी सूचना और वैकल्पिक मार्गों का सुझाव लोगों को लगातार सोशल मीडिया और एफएम रेडियो सहित तमाम माध्यमों से दिया जाना चाहिए। इससे लोगों को जाम में फंसने से बचाया जा सकता है। आजकल हर व्यक्ति के पास मोबाइल उपलब्ध होता है। यदि मोबाइल पर लगातार अलर्ट भेजकर लोगों की बारिश-जाम से बचाने की कोशिश की जाए तो इससे बड़ी मदद मिल सकती है।
नागरिक कर्तव्य भाव महत्वपूर्ण
टेरी के ट्रांसपोर्ट और शहरी प्रबंधन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर शारिफ कमर ने अमर उजाला से कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि किसी भी शहर की सीमा में एक निश्चित संख्या में ही निजी वाहनों को चलाने को अनुमति दी जा सकती है। यदि सड़कों की क्षमता से अधिक वाहनों को सड़क पर उतारने की अनुमति दी जाएगी, तो सामान्य दिनों में भी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को संभाल पाना संभव नहीं होगा। विदेशों में दो वाहनों के बीच निश्चित दूरी रखने का नियम होता है। इस नियम के उल्लंघन करने पर लोगों से भारी जुर्माना वसूल किया जाता है, लेकिन हमारे यहां सीमित क्षमता की सड़कों पर अनगिनत वाहनों को उतारने की अनुमति होती है, लिहाजा स्थिति नियंत्रण में नहीं रह गई है।
सार्वजनिक वाहनों का उपयोग
शारिफ कमर ने कहा कि चूंकि, बढ़ती आबादी और घटती भूमि उपलब्धता के कारण नई सड़कों को बनाने की भी एक निश्चित सीमा है, हमें वाहनों की संख्या पर ही नियंत्रण करना होगा। भारी बारिश में भी निजी कार चालकों को ही जाम में ज्यादा फंसना पड़ता है, जबकि मेट्रो या लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले लोगों को इस स्थिति का कम सामना करना पड़ता है। ऐसे में सबसे उपयुक्त सुझाव यही है कि लोग निजी वाहनों की तुलना में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें।